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इस एक चीज का तिरस्कार कभी न करे

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1.जीवन -  जीवन में बुराई अवश्य हो सकती है मगर जीवन बुरा कदापि नहीं हो सकता. जीवन एक अवसर है श्रेष्ठ बनने का, श्रेष्ठ करने का, श्रेष्ठ पाने का.जीवन की दुर्लभता जिस दिन किसी की समझ में आ जाएगी उस दिन कोई भी व्यक्ति जीवन का दुरूपयोग नहीं कर सकता.
       
जीवन वो फूल है जिसमें काँटे तो बहुत हैं मगर सौन्दर्य की भी कोई कमी नहीं. ये और बात है कुछ लोग काँटो को कोसते रहते हैं और कुछ सौन्दर्य का आनन्द लेते हैं. 

जीवन में सब कुछ पाया जा सकता है मगर सब कुछ देने पर भी जीवन को नहीं पाया जा सकता है. जीवन का तिरस्कार नहीं अपितु इससे प्यार करो. जीवन को बुरा कहने की अपेक्षा जीवन की बुराई मिटाने का प्रयास करो, यही समझदारी है.                                                                                                             

2. विचार - जैसे वीज के अभाव में वृक्ष का जन्म नहीं हो सकता, ठीक वैसे ही उच्च विचारों के अभाव में उच्च कर्म घटित नहीं हो सकता. शुभ कर्म और अशुभ कर्म दोनों कर्मों के पीछे जो कारण है वह विचार ही है. हमारे विचारों का स्तर जितना श्रेष्ठ और पवित्र होगा हमारे कर्म भी उतने ही श्रेष्ठ और पवित्र होंगे.

कोई चोर जब तक चोरी नहीं कर सकता, जब तक कि वह पहले उसका विचार न कर लें. अत: हमारा कोई भी कर्म कार्य करने से पहले विचारों में घटित हो जाता है. विचारों का स्तर हमारे संग पर निर्भर करता है. हमारी संगति जितनी अच्छी होगी हम उतने ही अच्छे विचारों के धनी होंगे.        

जब तक हमारे विचार शुद्ध नहीं होंगे तब तक हमारे कर्म भी शुद्ध नहीं हो सकते. इसलिए विचारों को शुद्ध किये बिना कर्म की शुद्धि का प्रयास करना व्यर्थ है. जिसके विचार पवित्र हों उससे बुरा कर्म कभी हो ही नहीं सकता है.                    

संजीव कृष्ण ठाकुर जी , वृन्दावन

DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
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