Home
Darbaar
Shanka
1M
GauSeva
Saint
eBook
Photo
Video
eSatsung
Pandit
Radio
Worship
Store
 
Hindi
सत्संग
परिचय - गौरव कृष्ण जी
 
#Readers :

श्रदेय गौरव कृष्ण जी महाराज का जन्म ६ जुलाई १९८४ में वृन्दावन में हुआ है श्री मृदुल कृष्णा जी गोस्वामी उनके पिता और श्री वंदना गोस्वामी उनकी माता है. उनका जन्म एक ऐसे भगवत भक्त परिवार में हुआ जहाँ संस्कृत और श्रीमद भागवात की कथा पूर्वजो से ही चली आ रही है स्वामी श्री हरिदास जो गोपी अवतार थे इनके ही पूर्वज थे जिन्होंने अपनी संगीत साधना से बाके बिहारी जी को, श्री धाम वृंदावन में प्रकट किया जो कि आज भी है.

 

 

ये बचपन से ही भगवान कृष्णा और राधा जी के भक्त है और श्रीमद भागवत पुराण में इनकी निष्ठा थी इनके दादा जी पूज्य श्री मूल बिहारी गोस्वामी कथा करते थे और पिता और गुरुदेव श्री मृदुल कृष्ण जी भागवत कथा करते  चले आ रहे है गौरव कृष्णा जी भी उन्ही के पद चिन्हों पर चल रहे है. अपने पिता श्री मृदुल कृष्णा जी से इन्होने १०८ बार श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया फिर स्वयं कथा सुनाना प्रारभ किया इनकी कथा कितनी ही बार क्यों न सुनी हो हर बार कथा इस तरह से सुनते है लगता है कि पहली बार कथा सुन रहे है.  

 

इनका संस्कृत ज्ञान बहुत अच्छा है श्रीमद भागवत के श्लोक इन्हें कंठस्थ याद है जिन्हें ये बड़ी ही सरलता से कह देते है जो की हर एक के बस की बात नहीं है, इन्होने पहली कथा १८ वर्ष की उम्र से शुरू की और आगे बढते ही चले गए कभी पीछे मुड़कर भी नहीं देखा जब इनकी कथा होती है तो लोग एक पल के लिए भी कही भी नहीं जाते सब बड़े भाव से भक्ति में डूब जाते है.

 

 

इन्होक ने न केवल भारत बल्कि भारत से बहार विदेशो में भी कथा सुनाई है उनकी कथा बहुत से लोगो को दिशा देती है उनके भजन ह्रदय को छू लेने वाले होते है जिन्हें सुनकर सबके ह्रदय में बाके विहारी जी अनुभूति होती है.

 

 

“जय जय श्री राधे ”   

 

Comments
Enter comments


 
Share
!! जय जय श्री राधे !!
 
 
श्रीमद्भागवत
ब्रज संग्रह
कृष्ण संग्रह
राधा संग्रह
स्त्रोत संग्रह
आरती संग्रह
रास पंचाध्यायी
गोपी गीत
शिक्षाएँ
भक्त चरित्र
ज्ञान
एकादशी
चैतन्य सन्देश
Copyright © radhakripa.com, 2010. All Rights Reserved
You are free to use any content from here but you need to include radhakripa logo and provide back link to http://radhakripa.com