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क्या सचमुच परम सत्य का अस्तित्व है?

इस बारे में आपका क्या द्रष्टिकोण है ?

  Views :644  Rating :5.0  Voted :2  Clarifications :9
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2840 days 1 mins ago By Waste Sam
 

radhey radhey.. yeh prashan toh kuch aise hai jaise koi kahe kya bhagwan ka astitva hai? satya bhagwan ka hee roop hai, satya ke adhaar par surya roshni deta hai, prithvi yeh bhar vahan karti hai... satya ka astitva sada rehega kyonki yeh bhagwan khud hee hai.. jai shri radhey

2860 days 10 hrs 34 mins ago By Gulshan Piplani
 

अस्तित्व ही सत्य का है| यह प्रशन बहुत महवपूर्ण है मैंने अपनी पुस्तक शांतिपथ में इसे प्रतिपादित किया है| उसे ही यहाँ कहता हूँ| हम झूठ को कहाँ मानते हैं दरअसल जब हमें पता चलता है कि सामने वाला झूठ बोल रहा है तो हम उसकी बात को नहीं मानते परन्तु जब झूठ स्वम को सत्य के रूप में दिखाता है तभी तो हम उसको मानते हैं| तो जिसको सहारे कि आवश्यकता है वोह कौन हुआ झूठ और जिसके सहारे कि आवश्यकता है वोह कौन हुआ सत्य तो फिर यह कहना कि क्या सचमुच परम सत्य का अस्तित्व है, परम सत्य को गाली देने के सामान हुआ| - राधे राधे

2874 days 6 hrs 53 mins ago By Ashish Anand
 

pehale ye jaane ki 'wastav mein param satya(eternal truth) hai kya...?' hum ye jaan le ki iss sansar mein kuch bhi satya nahin hai, kuch bhi nahin... sirf satya hai to wo Ishwar, wo niyanta, jisane ye sab maya rachi hai... usake siva ek kan bhi satya nahin... isiliye to usse 'sacchidanand vigrah kehaten hain...' sacchidanand means - eteranal truth, full of knowlegde and eternal blissful... so agar bhagwan ka astitva hai so samjho uss param satya ka hi astitva hai...

2881 days 13 hrs 43 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... परम सत्य ही प्रत्येक वस्तु का पूरक है।

2888 days 8 hrs 24 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

param saty ka astiv hai ya nahi ye prashn bahut uthta hai kuch log maante hain ki ye sansaar sanyog aur viyog se bana hai bas bhog bhogne ke liye hain khao pio aur maujh karo par hamaare santon isse alag khoja hai unhone paaya hai ki ek saarvbhom satta hai jo isko niyantrit karti hai us satta ke niyam me hi saara sansaar bandha hai jaise sury apne samay se nikalta hai aur apne samay se ast hota hai rituyen bhi apne samay se aati hain nadiyaan bhi ek rup se behati hai samudr ki lehron me bhi ek taal mail hai yaani sab us niyam se bandhe hain jo us satta ke banaayen hue hain isliye ye bilkul saty hai ki us param saty ka astitv hai aur use sirf saty ke dwara hi jaana jaa sakta hai anubhav kiya jaa sakta hai jhoot ke aavran me rahkar us saty ka gyaan sambhav nahi hai radhe radhe

2888 days 12 hrs 42 mins ago By Aditya Bansal
 

PARAM SATYA HAI ATMA AUR PARMATMA AATMA BHI USI PARMATMA KA ANSH HAI JAB INSAAN KA SHARIR PURA HOGA USI PARMATMA MEIN JAKA MIL JAYEGA HUM IN SANSAARIK CHEEZON MEIN PAD KAR DUKHI HOTE HAI PAR PARMATMA AISI CONDTIONS PAIDA KARTE HAI JAB HUM USS PARMATMA KE PAAS ROTE HUYE JAATE HAI AND WOH YAHI ANSWERS DETE HAI EXPERICNE MIL GAYA ND TUMHE PATA LAG GAYA IS JIVAN KA EK HE PARAM SATYA HAI WOH MEIN HAI BAAKI SAB JHUT HAI :) ;) :p

