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वनस्पतियों में भी जीव होता है

वनस्पतियों में भी जीव होता है यह सब जानते हैं| तो फिर अन्न में भी जीव होता है| अगर हाँ तो अन्न भक्षण में क्या हिंसा का पाप लगता है?अगर हौं तो कैसे अगर नहीं तो क्यों?

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3213 days 4 hrs 15 mins ago By Bhakti Rathore
 

ha mager unsehume paap nahi lagta he kyunki parmatma ne hume wo he diya hekhane ko so sub unko samprit kerte chalo

3218 days 2 hrs 56 mins ago By Diwakar Kushwaha
 

vanaspatiyo me jeev avashya hota hai lakin anna aur phal tab prapt hota hai jab uske tyag ka samay aata hai,atah isme kisi prakaar ka paap nahi hai

3218 days 4 hrs 14 mins ago By Vipin Sharma
 

SABSE JYADA JEEV PAANI ME HOTE HAIN. EK BOOND PANI ME 36465 JEEV HOTE HAIN. AB AAP IDEA LAGA SAKTE HO KI UNKA SIZE KYA HOGA. ISLIYE AAP PAANKI KA KUCH BHI KARO VO JEEV NAST NAHI HO SAKTE. ISLIYE VO JEEV MARTE NAHI HAIN. JAB TAK UNKA SAMAY NAHI AATA. ISILIYE HAME PAANI PEENE ME OR ANN KHANE ME KOI PAAP NAHI LAGTA,.

3219 days 2 hrs 3 mins ago By Gulshan Piplani
 

छान्दौप्निषद के ६.६.२ के अनुसार अनाज के प्रत्येक दाने में जीव रहता है| उस प्रकार हजारों दानों (अर्थात जीवों) से मनुष्य के उदर के पूर्ति होती है| उस हिसाब से हजारों जीवों की हिंसा हुई| परन्तु ब्रह्मसूत्र - वेदव्यासप्रणीत - वेद दर्शन के अनुसार पुरुष को 'अग्नि' बताकर उसमें अन्न को हवन करना बताया गया है तथा इसका विधान होने के कारण उसमें हिंसा नहीं होती| दूसरा अन्न में उन जीवों के उस काल में सुषुप्ति अवस्था रहती है, जब वे पृथ्वी और जल के सम्बन्ध से अंकुरित होते हैं, तब उनमें चेतना आती है और सुख-दुःख का ज्ञान होता है, पहले नहीं| अत: अन्न भक्षण में हिंसा नहीं है| - गुलशन हरभगवान पिपलानी

3219 days 2 hrs 38 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

चेतन तत्व के बिना तो इस संसार में कुछ है ही नहीं | लेकिन उस परम सत्ता ने हर जीव का भोजन बनाया है और जो भोजन उस जीव का बनाया है उसे लेने से उस जीव को पाप नहीं लगता कोई हिंसा उसमे नहीं होती | हिंसा तब होती है जब जीव अपने सिर्फ अहम् की तुष्टि के लिए किसी जीव को मारते हैं जैसे कोई क्रोध में फसल को रौंद दे तो उसे हिंसा का पाप लगेगा | ऐसे ही कोई शेर जब अपने भोजन के लिए किसी का शिकार करता है तो उसे हिंसा का पाप नहीं लगता लेकिन वही शेर सिर्फ अपने उन्माद वश किसी का शिकार करता है तो वो उस पाप का भागी होता है | हमारे देश में शाक बहुत है इंसान स्वभावतः शाकाहारी है इसलिए उसका भोजन शाक ही है | हाँ हो सकता है जिन देशो में शाक का उत्पादन नहीं है वहाँ वो अगर मांस का प्रयोग करते हैं तो वो पाप के भागी नहीं है | राधे राधे

 
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