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हम दुनिया में क्यों आये है ? हमारे जीवन का क्या उद्देश्य है?

इस बारे में आपका क्या द्रष्टिकोण है? आप क्या सोचते है?

  Views :627  Rating :5.0  Voted :2  Clarifications :7
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2629 days 14 hrs 47 mins ago By Gulshan Piplani
 

अंश का उदेश्य अंशी के कार्यों का निमित बन उसको सम्पूर्णता प्रदान करना है इसी कारन वश मनुष्य को कामुकता प्रभु ने प्रदान कि अर्थात कामदेव को मनुष्य के भीतर कामना कि सरंचना कर सृष्टि का विस्तार| शिव पुराण कि रुद्र्सहिंता का पृष्ट १३८ से उद्धृत प्रसंग देखें : वह पुरुष बोला - ब्रह्मं| में कोन सा कार्य करूंगा? मेरे योग्य जो काम हो उसमें मुझे लगाइए; क्योंकि विधाता,......... ब्रह्मा जी ने कहा - भद्र पुरुष तुम अपने इसी स्वरुप से तथा फूल के बने हुए पांच बाणों से स्त्रियों और परुषों को मोहित करके सृष्टि के सनातन कार्यों को चलाओ| तुम छिपे रूप से प्राणियों के हृदय में प्रवेश कर उनके सुख का हेतु बनकर सृष्टि का सनातन कार्य चालू रखो - तो इससे प्रतिपादित होता है कि मानुष मात्र निमित है सृष्टि के विस्तार हेतु| और उसके जीवन का हेतु सृष्टि सञ्चालन में प्रभु का मात्र निमित होना ही है| - बाकि तो राधे राधे जपता जा आगे आगे बढ़ता जा - हरिओम तत्सत -

2629 days 15 hrs 24 mins ago By Gulshan Piplani
 

राधे राधे - जीव, इश्वर, माया, ब्रह्म और परब्रह्म यह पांचो अनादी हैं| अर्थात जो अनादी है, जिसका जन्म ही न हुआ हो वोह किसी का अपराधी कैसे हो सकता है| हाँ क्योंकि जीव अनेकता में विद्यमान है और अगर वोह अनेकता को अपने में समाहित कर लेता है तो एक रूपता को प्राप्त हो जाता है| अन्यथा अपने कर्मों के फलों को प्राप्त हो जाता है| भगवन कृष्ण ने स्पष्ट रूप में कहा है कि अपने कर्मों के फलों को भोगने मनुष्य बार बार जन्म और मृत्यु के बंधन को प्राप्त होता है| तो जीव अपराधी किसका हुआ| भगवान् जो कि गिरे से गिरे मनुष्यों के अपराधों को भी क्षमा कर देते हैं वोह तो प्रेम का सागर हैं और जो भी उनको समर्पित हो जाता है वोह उसे स्वीकार कर लेते हैं| ऐसे हजारों उदहारण हमारे पुराणों में विद्यमान हैं| - हरिओम तत्सत -

2670 days 18 hrs 2 mins ago By Waste Sam
 

radhey radhey, hum duniya mein aaye hai apne aapko janane ke liye, apne jeevan ke uddshey ko janane ke liye....humari jeevan ka uddshey hai apne satya swaroop ko janana aur apne swaroop mein mein leen ho jana... jai shri radhey

2749 days 4 hrs 2 mins ago By Aditya Bansal
 

radhey radhey

2776 days 2 hrs 51 mins ago By Aditya Bansal
 

sirf ek wajh hai manushya yoni humne kuch time milta hai prabho ko ke pass janne ka

2780 days 2 hrs 49 mins ago By Jyoti Khanna
 

*Jai Shri RadheKrishna* Manushya chola devtao ko bhi durlabh hai ham duniya main es manushya rupi chole main bade punaya karmo ke baad aaye hai es liye hame es chole main Hari sumiran karna chahiye sadev apne man main Shri Hari ka jaap karte raho auu ant samay main shri Hari main sama jao ye hi udeshay hai es jeevan ka....Jai Jai Shri RadheKrishna..