2888 days 13 hrs 43 mins ago By Anu Mehta
 

ईश्वर ने परम सत्य कहां छुपाया है एक बार ईश्वर ने सभी प्राणियों को बुलाया, लेकिन मानव को जान-बूझकर छोड़ दिया। दरअसल, वह इंसान से कुछ छुपाना चाहता था। ईश्वर चाहता था कि ‘परमसत्य’ इंसान की पहुंच में न आए। इसके लिए उसने सभी प्राणियों से सुझाव मांगे कि आख़िर परमसत्य को कहां छुपाया जाए, जहां तक मानव पहुंच ही न पाए। सभी ने सोचना शुरू किया। सबसे पहले चील बोली, ‘प्रभु, उसे मुझे दे दीजिए, मैं उसे चांद पर गड़ा आऊंगी।’ ईश्वर मनुष्य की क्षमता जानता था, इसलिए उसने तुरंत कहा, ‘नहीं-नहीं, चांद पर पहुंचना बहुत मुश्किल नहीं है। एक न एक दिन इंसान वहां पहुंच ही जाएगा।’ फिर एक मछली बोली कि मैं उसे सागर की अतल गहराइयों में ले जाकर दबा देती हूं। ईश्वर ने फिर प्रतिवाद किया कि सागर भी मनुष्य की पहुंच से दूर नहीं है। किसी न किसी दिन वह उसकी गहराई को भी नाप ही लेगा। अबकी बार एक छछूंदर ने सुझाव दिया, ‘मैं उस परमसत्य को धरती के गर्भ में गड़ा देता हूं।’ इस बार भी ईश्वर का वही जवाब था कि वह जगह भी इंसान की पहुंच से ज्यादा दूर नहीं रहेगी। समस्या विकट थी। सभी प्राणी अपनी-अपनी क्षमता के हिसाब से सुझाव दे रहे थे, लेकिन ईश्वर मानव की क्षमताओं से अनजान नहीं था। वह जानता था कि मानव एक न एक दिन संसार के हर कोने को छू लेगा और उससे कुछ भी छुपा न रह जाएगा। एक बूढ़ा कछुआ सबकी बातें सुन रहा था। जब सब ने हथियार डाल दिए, तो उसने अपनी महीन आवाÊा में कहा, ‘मेरे ख्याल से उसे इंसान के दिल के भीतर छुपा देना चाहिए। वह वहां कभी नहीं झांकेगा।’ और ईश्वर ने ऐसा ही किया।

2888 days 13 hrs 43 mins ago By Anu Mehta
 

ईश्वर ने परम सत्य कहां छुपाया है एक बार ईश्वर ने सभी प्राणियों को बुलाया, लेकिन मानव को जान-बूझकर छोड़ दिया। दरअसल, वह इंसान से कुछ छुपाना चाहता था। ईश्वर चाहता था कि ‘परमसत्य’ इंसान की पहुंच में न आए। इसके लिए उसने सभी प्राणियों से सुझाव मांगे कि आख़िर परमसत्य को कहां छुपाया जाए, जहां तक मानव पहुंच ही न पाए। सभी ने सोचना शुरू किया। सबसे पहले चील बोली, ‘प्रभु, उसे मुझे दे दीजिए, मैं उसे चांद पर गड़ा आऊंगी।’ ईश्वर मनुष्य की क्षमता जानता था, इसलिए उसने तुरंत कहा, ‘नहीं-नहीं, चांद पर पहुंचना बहुत मुश्किल नहीं है। एक न एक दिन इंसान वहां पहुंच ही जाएगा।’ फिर एक मछली बोली कि मैं उसे सागर की अतल गहराइयों में ले जाकर दबा देती हूं। ईश्वर ने फिर प्रतिवाद किया कि सागर भी मनुष्य की पहुंच से दूर नहीं है। किसी न किसी दिन वह उसकी गहराई को भी नाप ही लेगा। अबकी बार एक छछूंदर ने सुझाव दिया, ‘मैं उस परमसत्य को धरती के गर्भ में गड़ा देता हूं।’ इस बार भी ईश्वर का वही जवाब था कि वह जगह भी इंसान की पहुंच से ज्यादा दूर नहीं रहेगी। समस्या विकट थी। सभी प्राणी अपनी-अपनी क्षमता के हिसाब से सुझाव दे रहे थे, लेकिन ईश्वर मानव की क्षमताओं से अनजान नहीं था। वह जानता था कि मानव एक न एक दिन संसार के हर कोने को छू लेगा और उससे कुछ भी छुपा न रह जाएगा। एक बूढ़ा कछुआ सबकी बातें सुन रहा था। जब सब ने हथियार डाल दिए, तो उसने अपनी महीन आवाÊा में कहा, ‘मेरे ख्याल से उसे इंसान के दिल के भीतर छुपा देना चाहिए। वह वहां कभी नहीं झांकेगा।’ और ईश्वर ने ऐसा ही किया।

2888 days 15 hrs 8 mins ago By Dasi Radhika
 

सत्य वो है जो कल भी था, आज भी है और कल भी रहेगा| हमारे अस्तित्व के केंद्र में कुछ है जो कभी नहीं बदलता और वही परम सत्य है| "राधे राधे"

 
Tags :
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