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AVTAARON KO BHAGWAN KAISE MAAN SAKTE HAIN...? UNHONE AISA KAUNSA KAAM KIYA JO HUM UNHE BHAGWAN MAANE .?

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2652 days 22 hrs 31 mins ago By Gulshan Piplani
 

देवता भी रूप बदल बदल कर अवतरित होते हैं| तभी ब्रह्मसूत्र में कहा गया है कि असल में ३३ देवता हैं परन्तु वोह एक से अनेक हो जाने की क्षमता रखते हैं (वेदांत दर्शन - ब्रह्मसूत्र - लेखक हरीकृषण दास गोयन्दका) कई बार लोग उनके चमत्कारों के वशीभूत हो उन्हें ही भगवान् समझ लेते हैं| भगवन, परमेश्वर, परब्रह्म एक ही हैं|

2652 days 23 hrs 8 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

बहुत सही बात कही है इस प्रश्नं के माध्यम से हम अवतारों को भगवान् कैसे माने क्योंकि देखो ना हम भी तो भगवान् का ही अवतार हैं हममे भी तो उसका ही अंश है | पर हम भगवान् नहीं है ऐसे ही हममे से कई विशेष व्यक्ति भी होंगे जिन्हें हम वी आयी पी कहते हैं पर वो भी भगवान् नहीं है जैसे आज के जमाने में सचिन सोनिया गांधी अमिताभ या संतो में मोरारी बापू, बरसाने में रमेश बाबा, विनोद बाबा दुनिया उनके चरणों में झुकती है पर फिर भी वो भगवान् की श्रेणी में नहीं है | भगवान् होने के लिए तो कोई विशिष्टता ही होनी चाहिए | आईये राम अवतार को देखें बड़ा ही मर्यादित जीवन है उनका १४ वर्ष बनवास का तप है राम रावण युद्ध में सत्य की विजय हम सब मानते हैं | पर हो सकता है किसी की नज़र में ये सब कार्य एक विशिष्ट व्यक्ति कर सकता है लेकिन वो भगवान् नहीं हो सकता क्योंकि भगवान् होने के लिए तीन चीजे जरूरी है और वो है बनाना पालना और संहार करना जिसमे ये तीनो क्षमता हों वो ही भगवान् है | और ये बनाना पालना और संहार करना किसी व्यक्ति का नहीं ये है धर्म का | राम ने अपने अवतार में ये तीनो कार्य किये हैं पहले से चली आ रही कुप्रथाओं का संहार किया है धर्म की मर्यादाओं की स्थापना की है और खुद उस मर्यादित जीवन को जी कर उसका पालन किया है | जब ये कार्य संतो से नहीं हो पाते संसार में राक्षसी वृति बढ़ जाती है तब भगवान् को स्वयं अवतरित होना पढता है ना केवल राक्षसी वृतियों का संहार करने के लिए वरन धर्म को पुनः स्थापना करने और उसके पालन के लिए | ऐसे ही कृष्ण अवतार में पुरानी कठोर तप की क्रियाओं का समापन कराके उन्होंने एक नए मार्ग की स्थापना की वो है प्रेम का मार्ग और संसार को ये सिखाया कि विरह में ही प्रेम पलता है और प्रेम के द्वारा भगवान् कि प्राप्ति कितनी सहज है और कैसे प्रेम के द्वारा समाधि कि स्थिति को प्राप्त किया जा सकता है | और भगवान् कृष्ण ने गोपिओं के माध्यम से ये करके दिखाया | खुद भी विरह को जिया और गोपिओं ने भी जिया और प्रेम में समाधिस्त कैसे हो सकते हैं ये स्थापित करके दिखाया | मेरी नज़र में कुछ ऐसा ही है भगवान् अवतार का प्रयोजन | राधे राधे

2653 days 2 hrs 59 mins ago By Vipin Sharma
 

jo karya unhone kiye un karyon ko koi bhi raja kar sakta tha aap jara bataye ki aisa kaunsa karya kiya jo koi or raja nahi kar sakta tha >??

2653 days 3 hrs 21 mins ago By Ashish Anand
 

bhagwan ka avtaar hi nahin, unka to 'mandir mein rakhe arch-vigrah bhi bhagwan hi hai, bhagwan ka roop nahin'... so bhagwan jab avtaar leten hain to ve koi sadharan karya karne ke liye nahin aaten, unake jitane bhi avtaar hain, unhone koi sadharan karya nahin kiya hai... unhone jitane bhi karya kiye hai, kya vo koi sadharan insan kar sakta hai... nahin kabhi nahin... isliye unke avtaar bhi unse bhinna nahin hoten hain...

 
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