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कर्म क्या है ?

इस बारे में आपका क्या दृष्टिकोण है?कर्म के कितने प्रकार होते है ?

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2817 days 7 hrs 4 mins ago By Bhakti Rathore
 

radhe radhe  hume jo bhgwaan nne is duniya me bheja he jis kaam ke ley wo kaam kerte chalo  wahi kerm he

2896 days 14 hrs 36 mins ago By Aditya Bansal
 

Grehasth aashram mein reh kar apne parivaar ko achhe sanskaarit dhaanche mei dhaal kar sabhi ke saath pyar preet aur care/faith karte huye jeevan nirwaah karna

2909 days 13 hrs 6 mins ago By Aditya Bansal
 

radhey radhey

2936 days 12 hrs 5 mins ago By Aditya Bansal
 

kisi zarurat mand ke kaam aana.

2955 days 16 hrs 9 mins ago By Jaswinder Jassi
 

Jaswinder Jassi मनीष नीमा जी , आप जी ने क्रर्म के बारे में पूषा है के क्या होता है और कितनी प्रकार का होता है ? इस के बारे में मेरे विचार में क्रर्म ;- movement of the body gave the birth to a क्रर्म ] This is due to co ordination of TNN

2956 days 7 hrs 55 mins ago By Raman Priya
 

जो कर्म प्रभु के लिए किया जाए वही कर्म है.....

2956 days 12 hrs 51 mins ago By Manish Nema
 

कार्य का दूसरा नाम ही कर्म कहा जाता हैबिना कर्म के कोई अच्छा या बुरा परिणाम नही होसकता है,अच्छा कर्म किया जायेगा तो अच्छा फ़ल मिलेगा,और खराब कर्म को करने पर खराब फ़ल मिलेगा बोया बीज बबुल का तो आम काहा से होई" अर्थात जो कर्म हम करते आ रहे है उसके अनुरुप ही हमे फल कि प्राप्ती होती है, हमने बबुल बोया है तो हमे काटें ही मिलेगे आम नही। कर्म चार तरह के होते हैं- 1. अच्छे कर्म 2. बुरे कर्म, 3. अच्छे-बुरे मिले-जुले कर्म और 4. न अच्छे न बुरे। पहले तीन प्रकार के कर्म में जैसा कर्म होता है, उसके अनुसार फल मिलता है। लेकिन, चौथे प्रकार के कर्म को निष्काम कर्म कहा जाता है। यह फल नहीं देते। चूंकि यह फल नहीं देते और हमें कर्मफल में नहीं बांधते, इसलिए उच्च कोटि के कर्म कहलाते हैं। "राधे राधे"

2956 days 12 hrs 53 mins ago By Manish Nema
 

बहुत खूबसूरत जबाब रविकांत जी धन्यबाद!

2956 days 14 hrs 49 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा...... संसार में जो भी किया जाता है या नहीं किया जाता है वह सभी कर्म होते हैं, कर्म से कर्म बन्धन उत्पन्न होते हैं और कर्म से ही कर्म बन्धन से मुक्ति मिलती है।........ कर्म दो प्रकार से होते हैं और कर्म के फल तीन प्रकार के होते हैं।....... "सकाम-कर्म" (फल की कामना से किये जाने वाले कर्म) और "निष्काम-कर्म" (बिना फल की कामना से किये जाने वाले कर्म)।.....सकाम-कर्म भी दो प्रकार होते हैं, पाप-कर्म और पुण्य-कर्म!....... पाप-कर्म का फल दुख प्राप्ति और पुण्य-कर्म का फल सुख प्राप्ति होता है।.......... और निष्काम-कर्म का फल शरीर में रहकर परमानन्द प्राप्ति और शरीर छूटने के बाद मोक्ष प्राप्ति होता है।

 
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