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भगवान का पाँचवा अवतार - श्री कपिल भगवान

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कपिल मुनि 'सांख्य दर्शन ' के प्रवर्तक हैं, जिसे "कपिल गीता"  भी कहते है. जिन्हें भगवान विष्णु का पंचम अवतार माना जाता है. इनकी माता का नाम "देवहूती" व पिता का नाम "कर्दम" था. कपिल मुनि की माता देवहूती ने विष्णु के समान पुत्र की कामना की थी. अतः भगवान विष्णु ने स्वयं उनके गर्भ से जन्म लिया था.कर्दम और देवहुति की की नौ कन्याए हुई फिर एक पुत्र कपिल भगवान के रूप में अवतरित हुए.कपिल भगवान आजन्म ब्रह्मचारी रहे। 

कर्दम जब संन्यास लेकर वन जाने लगे तो, देवहूती ने कहा, "स्वामी मेरा क्या होगा?" मुझे किसके भरोसे छोडकर जा रहे हो इस पर ऋषि कर्दम ने कहा कि, "तेरा पुत्र ही तुझे ज्ञान देगा
." समय आने पर कपिल ने माता को सुन्दर ज्ञान दिया, वही 'सांख्य दर्शन' है.श्रीमद्भागवत के तृतीय स्कंध में शुकदेव जी ने विस्तार से इसपर चर्चा की है.कहा जाता है कि गंगा सागर में कपिल मुनि का आश्रम था.
 

श्री कृष्ण ने गीता में कपिल को चिंतकों में सर्वोपरि बताया है. उनके विषय में प्रसिद्ध कथा है. महर्षि कपिल ने अयोध्या के इक्ष्वाकु कुल [जिसमें राम का भी जन्म हुआ था] के राजा सगरके साठ हजार पुत्रों को भस्म कर दिया था. सगरके पुत्रों ने अपने पिता के अश्वमेध यज्ञ के घोड़े की खोज में पाताल तक खोद डाला. कपिल मुनि के आश्रम में वो घोड़ा बंधा पाया. उन्होंने कपिल मुनि को ढ़ोंगी समझा कपिल मुनि के आश्रम में बंधा पाया था. 

वास्तव में इंद्र ने सगर के नौवें अश्वमेध यज्ञ को विफल बनाने के लिए ध्यानस्थ मुनि के आश्रम में धोखे से बांध दिया था
. बाद में सगर के पौत्र अंशुमान के अनुरोध पर उनकी मुक्ति का उपाय बताया. उपाय था कि गंगा जब उस भस्म से होकर निकलेगी तब सभी का उद्धार होगा.


 

DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
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