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सत्य क्या है? इसकी क्या परिभाषा है ?

इस बारे में आपका क्या द्रष्टिकोण है ? सत्य को क्या हम जान सकते है? यदि हाँ तो कैसे ?

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2666 days 8 hrs 20 mins ago By Waste Sam
 

radhey radhey, satya hai sansar ka adhaar, satya hai parmata ka swaroop, satya hai sada rehne wale tathya, satya hai avinaashi tatva... hum satya ko jan sakte hai apne shastro ke adhyan se(isse hum bhagwan ko jante hai), bhagwan ke bhakti se(isse bhagwan ko jante hai).. yadi hum avinaashi tatva ko jan le toh hum satya ko hee jante hai.. jai shri radhey

2685 days 9 hrs 47 mins ago By Gulshan Piplani
 

जो हम सोचते हैं वोही सत्य है जो बोलते हैं वोही सत्य हो जरूरी नहीं|

2693 days 8 hrs 54 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

जो नित्य है वही सत्य है और सिर्फ प्रभु के सिवा कुछ भी नित्य नहीं है ! राधे राधे

2731 days 19 hrs 30 mins ago By Aditya Bansal
 

सत्य क्या है? होना या न होना? या दोनों ही सत्य हैं? जो है, उसका होना सत्य है, जो नहीं है, उसका न होना सत्य है। मुझे लगता है कि होना-न-होना एक ही सत्य के दो आयाम हैं, शेष सब समझ का फेर, बुद्धि के व्यायाम हैं। किन्तु न होने के बाद क्या होता है, यह प्रश्न अनुत्तरित है। प्रत्येक नया नचिकेता, इस प्रश्न की खोज में लगा है। सभी साधकों को इस प्रश्न ने ठगा है। शायद यह प्रश्न, प्रश्न ही रहेगा। यदि कुछ प्रश्न अनुत्तरित रहें तो इसमें बुराई क्या है? हाँ, खोज का सिलसिला न रुके, धर्म की अनुभूति, विज्ञान का अनुसंधान, एक दिन, अवश्य ही रुद्ध द्वार खोलेगा। प्रश्न पूछने के बजाय यक्ष स्वयं उत्तर बोलेगा।

2744 days 17 hrs 53 mins ago By Aditya Bansal
 

radhey radhey

2771 days 16 hrs 39 mins ago By Aditya Bansal
 

satya e rishta hai woh bhi sirf hari se uske alwa koi nai koi kisi ka nahi..aaj ke time mein tokhaas kar...sab rishety jhute hai..sirf ek sacha satya hai jokabi saath ni chodega

2797 days 12 hrs 14 mins ago By Murli Dhar
 

stye hi siv hai ..satye hi bhagwan hai....hmare aatma jo aawaj hai wahi satye hai .....satye hi dhrma hai.....satye hi jivan hai...satye hai swarg ahi.......hare krishna !!

2805 days 13 hrs 6 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.....सत्य एक मात्र परमात्मा है, जो अनादि और अनन्त है, इसलिये शब्दों की सीमा में नहीं बाँधा जा सकता है। तुलसीदास जी कहते हैं......हरि व्यापक सर्वत्र समाना, प्रेम से प्रकट होई मैं जाना।....सत्य को तो हर पल महसूस किया जा सकता है, जो अनन्त है उसे शब्दों द्वारा सीमित नहीं किया जा सकता है। वह तो निष्काम प्रेम से ही सर्वप्रथम ब्रह्म रूप स्वयं में ही प्रकट होता है।

2805 days 14 hrs 20 mins ago By Manish Nema
 

सत्य सर्वोत्तम सत्ता है । सत्य सृष्टि से भी परे है । सृष्टि-शेष के बाद भी यदि कुछ अशेष बचा रहेगा तो वह सत्य ही है । वस्तुतः सत्य का न कोई आदि है, न कोई अंत । "प्रेम ही सत्य है". . . . . . . . . .जीवन जोवन राज मद , अविचल रहे न कोय / जु दिन जाय सत्संग मे , जीवन का फल सोय / परमात्मा का दूसरा नाम ही सत्य है सत्य पर ही नवगृह टिके है ! जय श्री कृष्ण जीवन का सत्य क्या हे? खुश रहने के आ़ठ तरीके 1. जीवन तभी बदल जाता है जब आप बदलते हैं। न हो तो करके देखें। 2. मन व मस्तिष्क सबसे बड़ी संपत्ति है, इसे मान लेंगे तो खुश रहेंगे आप। 3. किसी की भी आत्मछवि जो उसने खुद बनाई होती है उसके खुश रहने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है। अपनी छवि ऐसी बनाएं जो आपको हताश-निराश न करके खुशियां दे। 4. सम्मान करना व क्षमा करना सीखें व खुश रहें। 5. जैसा सोचेंगे वैसे ही बनेंगे आप। अगर गरीबी के बारे में सोचेंगे तो गरीब रहेंगे और अमीरी के बारे में सोचेंगे तो अमीर रहेंगे। 6. असफलता आती और जाती है यह सोचें और खुश रहने की कोशिश करें। 7. जितने भी आशीर्वाद आपको मिले हैं आज तक, उनकी गिनती करें, उन्हें याद करके खुश रहें। 8. यदि आप पूरे जीवन की खुशी चाहते हैं चाहते हैं तो काम से प्यार करना सीखें। ब्रह्म सत्यम जगत् मिथ्या ...... राधे राधे.!!!

2805 days 16 hrs 17 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.....सत्य एक मात्र परमात्मा है, जो आत्मा स्वरूप में सभी प्राणीयों सर्वज्ञ व्याप्त है, वह चेतन तत्व जो हर परिस्थिति और हर काल (समय) में एक सा रहता है, जिसमें किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं होता है, जो तत्व रूप में ही जाना जाता है, वही एक मात्र सत्य स्वरूप परमात्मा है। जो वस्तुऎं चर्म चक्षुओं से दिखलाई देती हैं वह सब जड़ वस्तुऎं ही होती हैं जिनमें हर क्षण परिवर्तन होता है वह सब पदार्थ स्वरूप होती हैं। आत्मा तत्व रूप में और पदार्थ शरीर रूप में हर प्राणी में उपस्थित होते हैं। पदार्थ यानि शरीर से तत्व यानि आत्मा को नहीं देखा जा सकता है। जिस प्रकार मन, बुद्धि और अहंकार दिखलाई नहीं देते हैं उसी प्रकार आत्मा को भी चर्म चक्षुओं से देखा नहीं जा सकता है। केवल दिव्य ज्योति रूप में अनुभव किया जा सकता है।

2805 days 19 hrs 29 mins ago By Nidhi Nema
 

राधे-राधे, परमात्मा ही सत्य है, और इस दुनिया का ही सबसे बड़ा सत्य मृत्यु है. जो कभी नहीं मिटता वही सत्य है यही इसकी परिभाषा है.जितनी भी नाशवान चीजे है वे सब असत्य है.और जिनका नाश नहीं होता वही सत्य है.व्यक्ति अपने अंदर ही सत्य को जान सकता है. जिस दिन व्यक्ति अपने भीतर उतरता है तो तुरंत उसे परमात्मा और मृत्यु दोनों को जान लेता है यही सत्य है "राधे-राधे"

 
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