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सत्संग
भक्ति और ज्ञान मार्ग का अंतर
 
#Readers :

सभी जानते है कि रस के दो मार्ग है भक्ति (प्रेम) और ज्ञान. परन्तु इन दोनों मार्गो मे चलने के लिए एक बात परम आवश्यक है. ज्ञान के लिए जिज्ञासा और प्रेम के लिए पिपासा ! इसके बिना कोई आगे नहीं बढ़ पाया !

 

हमारे संतो ने थोडा सा सरल करके इन दो मार्गो के व्याख्या की है ! वैसे सभी मार्गो का अंतिम लक्ष्य तो वही परम सत्ता की प्राप्ति है !

 

वैसे तो बच्चो को हमेशा अपने पालक पर निर्भर होना पड़ता है ! हमारे संत कहते है कि ज्ञान मार्ग बंदर के जीवन जैसा है! बंदर के बच्चे को हमेशा अपने पालक तो पकड़ कर रखना होता है ! यदि वह गिरता है तो उसमे पालक का कोई दोष नहीं, यंहा बच्चे ने पालक को पकड़ रखा है ! ये ज्ञान मार्ग है !

 

भक्ति मार्ग बिल्ली के बच्चे की तरह है ! बिल्ली अपने बच्चे को अपने बच्चे को मुह मे दबा कर यंहा से वंहा ले जाती है !अब यदि बच्चे को कुछ भी हो तो ये पालक की जिम्मेदारी होती है ! यंहा बच्चे ने पालक को नहीं पकड़ रखा , पालक ने बच्चे को संभाल रखा है ! भक्ति मे हमें सिर्फ हाथ बढाना है ! बाकी पालक की जिम्मेदारी !

"जय जय श्री राधे "

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