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दुनिया किसे कहते है?

इस बारे में आपका क्या द्रष्टिकोण है ?

  Views :574  Rating :5.0  Voted :1  Clarifications :10
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2830 days 20 hrs 26 mins ago By Waste Sam
 

radhey radhey... duniya bhagwan ke leela sthali hai, jaise hum ek khel ko bichate hai khelne ke liye usse tarah bhagwan ka yeh sansar ek board hai jis par bhagwan apna khel khelte hai.. jai shri radhey...

2843 days 2 hrs 32 mins ago By Vipin Sharma
 

JAHA SUKH OR DUKH KA SAMAVESH HOTA H USE DUNIYA KAHTE HAIN. OR YE DUNIYA KOI JHOOTI NAHI SACHHI H.

2860 days 17 mins ago By Gulshan Piplani
 

कठपुतलियों का घर

2896 days 7 hrs 14 mins ago By Aditya Bansal
 

JO APNE HOKAR BHI BEGANE HOTE HAI

2936 days 4 hrs 52 mins ago By Aditya Bansal
 

rangmanch

2943 days 19 hrs 45 mins ago By Arunkambli Kambli
 

love to innoccent creature of god

2945 days 2 hrs 29 mins ago By Jaswinder Jassi
 

IK ATOM se le kr PANET ke bheech jo bi physical hai DUNiYA hai ,iss me jeev -nirjeev sbbi prkar ke vstuye hain >>>>>>

2948 days 20 hrs 51 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा...... दुनियाँ एक धर्मशाला के समान है, हर जीवात्मा यहाँ यात्री है, जीवात्मा का शरीर इस धर्मशाला का कमरा है, यहाँ उपयोग की सभी वस्तुऎं धर्मशाला की हैं।........... जो यात्री इस धर्मशाला की सभी वस्तुओं को अपनी समझकर भली प्रकार से उपयोग करता है तो अगली बार उसे इस धर्मशाला में उच्च श्रेणी का कमरा प्राप्त होता है।........ जो यात्री इस धर्मशाला की वस्तुओं को अपनी समझकर दुरुपयोग करता है तो उसे अगली बार निम्न श्रेणी का कमरा प्राप्त होता है।........ जो व्यक्ति स्वयं को यात्री समझकर सभी वस्तुओं को अपना न समझकर अनासक्त भाव से उपयोग करता है वह इस धर्मशाला में वापिस नहीं आना पड़ता है।

2948 days 20 hrs 56 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा...... दुनियाँ एक धर्मशाला के समान है, हर जीवात्मा यहाँ यात्री है, जीवात्मा का शरीर इस धर्मशाला का कमरा है, यहाँ उपयोग की सभी वस्तुऎं धर्मशाला की हैं।........... जो यात्री इस धर्मशाला की सभी वस्तुओं को अपनी समझकर भली प्रकार से उपयोग करता है तो अगली बार उसे इस धर्मशाला में उच्च श्रेणी का कमरा प्राप्त होता है।........ जो यात्री इस धर्मशाला की वस्तुओं को अपनी समझकर दुरुपयोग करता है तो उसे अगली बार निम्न श्रेणी का कमरा प्राप्त होता है।........ जो व्यक्ति स्वयं को यात्री समझकर सभी वस्तुओं को अपना न समझकर अनासक्त भाव से उपयोग करता है वह इस धर्मशाला में वापिस नहीं आना पड़ता है।

2949 days 5 hrs 29 mins ago By Nidhi Nema
 

राधे राधे,मुसाफिरगिरी का नाम ही दुनिया है, जैसे हम किसी के घर जाते है और केवल कुछ समय के मेहमान बनकर,उसी तरह दुनिया उस परमात्मा का बनाया घर है.और हम सब उसके इस घर में मेहमान है.जिसे यात्रा के समय बहुत से मुसाफिर आपस में मिलते है बातचीत करते है और अपने अपने रास्ते चले जाते है रुकने का काम नहीं है.बस इसी का नाम दुनिया है. राधे राधे ....

 
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