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बरसान- मंदिर

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स्थान - बरसाना के बीचो-बीच एक पहाड़ी है जो कि बरसाने के मस्तिष्‍क पर आभूषण के समान है। उसी के ऊपर राधा रानी मंदिर है और इस मंदिर को बरसाने की लाड़ली जी का मंदिर भी कहा जाता है। यह मंदिर मथुरा से 42 कि॰मी॰ और कोसी से 21 कि॰मी॰ की दूरी पर है । यहाँ की लट्ठामार होली जग प्रसिद्ध है।

 

स्थापना- राधा का प्राचीन मंदिर मध्यकालीन है जो लाल और पीले पत्थर का बना है। राधा कृष्ण को समर्पित इस भव्य और सुन्दर मंदिर का निर्माण राजा वीर सिंह  ने 1675 में करवाया था। बाद में स्थानीय लोगों द्वारा पत्थरों को इस मंदिर में लगवाया।

 

विग्रह - श्री राधा रानी और श्यामसुन्दर जी का विग्रह है.

 

बरसाना का प्राचीन नाम 'वृषभानुपुर' है.श्री नन्दबाबा एवं श्री वृषभानु जी का आपस में घनिष्ट प्रेम था. कंस के द्वारा भेजे गये असुरों के उपद्रवों के कारण जब श्री नन्दराय जी अपने परिवार, समस्त गोपों एवं गौधन के साथ गोकुल-महावन छोड़कर नन्दगाँव में निवास करने लगे, तो श्री वृषभानु जी भी अपने परिवार सहित उनके पीछे-पीछे रावल को त्याग कर चले आये और नन्दगाँव के पास बरसाना में आकर निवास करने लगे.

 

जब श्री ब्रह्मा जी ने प्रार्थना की तो भगवान विष्णु जी ने कहा - "हे ब्रह्मा! आप ब्रज में जाकर वृषभानुपुर में पर्वत रूप धारण कीजिये अतएव बरसाना में ब्रह्मा जी पर्वत रूप में विराजमान हैं. पद्मपुराण के अनुसार यहाँ विष्णु और ब्रह्मा नाम के दो पर्वत आमने सामने विद्यमान हैं. दाहिनी ओर ब्रह्म पर्वत और बायीं विष्णु पर्वत विद्यमान है.बरसाना का पुराना नाम ब्रह्मासरिनि था,

 

यहाँ के पर्वतों पर श्री राधा-कृष्ण जी ने अनेक लीलाएँ की हैं. अपनी मधुर तोतली बोली से श्रीवृषभानु जी एवं कीर्ति जी को सुख प्रदान करती हुईं श्री राधा जी बरसाने की प्रत्येक स्थली को अपने चरण-स्पर्श से धन्य करती हैं. राधा जी को लोग यहाँ प्यार से 'लाड़लीजी' कहते हैं. 

 

बरसाने में होली

बरसाने में होली का त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। बरसाना में लट्ठमार होली की शुरूआत सोलहवीं शताब्दी में हुई थी। तब से बरसाना में यह परंपरा यूं ही निभाई जा रही है, जिसके अनुसार बसंत पंचमी के दिन मंदिर में होली का डांढ़ा गड़ जाने के बाद हर शाम गोस्वामी समाज के लोग धमार गायन करते हैं। प्रसाद में दर्शनार्थियों पर गुलाल बरसाया जाता है। इस दिन राधा जी के मंदिर से पहली चौपाई निकाली जाती है जिसके पीछे-पीछे गोस्वामी समाज के पुरुष झांडा-मंजीरे बजाते हुए होली के पद गाते चलते हैं।

 

बरसाना की रंगीली गली से होकर बाज़ारों से रंग उड़ाती हुई यह चौपाई सभी को होली के आगमन का एहसास करा देती है। मंदिर में पंडे की अच्छी ख़ासी खातिर की जाती है। यहाँ तक कि उस पर क्विंटल के हिसाब से लड्डू बरसाए जाते हैं जिसे पांडे लीला कहा जाता है। श्रद्धालु राधा जी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मंदिर में होती हैं तो उन पर वहाँ के सेवायत चारों तरफ से केसर और इत्र पडे टेसू के रंग और गुलाल की बौछार करते हैं। मंदिर का लंबा चौड़ा प्रांगण रंग-गुलाल से सराबोर हो जाता है।

 

बरसाना के दार्शनिक स्थान - बरसाना का मनगढ़, ब्रह्मगिरी पर्वत, बरसाना का गहनवन  

 

"जय जय श्री राधे "


DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
Comments
2011-11-11 03:43:01 By sonia

vrishbhaan dulari ki jai..

2011-10-01 20:27:09 By Vandana Goel

radhey!!!!!!!

2011-08-14 00:53:11 By Ashish Rai

radhey radhey.......

2011-08-07 06:18:53 By Gulshan Piplani

राधे राधे

2011-08-03 20:55:37 By dr kavindra narain srivastava

he mere krishna he meri radha door karo jeevan ki badha. kavindra

2011-06-21 23:14:01 By Aditya Bansal

nyc radhey radhey vrishbhanu dulari ki jai

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बरसाना - परिचय
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