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माया

माया का क्या रुप है। क्योकि हर कोई माया के मोह मे फसा हुआ है। माया के बन्धन से हम छुट गये हम कब समझेँगे।

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2849 days 15 hrs 56 mins ago By Gulshan Piplani
 

इसको समझने का सबसे आसान तरीका है की भगवान् की पूजा करते वक़्त या ध्यान में बेठने पर जो भी विचार आते हैं वोह सब माया का ही रूप हैं| जब विचार आने बंद हो जायें समझ लेना माया के जाल से आप निकल गए|

2850 days 10 hrs ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... माया का स्वरूप व्यक्ति की परछाईं के समान होता है, जिस प्रकार कोई भी व्यक्ति अपनी परछाईं को कभी नहीं पकड़ सकता है उसी प्रकार माया को कोई नहीं पकड़ सकता है।..... माया के बंधन से कोई भी व्यक्ति स्वयं नहीं छूट सकता है, माया के बंधन से केवल वही व्यक्ति छूट पाता है जिसे भगवान की कृपा की पात्रता हासिल हो जाती है।..... भगवान की कृपा की पात्रता उसी व्यक्ति को प्राप्त होती है जो अपने कर्तव्य कर्मों को फल की आसक्ति के बिना (निष्काम भाव) से करता है।.... भगवान की कृपा की पात्रता हासिल हो जाने की अनुभूति उसी प्रकार की होती है जिस प्रकार गूँगे व्यक्ति से कोई पूछे मिठाई का स्वाद कैसा होता है।.... यानि इस अनुभूति को शब्दों में वयान नहीं किया जा सकता है।

2851 days 17 hrs 34 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

माया ! अर्थात जो आपको ठग ले आपको मोह ले अपने बंधन में बाँध ले वो माया है | जैसे असुरों को समुद्र मंथन के बाद अमृत कलश वापस लेने के लिए प्रभु ने मोहिनी रूप धर कर उनको ठगा | नारद जी के अहम् को ख़त्म करने के लिए विश्व मोहिनी रूप धर कर ठगा | ऐसे ही संसार में हम उस माया के अधीन रहते हैं कभी लोभ के रूप में आती है कभी मोह के रूप में आती है कभी अहम् के रूप में आती है | उसके इतने रूप हैं एक रूप से हम छूटते हैं तुरंत दूसरा रूप धर कर आ जाती है और अपने जाल में बाँध लेती है | इससे बचने का उपाय तो सिर्फ एक ही है और वो है जिसकी ये माया है उसकी शरण में चले जाओ बस तभी बच सकते हैं नहीं तो नहीं | इसको एक उदहारण से समझ सकते हैं : एक मछेरा नदी में जाल डाल रहा था मछलियों को पकड़ने के लिए मछलियाँ घबरा रहीं थी इधर उधर भाग रही थी पर उस जाल से नहीं बच पा रही थी एक योगी उधर से निकले उन्होंने मछलियों की दशा देखी तो मछलियों से बोले अगर तुमने बचना है तो मछेरे के पैरो के पास इकट्ठी हो जाओ फिर तुम्हारा कुछ नहीं बिगड़ेगा | जो मछलियाँ उसके पैरों के पास रहीं वो मछेरे के जाल से बची रहीं | माया से बचने का सिर्फ एक ही तरीका है मायापति के चरण कमलों की शरण में जाने से | एक फिल्म का डायलोग है की गब्बर के खौफ से तुमसे सिर्फ गब्बर ही बचा सकता है | ऐसे ही माया पति की माया से सिर्फ माया पति ही रक्षा कर सकते हैं | राधे राधे

2851 days 17 hrs 54 mins ago By Avichal Mishra
 

maya ka roop hai; radha, laxmi, rambha, rukmani, geeta, tripti etc. Maya se chootna na chaho; kyonki maya wo gandh hai jise jitna bhi kholna chaho; wo utni hi majboot hoti jati hai; ata; maya ko pyar karo; aur bhagwan ka sumiran karo; yani sabhi se pyaar karo; lekin sirf prabhu ko yaad karo;; jai... jai... shri radhe...

2851 days 18 hrs 37 mins ago By Gulshan Piplani
 

इसको समझने का सबसे आसान तरीका है की भगवान् की पूजा करते वक़्त या ध्यान में बेठने पर जो भी विचार आते हैं वोह सब माया का ही रूप हैं| जब विचार आने बंद हो जायें समझ लेना माया के जाल से आप निकल गए|

 
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