2793 days 3 hrs 46 mins ago By Jaswinder Jassi
 

JEEV duniya me apni merji se nhi aye , prmatma ki prkirti ne JEEVON ke Tnn(sareer) ki rchna ki aur JEEV duniya me prgat hue , PRMATMA aur PRKIRTI mil kr JEEVON se krm krvate hain . JEEVON ko PRMATMA ki trff se koyi udesh nhi diya gya . JEEV (Manush) ne BHAGWAN ko khojne wala udesh apne aap mithya hai , PRMATMA ne kissi jeev ko nhi kha ke mere ko doond ,manush jin shastron ka REFERENCE de kr prmatma ko doondne ka udesh kehta hai wo bi to MANUSHON duara hi likhe hue hain ........ प्रकीर्ति ने जीवों की रचना अपनी प्रकीर्ति को चलाने के लिए की है न के किस्सी धर्मकर्म के कारेओ के लिए जीव(मानुष) पैदा किये हैं ] प्रकिरती के नौ मूल स्रोत हैं (सूरज, चाँद ,तारे, मिटी ,अग्नि ,पानी, वायु{हवा }, जी{मनं }, और आकाश{आवाज़ } मिटी-अग्नि - पानी वायु और आकाश के मुख स्रोत से कण निकल कर आपस में जुर्ते हैं और एक बॉडी (सरीर) की रचना होती है ] जे रचना जब से प्रकीर्ति होन्द में आई तब्ब से लगातार हो रही है ] जिस के कारण मुख स्रोतों में कम्मी आना लाजमी है अगर प्रकीर्ति उस कमी को पूरा नही करेगी तो एक सम्मे ऐसा आयेगा जब प्रकीर्ति में बॉडी ही बॉडी होंगी ] इस लिए प्रकीर्ति ने बॉडी( तन्न ) के साथ मनं लग्गा कर जीवों की रचना कर दी , जीव क्या करते हैं ,सबबी प्रकार के जीव वस्तू (बॉडी/तन्न ) खुराक के रूप अपने सरीर के अंदर ले जाते हैं जीवों के सरीर के अंदर रर्सैनिक किर्या होती है जिस से वस्तु अपने मूल तत्व में टूट जाती है ,मल के रूप में जीव उस को सृष्टी बखेर देता है जो अपने मूल तत्व (पानी पानी में हवा हवा में मिटी मिटी में अग्नि अग्नि में और आकाश आकाश में मिल कर उन स्रोतों आई कम्मी को पूरा कर देते हैं ] मानुष का तिआगा मल पशु खा जाते हैं , पशुओं का तिआगा मल पक्षी खा जाते हैं और पक्षिओं की बीठ बनस्पति खाती है ]ये किर्या चारोँ प्रकार के जीव मिल कर लगातार करते रहते हैं ] प्रकीर्ति ने जीवों की रचना केवल इस्सी लिए की हुई है , ये धर्म कर्म पाप पुन स्वर्ग नरक मानुष की अपनी रचना है और कुश नही ] अब्ब विचारण की बात ये है के जीव निर्जीव की रचना में परमात्मा का रोल है ] किओके परमात्मा कोई वस्तु नही केवल ख़ाली स्थान जो के हर समय हर जगह मजूद रहता है , इस को कोई वस्तु नही कहा जा सकता मगर सभी वस्तुए इस के कारण इस के भीतर से ही दिखाई देती एक कण से ले कर ग्रेह तक इस के घेरे में हैं ] सबी इस में ही चल रहे हैं ] ये वस्तु से पहले बी होता है , वस्तू नज़र आते सम्मे ये वस्तु के चोगिर्द रहता है और जब वस्तु नही होती ये फिर बी व्ही पर होता है ] ये कही से नही आता और न ही कही जाता ] जीव निर्जीव वस्तुओं के कण इस में चल कर ही आपस में jur कर पंज तत्व वस्तुओं की रचना करते हैं ] सारी प्रकीर्ति सभी वस्तुए इस में टिकी हुई हैं और चल रही हैं >>>>>>>>>

2794 days 2 hrs 30 mins ago By Jaswinder Jassi
 

I am also find - the simplest theory - UNIVERSE come out from NOthing, the appearance of UNIVERSE due to NOTHING always through NOTHING ." (A living body can see the THINGs (OBJECTs) of UNIVERSE only if NOTHING is present INBETWEEN eye & object ! so THIS NOTHING is a G* O* D* of UNIVERSE Word G* stand for GENRATE O* stand for OPRETE D* stand for DISTROY Nothing is EXIT for all THINGs of the UNIVERSE All THINGs come from this NOTHING , & after all merge into this NOTHING This NOTHING is always around the BODIES(THINGS) BODY may be a smallest as an ATOM or may be a biggest one as a PLANET, may be a MALE or may be a FEmale , may be a LIVING or may be a DEAD. THANKS With Regards

2804 days 15 hrs 43 mins ago By Kailash Chandra Shar
 

हम इस दुनिया में आये हैं ' एक से अनेक हो जावूँ ' ऐसे लीलाधारी के संकल्प क़ी प्रतिपूर्ति के के कारण | हमारा जीवन का उद्देश्य है - लीलाधारी भगवान श्री कृष्ण क़ी प्रेम लीला में अपनी भूमिका का निर्वाह...

