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जीवन में हमे किसका आश्रय लेना चाहिये?

इस बारे में आपका क्या द्रष्टिकोण है?

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2581 days 12 hrs 23 mins ago By Seema Sharma
 

radhe radhe ......kewal thakur ji ke charan kamoln main rahker hi ye sansar sagar par kiya ja sakta hai

2582 days 5 hrs 11 mins ago By Rupal Suresh Shah
 

only the god.

2582 days 5 hrs 11 mins ago By Rupal Suresh Shah
 

only the god.

2582 days 5 hrs 11 mins ago By Rupal Suresh Shah
 

only the god.

2582 days 13 hrs 31 mins ago By Meenakshi Goyal
 

चौपाई- नाम प्रासाद संभु अबिनासी । साजू अमंगल मंगल रासी ॥ सुक सनकादि सिद्ध मुनि जोगी । नाम प्रसाद ब्रह्मसुख भोगी ॥ नामही के प्रसाद से शिवजी अविनाशी हैं, और अमंगल वेश वाले होने पर भी मंगल की राशि हैं । शुकदेवजी और सनकादि सिद्ध, मुनि, योगीगण नाम के ही प्रसाद से ब्रह्मानन्द को भोगते हैं ॥१॥ नारद जानेउ नाम प्रतापू । जग प्रिय हरि हरि हर प्रिय आपू ॥ नामु जपत प्रभु कीन्ह प्रसादू । भगत सिरोमनि भे प्रहलादू ॥ नारदजी ने नाम के प्रताप को जाना है । हरि सारे संसार को प्यारे हैं, [हरि को हर प्यारे हैं] और आप (श्री नारदजी) हरि और हर दोनों को प्रिय हैं । नाम के जपने से प्रभु ने कृपा की, जिससे प्रहलाद भक्तशिरोमणि हो गए ॥ २॥ ध्रुवँ सगलानि जपेउ हरि नाऊँ । पायउ अचल अनुपम ठाऊँ ॥ सुमिरि पवनसुत पावन नामू । अपने बस करि राखे रामू ॥ ध्रुवजी ने ग्लानी से ( विमाता के वचनों से दुखी होकर सकाम भाव से ) हरिनाम को जपा, और उसके प्रताप से अचल अनुपम स्थान (ध्रुवलोक) प्राप्त किया । हनुमानजी ने पवित्र नाम का स्मरण करके श्री रामजी को अपने वश में कर रखा है ॥३॥ अपतु अजामिलु गजु गनिकाऊ । भए मुकुत हरि नाम प्रभाऊ ॥ कहौं कहाँ लगी नाम बड़ाई । रामू न सकहिं नाम गुन गाई ॥ नीच अजामिल, गज और गणिका (वेश्या) भी हरि के नाम के प्रभाव से मुक्त हो गए । मैं नाम की बड़ाई कहाँ तक कहूँ, राम भी नाम के गुणों को नहीं गा सकते ॥४॥ दोहा- नामु राम को कल्पतरु कलि कल्यान निवासु । जो सुमिरत भयो भाँग तें तुलसी तुलसीदासु ॥ कलियुग में राम का नाम कल्पतरु ( मनचाहा पदार्थ देनेवाला ) और कल्याण का वास ( मुक्ति का घर ) है, जिसको स्मरण करने से भाँग-सा (निकृष्ट ) तुलसीदास तुलसी के समान पवित्र हो गया ॥ २६ ॥ चौपाई- चहुँ जुग तीनी काल तिहूँ लोका । भए नाम जपि जीव बिसोका ॥ बेद पुरान संत मत एहू । सकल सुकृत फल राम सनेहू ॥ [ केवल कलियुग की ही बात नहीं है,] चरों युगों में, तीनों कालों में और तीनों लोकों में नाम को जपकर जीव शोकरहित हुए हैं । वेद, पुराण और संतों का मत यही है कि समस्त पुण्यों का फल श्री रामजी में [ या राम-नाम में] प्रेम होना है ॥१॥ ध्यानु प्रथम जुग मखबिधि दूजें । द्वापर परितोषत प्रभु पूजें ॥ कलि केवल मल मूल मलीना । पाप जन मन मीना ॥ पहले (सत्य) युग में ध्यान से, दुसरे (त्रेता) युग में यज्ञ से और द्वापर में पूजन से भगवान् प्रसन्न होते हैं, परन्तु कलियुग केवल पाप की जड़ और मलिन है, इसमें मनुष्यों का मन पाप रूपी समुद्र में मछली बना हुआ है ( अर्थात पाप से कभी अलग होना ही नहीं चाहता; इससे ध्यान, यज्ञ और पूजन नहीं बन सकते ) ॥२॥ नाम कामतरु काल कराला । सुमिरत समन सकल जग जाला ॥ राम नाम कलि अभिमत दाता । हित परलोक लोक पितु माता ॥ ऐसे कराल ( कलियुग के ) काल में तो नाम ही कल्पवृक्ष है, जो स्मरण करते ही संसार के सब जंजालों को नाश कर देनेवाला है । कलियुग में यह रामनाम मनोवांच्छित फल देने वाला है, परलोक का परम हितैषी और इस लोक का माता-पिता के समान सब प्रकार से पालन और रक्षण करता है ) ॥ ३॥ नहिं कलि करम न भागती बिबेकू । राम नाम अवलंबन एकू ॥ कालनेमि कलि कपट निधानू । नाम सुमति समरथ हनुमानू ॥ कलियुग में न कर्म है, न भक्ति है और न ज्ञान ही है; रामनाम ही एक आधार है । कपट की खान कलियुग रूपी कालनेमि के मारने के लिए रामनाम ही बुद्धिमान और समर्थ श्री हनुमानजी हैं ॥ ४॥ दोहा- राम नाम नरकेसरी कनककसिपु कलिकाल । जापक जन प्रहलाद जिमि पालिहि दलि सुरसाल ॥ रामनाम श्रीनरसिंह भगवान् है, कलियुग हिरण्यकशिपु है और जप करनेवाले जन प्रहलाद के समान हैं; यह रामनाम देवताओं के शत्रु (कलियुगरूपी दैत्य ) को मारकर जप करनेवालों की रक्षा करेगा ॥ २७॥ चौपाई- भायँ कुभायँ अनख आलसहूँ । नाम जपत मंगल दिसि दसहूँ ॥ सुमिरि सो नाम राम गुण गाथा । करऊँ नाइ रघुनाथहि माथा ॥ अच्छे भाव (प्रेम) से, बुरे भाव (वैर) से, क्रोध से या आलस्य से, किसी तरह से भी नाम जपने से दसों दिशाओं में कल्याण होता है । उसी ( परम कल्याणकारी) रामनाम का स्मरण करके और श्री रघुनाथ जी को मस्तक नवाकर मैं रामजी के गुणों का वर्णन करता हूँ ॥१॥

2582 days 16 hrs 14 mins ago By Meenakshi Goyal
 

Kalyug Kewal Naam Adhara, Simar-Simar Nar Utarahin Paaraa

2582 days 17 hrs 33 mins ago By Waste Sam
 

राधे राधे, जीवन में हमे एक भगवान का आश्रय लेना चाहिए | जय श्री राधे

2583 days 1 hrs 32 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... ईश्वर के असंख्य नामों में से केवल एक नाम का आश्रय लेना चाहिये!...... क्योंकि इस जग में वह पत्थर भी नहीं डूबते हैं जिस पर लिखा होता है प्रभु का नाम।

 
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