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क्रोध, ईर्ष्या और लालच जैसी नकारात्मक भावनाएं क्यों आती है?


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2976 days 5 hrs 14 mins ago By Waste Sam
 

radhey radhey... har jeev mein sattva, rajo aur tamas gun hota hai... samay samay par yeh gun balwati hote hai aur insaan ke soch ko prabhawait karte hai... jab hum rajo yaa tamo gun ke aadhin hote hai tab nakaratmak bhawanaye hume gher lete hai... sattva gun mein sthir rehne ke liye hum bhagwan ke bhakti mein madad kar sakti hai... jai shri radhey

2984 days 6 hrs 37 mins ago By Bhakti Rathore
 

jub humhra man humre kaabhu me nahi hota he tub ye teeno bhvnaye janm leti he man ko kabu me rakho apne aap sub theek hoga

2991 days 7 hrs 20 mins ago By Ashish Anand
 

anger,envy aur greed ye teeno hoi maya ke banaye huye ashtra hain, jisame adami ek kaidi ki bhati uljha rehata hai, agar insaan mein ye na ho to fir iss shristi ka srijan kaise hoga kaise log ek-dusare ke sath pati-patni aur bacche ka sambandh nibhaten hai, vastav mein ye bhi koi buri bhavnayen nahin hai, jab hum isse bhagwan ki seva aur bhakti mein laga de... krodh isliye ki maine koi kam bhagwan ke viruddha kaise kiya, envy isliye ki bhagwan agar prahlad mahraj ko darshan de sakta hai to mujhe kyun nahin aur geed isliye ki kash mujhe bhi bhagwan ki koi seva hath lag jati to main uss seva ko sabse behtarin karunga.... so apna nazriya badla do... samsyayen apne aap apke sadhan mein badal jayengi... radhe-krishna

2991 days 10 hrs 26 mins ago By Gulshan Piplani
 

दरअसल यहाँ तीन विषयों को एक साथ पूछा गया है| हमें नकारात्मक भावनाओं को सकारात्मक रूप से लेना होगा| प्रभु प्रदान कोई भी तत्व नकारात्मक हो ही नहीं सकता| क्योंकि सृष्टि सृजन के लिए एक एक तत्व की उपयोगिता है | अगर प्रभु लालच मनुष्य को प्रदान न करते तो मनुष्य आलसी हो जाता क्रियाशील नहीं रह पाता और बुद्धि की उपयोगिता भी समाप्त हो जाती| क्योंकि लालच ही उसे बुद्धि के प्रयोग के लिए अग्रसर करता है| आज ज्ञान-विज्ञान न बढ़ता| लालच मात्र धन का नहीं होता| लालच नाम का भी होता है| मान का भी होता है| लालच जुबान का भी होता है| लालच वाणी का भी होता है| समस्त ज्ञानेन्द्रियाँ हर जगह लालच ही ढूँढती रहती हैं| और लालच ढूंढ कर उसे मन को प्रेषित कर देती हैं|मन चाहतों को जन्म प्रदान करता है और चाहत ही लालच का दूसरा रूप है| लालच की पूर्ति न होना क्रोध के कई कारणों मैं एक कारण है और उस लालच की पूर्ति अगर हम नहीं कर पाते पर हमारे नज़दीक के अन्य लोगों को प्राप्त हो जाती है तो वोह इर्ष्या का कारण बन जाती है| जितने भी तत्व है सब के सब किसी न किसी तरह आपस में जुड़े हुए हैं| - राधे-राधे

2991 days 12 hrs 12 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... नकारात्मक सोच से नकारात्मक विचार उत्पन्न होते है, नकारात्मक विचारों से नकारात्मक भावनायें उत्पन्न होती हैं, नकारात्मक भावनाओं के कारण ही इन विकारों की उत्पत्ति होती है।

2992 days 4 hrs 48 mins ago By Manish Nema
 

2992 days 4 hrs 49 mins ago By Nidhi Nema
 

राधे राधे ’मुझ में यह भावनाएं हैं’ - यह मान कर मत चलो। यह मान कर चलोगे तो वैसे ही हो जाओगे। अभी कहाँ हैं यह भावनाएं? वर्तमान क्षण में तुम निर्दोष हो। वर्तमान की निर्दोषता पर यकीन करो। धीरे-धीरे ऐसा होगा कि तुम्हे लगेगा, "यह सब भावनाएं मुझमें है ही नहीं"। तुम्हे ऐसा अनुभव होने लगेगा कि तुम भीतर से कितने सुन्दर हो। पहले सुना था पर अब अनुभव में आएगा।

 
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