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शरीर के 9 द्वार

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                                                शरीर के 9 द्वार 

हमारे शरीर मे 9 द्वार (2 आंखे ,2 कान ,2 नाक के स्वर, 1 मुख ,1 लिंग या योनि और 1 गुदा ) होते है 
. जैसा आपका कर्म होता है वैसा ही आत्मा का शरीर से जाने का रास्ता होता है. अगर आपके बहुत बुरे कर्म है तो मरते समय आत्मा का रास्ता गुदा और लिंग से होता है. और अगला जन्म कीट पतंगे, मल-मूत्र गोवर मे रहने वाले कीड़े, खटमल,मच्छर ,मक्खी और कॉकरोच जैसे 24 घंटे मे मरते वाले और पैदा होने वाली योनियों का जन्म मिलता है. 

जिनकी आत्मा का रास्ता मुख से होकर जाता है
. उन लोगो का जन्म बिषेले कीड़े ,साँप और बिच्छू का जन्म मिलता है . जब आत्मा का रास्ता नाक से होकर जाता है तो नाक के दो स्वर होते है 1-चंद्र स्वर 2 सूर्य स्वर . चन्द्र स्वर से जाने वाले रास्ते से मनुष्य का तमोगुणी जन्म मिलता है . और सूर्य स्वर से जाने वाले रास्ते से सतोगुणी जन्म मिलता है . 

जिनकी आत्मा कानो से जाता है इन लोगो को अंतिरिक्ष मे विचरण करने वाले प्राणी का जन्म मिलता है
. जिनका आत्मा नेत्रो से जाता है वो सभी जल के प्राणी के रूप मे जन्म लेते है. और जिनका आत्मा ब्रह्मरंध्र से जाता है तो उनका जन्म नहीं होता है वो लोग मोक्ष को प्राप्त हो जाते है. और ब्रहमरन्ध्र से वो ही आत्म जाती है जिनका ब्रह्मरंध्र चक्र खुला होता है.


मन्त्र की शक्ति - मन्त्र की शक्ति संकल्प आधारित होती है, और संकल्प की शक्ति वायु में कई गुना (फूंक मरने से), जल में कई सौ गुना (देख कर जप करने से ), अग्नि में हवन करने से सूक्ष्म सत्ता और सूक्ष्म लोको तक असर होता है. उससे भी ज्यादा ब्रह्मवेत्ता महापुरुष जब अपने ब्रह्मभाव में आकर मन्त्र का जप करते हैं तो उनसे अनायास ही, न जाने सारे ब्रहमांड के जीवो में उर्जा /आनंद / माधुर्य का संचार होता है.

भारत के योगियों का इसलिए इतना आदर है, और समाज के उत्थान में लगे हुए महापुरुषों का भी, ७ बार दीर्घ प्रणव का जप करने मात्र से पूरे ब्रहमांड की उर्जा से आपका तादात्म्य हों जाता है. आपको पता चले या नही, लेकिन होता है. लेकिन जप कम्बल पर बैठ कर किया जाये, ब्रह्मचर्य मजबूत हों, और पात्र लकड़ी (अथवा कुचालक) पर रखा हों. ताकि उर्जा को धरती में जाने का रास्ता न मिले.साथ ही मन्त्र में श्रद्धा, गुरु की शक्ति, ईश्वर की भक्ति हों, तो चमत्कार संभव हैं. 
 

DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
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