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संसार में इतना दुःख क्यों है ?

इस बारे में आपका क्या द्रष्टिकोण है ? क्यों इस संसार को दुखालय भी कहा जाता है ? क्या वास्तव में संसार में दुःख है ?

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2997 days 10 hrs 10 mins ago By Astro Kaushal Pandey
 

radhe radhe

3102 days 19 hrs 48 mins ago By Gulshan Piplani
 

वास्तव में संसार में दुःख नाम मात्र भी नहीं है दुःख तो मात्र एक स्थिति है जोकि चाहतों के वशीभूत है| शरीर उस स्थिति का कर्म क्षेत्र है जोकि मानव के भावों का रूप है स्वरूप नहीं| क्योंकि स्वरूप बदलता नहीं है| यह संसार अमरत्व का स्थान है जहाँ मनुष्य अपने कर्मो द्वारा अमरत्व को प्राप्त कर सकता है परन्तु जो लोग मात्र अपना जीवन कामनाओं को समर्पित कर देते हैं उनके लिए यही लोक मृत्यु लोक बन जाता है और मृत्युलोक में दुःख और सुख दोनों व्याप्त हैं| दुःख का मूल कारन कर्ता भाव है नाकि संसार, संसार मानव का कर्म क्षेत्र है| - हरिओम तत्सत -

3143 days 22 hrs 13 mins ago By Waste Sam
 

radhey radhey, mera vichar hai ke dukh sansar mein nahi humara drishtikon hai sansar ke prati... dukh ka karan hai humari kamnaye aur unka poora na hona... yadi hum apni icchon ko udaan na bharne de toh ddukh bhi kum ho jayega.. jai shri radhey

3157 days 6 hrs 47 mins ago By Vipin Sharma
 

ICHHAYE HAIN TO DUKH H. ICHHAYE SAMAPT TO DUKH BHI NAHI RAHTA.

3161 days 23 hrs 20 mins ago By Gulshan Piplani
 

बुद्धि में कामनायें हैं जो कभी पूर्ण नहीं होती मन में इच्छायें हैं जिसकी पूर्ती करते करते मनुष्य थक जाता है जब पूर्ण होती हैं तो क्षणिक सुख पाता है नहीं तो दुःख| दरअसल इस म्र्त्युलोक में सुख है ही कहाँ| हर सुख में दुःख छिपा है| और असली कारण तो कर्तापन है| फल की इच्छा का त्याग कर दो आनंद आना शुरू हो जायेगा|

3173 days 2 hrs 35 mins ago By Gulshan Piplani
 

क्योंकि मन है और मन में चाहतें जिन्दा हैं और चाहतों में दुःख व्याप्त है|

3209 days 9 hrs 40 mins ago By Aditya Bansal
 

Har manusya es sansar mey apne aas paas moh-maya ka jaal khood bunta hai aur usi mey faskar rah jaataa hai saare takleefon ke vavjood

3222 days 8 hrs 3 mins ago By Aditya Bansal
 

radhey radhey

3249 days 6 hrs 53 mins ago By Aditya Bansal
 

icha khatam ho tabhi dukh jayneg..ek kahtam ni hoti dusri tayar hai prabhu yeh prabhu woh

3263 days 22 hrs 27 mins ago By Shyam Sakha
 

3277 days 19 hrs 40 mins ago By Nidhi Nema
 

iam agree with you,kailash ji,"radhe-radhe"

3277 days 20 hrs 2 mins ago By Kailash Chandra Shar
 

संपूर्ण दुखो का कारण है- चप्पल क़ी दुकान में मिठाई क़ी तलाश | हम सब को केवल और केवल आनंद क़ी तलाश है पर हम इसे खोज रहें है जड़ संसार में जबकि आनंद का परम और एक मात्र स्रोत भगवान कृष्ण है | मृगमरीचिका में भटके हम नश्वर वस्तुओं और स्वार्थ युक्त नातो क़ी निःसारता से परिचित होकर सार अर्थात अनंत - प्रति क्षण वर्धमान आनंद के आभाव में निराश है जिसे हम दुखी होना भी कह सकते हैं |

3280 days 3 hrs 6 mins ago By Kumar Vishnu
 

ye sare dukh ka karan eek hi hai,humara mann,ye bahut hi papi hai,sab kuch karata hai insan se,yadi eesko bas main karna hai to bhagwan ko apne ees papi mann main basana hoga,jis insan ke mann main krishna bas jata hai vo mann suddh ho jata hai,aur jo aayisa kar leta hai,vo ees sansar ke dukho se mukti paa jata hai,aur main kya likhu ees mann ke bare main 4 line likh raha hu-----"MANN LOBHI MANN LALCHI MANN CHANCHAL MANN CHORE MANN KE MATE NA CHALYO PALAK PALAK MANN OORE"

3280 days 10 hrs 4 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... संसार में दुःख के अतिरिक्त अन्य कुछ भी नहीं हैं, मोहनिशा में अचेत अवस्था के कारण जीव जिस दुःख को सहन कर लेता है उसे सुख समझ लेता है।......जब व्यक्ति के मन किसी भी वस्तु को प्राप्त करने की इच्छा उत्पन्न होती है, उस वस्तु को पाने के लिये घोर कष्ट पाकर या छल-कपट करके वस्तु को प्राप्त कर लेता है तो उसे ही सुख समझ लेता है। उदाहरण के लिये.......मान लीजिये एक "होम थियेटर सिस्टम" एक लाख रूपये का है, मन में "होम थियेटर सिस्टम" पाने की इच्छा मन में उत्पन्न होती है, इस वस्तु को पाने के लिये एक लाख रूपये कमाने के लिये कितना छल-कपट और कष्ट उठाना पड़ता है, कष्ट उठाकर "होम थियेटर सिस्टम" प्राप्त भी हो गया, अब इस दुःख को ही सुख समझ लिया जाता है।......संसार सागर तो दुःख का सागर है, सुख संसार में नहीं है, सुख तो व्यक्ति के अन्दर है। जब व्यक्ति सत्संग के द्वारा मोहनिशा से जाग जाता है तब व्यक्ति के मन में हर स्थिति में संतुष्ट भाव उत्पन्न हो जाता है तभी सुख की प्राप्ति हो पाती है, तब दुःख भी सुख बन जाता है, इसी को आनन्द कहते हैं।

3280 days 10 hrs 23 mins ago By Ac Kokal
 

Ha sansar me dukh hai kyunki Insaan ki icchaye bahot hai, Uske paas Bhagwan ke taraf Bhakti nahi hai !

3280 days 12 hrs 10 mins ago By Nidhi Nema
 

राधे राधे,इस संसार सुख और दुःख दोनों है,दुःख उतना ही जरुरी है जितना की सुख जब परमात्मा ने ये दुनिया बनायींऔर जीव को संसार में भेजा तो जीव की आँखों में आँसू आ गए और बोला प्रभु में आपसे दूर नहीं रह सकता संसार में जाकर में उसी में खो जाऊंगा तब भगवान ने कहा-तुम मुझे नहीं भूलोगे और भगवान ने सभी के जीवन में थोड़े थोड़े दुःख मिला दिए कि जब भी तू दुखी होगा तुझे मेरी याद आ जायेगी.और व्यक्ति के जीवन में अगर केवल सुख ही सुख हो तो व्यक्ति सुखो से भी ऊब जायेगा और जीवन में दुःख भी उतना ही जरुरी है जितना कि सुख, दुःख, सुख से जयादा अच्छा है जो परमात्मा के पास ले जाये उनकी याद दिलाता. राधे-राधे.

 
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