Theme :
Home
Granth
eBook
Saint
Yatra
Shanka
Health
Pandit Ji

स्वयं का आत्मनिरीक्षण जरुर करे

  Views : 1836   Rating : 0.0   Voted : 0
Rate Article

एक समय रघुकुल के राजा दशरथ जी अपने सारे समाज सहित राज्य सभा में विराजमान थे राजा ने भरी सभा में स्वाभाविक ही हाथ में दर्पण ले लिया और उसमे अपना मुह देखकर मुकुट को सीधा किया.


रायँ सुभायँ मुकुरु कर लीन्हा, बंदनु विलोकि मुकुट सम कीन्हा 


वास्तव में दर्पण या शीशा एक बहुत अच्छा गुरु भी है, और दुश्मन भी है. जब हम शीशा देखते है तो शीशा कहता कुछ नहीं पर संकेत कर जाता है,बिना कहे ही सब कुछ बोल जाता है, आँख में यदि कीचड़ लगा हो, कालर टेडी हो गई हो, सब कुछ संकेत कर देता है, लेकिन ये तो हुआ बाहरी देखना, आतंरिक गुण दोष भी दिखा देता है. और वही शीशा जब कोई दूसरा हमें दिखा दे तो अर्थात कोई कह दे जरा शीशे में तो देख!  तु क्या है? कोई हमें शीशा देखाये इससे पहले ही हमें स्वयं का आत्म निरीक्षण कर लेना चाहिये.


कहते है दो लोगो को शीशा जरुर देखना चाहिये एक तो जो "राजगद्दी" पर बैठा है और दूसरा जो "व्यासगद्दी" पर बैठा हो , क्योकि यहाँ बैठा व्यक्ति दूसरों को शीशा दिखा रहा है,इसका अर्थ है यदि हम घर में वरिष्ठ है, घर कि बाग डोर हमारे हाथो में है,यदि हम किसी को कोई उपदेश करे, सलाह दे, राह दिखाए, तो पहले स्वयं उसको अपने जीवन में उतारे. कमी दिखे तो उसे विकसित करे. शीशा देखने के लिए व्यक्ति एकांत का चयन करे.एकान्त में शीशा आपको आपकी हकीकत दिखायेगा.

 

राजा ने जब शीशा देखा तो सभी को विचित्र लगा भरी सभा में क्यों देखा राजा ने देखा की उनका मुकुट कुछ टेडा है टेड़े मुकुट को सीधा करने लगे तो कान के पास के बालों पर नजर गई बाल सफ़ेद थे,मानो सीधे राजा के कान में ही उपदेश कर कह रहे हो, वासना से उपासना की ओर अब चलो, जीवन भर काली-काली योजनाये बनाते रहे, (विषयों भोगो में लगे रहे) अब उन्हें उज्वलता से भरो, संसार के मोह को त्याग कर, परमात्मा के पथ पर चलो.राजा ने सोचा अब ये सत्ता मुझे किसी और को देनी चाहिये.

 

श्रवण समीप भये सित केसा, मनहूँ जरठ पनु अस उपदेसा ||
नृप जबराजु राम कहूँ देहू, जीवन जनम लाहु किन लेहू  


वास्तव में ये बालों का सफ़ेद होना,दाँत का गिरने लग जाना,आँखों से कम दिखायी देने लगना, कानो से कम सुनाई देने लगना,ये मानो वक्त के उपदेश है हर व्यक्ति के लिए,कि बस अब सारी चीजे रोक दे,और परमात्मा में मन लगा.  
 

DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
Comments
Enter comments


 
आध्यात्मिक रामायण
Last Viewed Articles
eBook Collection
सभी किताबे
राधा संग्रह
ग्रन्थ
कृष्ण संग्रह
व्रज संग्रह
व्रत कथाएँ
यात्रा
DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
Copyright © radhakripa.in>, 2010. All Rights Reserved
You are free to use any content from here.