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इश्क

 
हम श्याम के नाम की दीवानी
 
 

"कैसे तुम गणिका के अवगुण ना गिने नाथ, कैसे तुम भीलनी के झूठे बेर खाए हो,

                      

                     कैसे तुम सुदामा के छिन में दरिद्र हरे, कैसे तुम नंगे पाँव गज काज धाये हो,

 

कैसे तुम द्वारिका से द्रोपदी की टेर सुनी, कैसे तुम अग्रसेन बंधी से छुड़ाये हो,

                    

                    मेरी बेर ऐती देर कान मूंद रहे नाथ, तुम दींनबन्धू दीनानाथ काहे के कहाये हो || ”  

 

 

“हम प्रेम नगर की बंजारिन जप-तप और साधन क्या जाने,

                    

                  हम श्याम के नाम की दीवानी, व्रत नेम के बंधन क्या जाने,

 

 हम ब्रज की भोली ग्वारनियाँ, हम ज्ञान की उलझन क्या जाने,

                    

                ये प्रेम की बाते है ऊद्धो, कोई क्या समझे, कोई क्या जाने,

 

 मेरे और मोहन की बाते, या मै जानू या वो जाने || ”  

 

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