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हम स्वयं को प्रेम करना कैसे सिखा सकते हैं?

इस बारे में आपका क्या द्रष्टिकोण है?

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2500 days 3 hrs 56 mins ago By Waste Sam
 

राधे राधे, प्रेम सीखने के लिए हमे निस्वार्थ कार्य करने चाहिए | प्रेम का दूसरा नाम निस्वार्थ है | जय श्री राधे

2502 days 11 hrs 24 mins ago By Dilip Makwe
 

Just by taking a drop of love every morning. You cannot love anyone if you don't love yourself. How can you give love if you don't have love in stock. If i ask you for Rs.1000 how can you give if you don't have in your pocket.

2506 days 8 hrs 47 mins ago By Dasabhas DrGiriraj N
 

प्रेम के विषय - श्री कृष्ण दो बात हैं : एक है विषय, दूसरा है आश्रय प्रेम के एकमात्र विषय हैं - श्री कृष्ण, दूसरा कोई है ही नहीं अर्थात प्रेम यदि हो सकता है, तो कृष्ण से ही हो सकता है. = विषय और जो प्रेम करता है, वह है आश्रय = राधाजी , आप, हम, अनेक संत, भक्त. कृष्ण के अतिरिक्त यदि हम किसी से प्रेम करते हैं तो शास्त्र कहता है कि वह प्रेम है ही नहीं, हो भी नहीं सकता, क्योंकि प्रेम के एकमात्र आश्रय कृष्ण ही हैं ठीक वैसे जैसे मिटटी के बिना 'मिटटी का बर्तन' बन ही नहीं सकता, मिटटी के बिना बनेगा तो वह 'मिटटी का बर्तन' नहीं होगा. तो फिर हम माता-पिता , भाई - बहिन या पति - पत्नी या लड़का - लड़की से जो प्रेम करते हैं, वह क्या है ? वह प्रेम नहीं ; 'काम' या कामना है, इसीलिये ऊपर लिखे ये समस्त प्रेम टूट जाते हैं, और कृष्ण से यदि प्रेम हो जाय तो आज तक किसी का न टूटा है, न टूटेगा JAI SHRI RADHE DASABHAS Dr GIRIRAJ nangia Lives, Born, Works = L B W at Vrindaban

2506 days 10 hrs 31 mins ago By Dasabhas DrGiriraj N
 

PREM yadi hota h to shri krishn se hi hota h, kisi aur se yadi h to vh kam ya kamnaa hi hai. ham ya jeev krishna ka das h, apne se ya kisi aur se krishn-das samajh kr prem karen to theek, anyatha apne se ya kisee se bh prem karenge to asakti m faskar sarvnash hoga, jaise jadbharat ji ka hiran k prem m hua tha. plz visit - http://shriharinam.blogspot.com/2011/08/prem-ya-moh.html

2506 days 11 hrs 44 mins ago By Balvinder Aggarwal
 

हरी ओम तत्सत :इस प्रशन में ये जानना जरूरी है में स्वयं कौन हूँ यदि में शुद्ध चेतन आत्मा हूँ तो इश्वर से प्रेम करना होगा अर्थात भक्तिमार्ग यदि में शरीर हूँ तो संसार के अनुसार खाओ पीओ मोज करो यही है स्वयं से प्रेम ....वेदिक ऋषि

2506 days 14 hrs 21 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... वसुदेव कुटुंब की भावना में स्थिर होकर हम स्वयं को प्रेम करना सिखा सकते हैं।

 
Tags :
Radha Blessings



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