Theme :
Home
Granth
eBook
Saint
Yatra
Shanka
Health
Pandit Ji

अश्व जैसी शक्ति पाना है तो करे -अश्वगंध का सेवन

  Views : 1800   Rating : 0.0   Voted : 0
Rate Article

अश्वगंधा एक झाड़ीदार पौधा है. आयुर्वेद में इस पौधे को बहुत ही उपयोगी माना गया है. इसकी जड़ें नर,नारी ,बालक ,बुजुर्ग सबके लिए एक टॉनिक का काम कर देती है. अश्वगंधा चरपरी, गरम, कड़वी, मादक गंधयुक्त, बलकारक, वातनाशक और खाँसी, श्वास, क्षय को नष्ट करने वाली है इसकी जड़ पौष्टिक, धातुपरिवर्तक और कामोद्दीपक है. 

१. बच्चो के विकास में - जड़ों के चूर्ण का सेवन अगर तीन महीने तक बच्चों को करवाया जाए तो कमजोर बच्चों के शरीर का सही विकास होने लगता है
. 

२. - गठिया रोग में - साथ ही नसें भी सुगठित हो जाती हैं. लेकिन इससे मोटापा नहीं आता. गठिया, धातु, मूत्र तथा पेट के रोगों के लिए यह बहुत उपयोगी है. इससे आप खांसी, सांस फूलना तथा खुजली की भी दवा बना सकते हैं . 

३. - प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में - इसका आप अगर नियमित सेवन शुरू कर दें तो आपकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ जायेगी जिसका दूर गामी परिणाम यह होगा कि आप लंबे समय तक युवा बने रहेंगे बुढ़ापे के रोग आपसे काफी समय तक दूर रहेंगे
. 

४. शुक्रवर्धक -  यह जड़ी सभी प्रकार के वीर्य विकारों को मिटा करके बल-वीर्य बढाता है. साथ ही धातुओं को भी पुष्ट करती है. यह वातनाशक तथा शुक्रवृद्धिकर आयुर्वेदिक औषधियों में प्रमुख है; शुक्रवृद्धिकारक होने के कारण इसको शुक्रला भी कहते हैं। 


५. महिलाओ की बीमारियों में - महिलाओं कि बीमारी में यह जड़ काफी लाभकारी है. इसके नियमित उपयोग से नारी की गर्भ-धारण की क्षमता बढती है प्रसव हो जाने के उपरांत उनमें दूध कि मात्रा भी बढती है. तथा उनकी श्वेत प्रदर,कमर दर्द एवं शारीरिक कमजोरी से जुड़ी सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं. इसके नियमित सेवन से हिमोग्लोबिन तथा लाल रक्त कणों की सख्या में वृद्धि होती है.व्यक्ति की सामान्य बुद्धि का विकास होता है. 


DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
Comments
Enter comments


 
आयुर्वेदिक औषधियाँ
Last Viewed Articles
eBook Collection
सभी किताबे
राधा संग्रह
ग्रन्थ
कृष्ण संग्रह
व्रज संग्रह
व्रत कथाएँ
यात्रा
DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
Copyright © radhakripa.in>, 2010. All Rights Reserved
You are free to use any content from here.