2807 days 16 hrs 42 mins ago By Ajay Nema
 

Harsh ji Radhe Rani aapki ichcha puri kare

2807 days 16 hrs 49 mins ago By Harsh Mani Sharma
 

Jai Shri Radhey! Me Purn Rupen Shri Radhey Rani ke Charno Me Samarpit Hoon Me Chahe To Sabhi Kuchh Aur To Aur Jeevan Bhi Tyagne Ko Taiyaar Hoon. Shri Radhey Rani me Meri Ashim Bhakti Hai Unki Prem Bhakti Mujhme Bhi Utpan Ho Aisi Meri Echha Hai Mujhe 24 Me se 25 ghanto Unka Naam Simarne Ki Sewa Mile aisi Echha Meri Hai! Jai Sri Radhey!

2808 days 1 hrs 35 mins ago By Sovit Garg
 

What kind of crimes can one commit in God's heavenly abode? How do we figure out the reasons for which we are serving this sentence?

2808 days 1 hrs 43 mins ago By Ajay Nema
 

बहुत ही बढिया रवि जी ... मजा आ गया आपके विचार पढ़ कर ...

2808 days 4 hrs 38 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा......हम सभी भगवान के अपराधी हैं हम सभी सजा भोगने के लिये दुनियाँ में आयें हैं, सजा से मुक्त होना ही मनुष्य जीवन का एक मात्र उद्देश्य है।...........जिस प्रकार कोई व्यक्ति राष्ट्र के नियमों का उलंघन करके अपराध करता है तो उसे सजा भोगने के लिये कारागार में अलग-अलग प्रकार की कोठरी में डाल दिया जाता है जब तक व्यक्ति जेल के नियमों का पालन नहीं करता है तब तक वह व्यक्ति कारागार से मुक्त नहीं हो सकता है।.....उसी प्रकार हम सभी भगवान के राष्ट्र (परम-धाम) के निवासी हैं, यह संसार भगवान के परमधाम का एक कारागार है, और इस कारागार में चोरासी लाख प्रकार की शरीर रूपी कोठरी है..........जब हम सभी ने भगवान के नियमों का उलंघन करके अपराध किया था तो हमें सजा भोगने के लिये संसार रूपी कारागार में डाल दिया गया है, जब हम संसार (प्रकृति) के नियमों का पालन करेंगे तो हम सजा से मुक्त हो जायेंगे, प्रकृति के नियम वेदों में विस्तृत रूप में और गीता में सार रूप में लिखित हैं।.......जो व्यक्ति अपनी अवस्था के अनुसार इन नियमों का निरन्तर पालन करता है और सभी कैदियों से प्रेम पूर्वक आचरण करता है तो उसे इस कारागार से शीघ्र मुक्त कर दिया जाता है, इस सजा से मुक्ति केवल मनुष्य रूपी सर्वोच्च कोठरी प्राप्त होने पर ही होती है, यह कोठरी इस जीवन में हम सभी को प्राप्त ही है।.....इसलिये हमसे अब ऎसा अपराध न हो जाये कि फिर से हमें निम्न कोठरी में डाल दिया जाये।.......॥ हरि ॐ तत सत ॥

2808 days 4 hrs 50 mins ago By Nidhi Nema
 

राधे-राधे, ये दुनिया उस परमात्मा का घर है. हम सब यहाँ चार दिन के मेहमान है और जब तक हम यहाँ रहे बस प्रेम ही बांटे.हमें उस परमात्मा और उनके बन्दों से प्रेम करना है हम उस परमात्मा के अंश है.और परमात्मा प्रेम स्वरुप है.और हम इस दुनिया में प्रेम ही बांटने आये है.ये वसुधा हमारा कुटुंब है.प्रेम और सेवा में ही जीवन की पूर्णता है यही जीवन का उद्देश्य है.प्रभु से प्रेम और संसार की सेवा बस इसी में जीवन की सार्थकता है. "राधे-राधे".

2808 days 4 hrs 58 mins ago By Ratan K Dhomeja
 

ham duniya main bhagwan ki bhakti karne aaye hain..hamare jeewan ka hamesha bhagwan ki charno main rahana.hare kirshan

 
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