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अक्षय तृतीया क्या है ?

इस बारे में आपका क्या द्रष्टिकोण है? ये क्यों मनाया जाता है?

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3178 days 19 hrs 6 mins ago By Gulshan Piplani
 

अक्षय तृतीया बड़ी ही पवित्र एवं सुख-सौभाग्य देने वाली तिथि है।आज के दिन त्रेता युग का आरम्भ हुआ था, नर और नारायण भी आज के ही दिन अवतार लिया था. भगवान परशुराम जी का अवतार भी आज के दिन ही हुआ था

3254 days 1 hrs 49 mins ago By Aditya Bansal
 

jo bhi ho but iss din bihari je charan darsha ke nihal ho jata hun...baki ka kuch nahi pata

3258 days 15 hrs 45 mins ago By Haresh Solanki
 

JAI SHREE RADHE RADHE

3258 days 16 hrs 45 mins ago By Indu Gupta
 

akshya arthat jiska kabhi kshay na ho is tithi par kiye gaye sabhi punya karyapralaya paryant sthir ho jate hai kyuki isi punya tithi se hi srishti ka prarambh hua hai jai shree radhe...

3258 days 19 hrs 6 mins ago By Dasi Radhika
 

अक्षय तृतीया बड़ी ही पवित्र एवं सुख-सौभाग्य देने वाली तिथि है।आज के दिन त्रेता युग का आरम्भ हुआ था, नर और नारायण भी आज के ही दिन अवतार लिया था. भगवान परशुराम जी का अवतार भी आज के ही दिन हुआ था.बद्रीनारायण के कपाट भी आज ही खुलते हैं. आज के दिन किये गए दान, जप, शुभ कर्मों का फल अनंत गुना होता है. आज बिहारी जी को खरबूजे का वेशेष भोग लगता है. //जय जय श्री राधे //

3258 days 23 hrs 10 mins ago By Santosh Ahuja
 

JAI SHREE RADHEEY KRISHNA ji. वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया कहते हैं। यह स्वयंसिद्ध मुहूर्त है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किया गया दान, हवन, पूजन या साधना अक्षय(संपूर्ण) होता है। हिंदू धर्म शास्त्रों में अक्षय तृतीया तिथि से जुड़े और भी कई रोचक तथ्यों का वर्णन मिलता है। यह तथ्य इस प्रकार हैं- - भारतीय कालगणना के अनुसार वर्ष में चार स्वयंसिद्ध अभिजीत मुहूर्त होते हैं, अक्षय तृतीया (आखा तीज) भी उन्हीं में से एक है। इसके अलावा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (गुड़ी पड़वा), दशहरा और दीपावली के पूर्व की प्रदोष तिथि भी अभिजीत मुहूर्त हैं। - धर्म ग्रंथों के अनुसार अक्षय तृतीया से ही त्रेतायुग का आरंभ भी माना जाता है। - इस दिन से ही भगवान बद्रीनारायण के पट खुलते हैं। - वर्ष में एक बार वृंदावन के श्री बांकेबिहारीजी के मंदिर में श्री विग्रह के चरण दर्शन होते हैं। - धर्म शास्त्रों के अनुसार इसी दिन भगवान नर-नारायण ने अवतार लिया था। - भगवान विष्णु के अवतार श्रीपरशुरामजी का अवतार भी इसी दिन हुआ था। - भगवान विष्णु का हयग्रीव अवतार भी इसी दिन माना जाता है। - स्वयंसिद्ध मुहूर्त होने के कारण सबसे अधिक विवाह भी इसी दिन होते हैं। - इस दिन शुभ एवं पवित्र कार्य करने से जीवन में सुख-शांति आती है। इस दिन गंगा स्नान का भी विशेष महत्व है।

3258 days 23 hrs 29 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... भविष्य पुराण के अनुसार इस तिथि को ही युग परिवर्तन होता है, सतयुग और त्रेतायुग, द्वापरयुग, कलियुग का प्रारंभ इसी तिथि को होता है। भगवान विष्णु ने नर-नारायण, हयग्रीव और परशुराम जी का अवतरण भी इसी तिथि को हुआ है। इस दिन सभी ग्रह अपने शुभ स्थान में स्थित होते हैं। इस दिन से प्रारम्भ किए गए शुभ कार्य अथवा इस दिन को किए गए सभी शुभ कार्यों का फल उत्कृष्ट होता है।

3259 days 21 mins ago By Nidhi Nema
 

राधे राधे,वैशाख मास के शुक्ल पक्ष कि तृतीया को अक्षय तृतीया के नाम से पुकारा जाता है,इस दिन परशुराम जी का जन्म दिन होने के कारण इसे परशुराम जयंती भी कहते है इस दिन किया दान जप तप स्नान आदि अक्षय रहते है अक्षय का अर्थ होता है "जिसका कभी क्षय न हो".

 
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