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संसार मन की क्रीड़ा हैं, इसके बारे में आपका क्या विचार है?


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2720 days 14 hrs 39 mins ago By Vandana Goel
 

The material world or MAYA is a realistic illusion which can exist only upto a point till when JIVA remains separated from Krishna, it is only the play of mind and imagination which disappears as soon as we turn and surrender sincerely to Krishna.

2734 days 20 hrs 13 mins ago By Waste Sam
 

राधे राधे संसार एक सत्य है क्योंकि संसार में रह कर भगवन के भक्ति करके हम अपने सच्चे स्वरुप और भगवन को पा लेते है | इस संसार में जो मन का खेल है वो है इस संसार को और इसके नश्वर चीजो को अपना मानना | जय श्री राधे

2734 days 20 hrs 13 mins ago By Waste Sam
 

राधे राधे संसार एक सत्य है क्योंकि संसार में रह कर भगवन के भक्ति करके हम अपने सच्चे स्वरुप और भगवन को पा लेते है | इस संसार में जो मन का खेल है वो है इस संसार को और इसके नश्वर चीजो को अपना मानना | जय श्री राधे

2734 days 22 hrs 34 mins ago By Vipin Sharma
 

Sansar Atoot Satya h .

2734 days 22 hrs 35 mins ago By Vipin Sharma
 

sansar man ki krida nahi h apitu ye ek sach h Ye hi to prob h jo dikhta h use mante nahi or jo dikhai nahi deta us par atoot viswas karte h.

2743 days 16 hrs 24 mins ago By Diwakar Kushwaha
 

संसार इश्वर द्वारा बने एक कृति है जिसमे सभी प्राणी गोल-गोल अलग-अलग योनियों में घूम रहे है और जब तक इश्वर का विचार उनके मन मंदिर में नहीं आता तब तक इस स्वप्ना नगरी से उनको मुक्ति नहीं मिल सकती --हरी ॐ तत्सत

2743 days 20 hrs 37 mins ago By Gulshan Piplani
 

बुद्धि मनुष्य की प्रकृति अनुसार अर्जित ज्ञान का भण्डार है| बुद्धि का कार्य मात्र इन्द्रियों(इन्द्रियाँ प्रकृति अनुसार विषयों में लाभ हानी ढूँढती हैं) द्वारा प्रेषित विषय में लाभ-हानी का विश्लेषण कर अपना तर्क प्रस्तुत करना होता है| और इसके पश्चात ही मन बन पाता है| जिसमें अहंकार, आत्मा और चित, किसी को भी गोण नहीं समझना चाहिए, बगैर इन्द्रियों के बुद्धि भी सम्पूर्ण ज्ञान अर्जित नहीं कर सकती | इस लिए बुद्धि मन की संगनी है ऐसा मेरा मानना है| अंत में मन ही संकल्प साधता है और इस संसार में क्रीडा करता रहता है| - बाकि तो बस राधे राधे जपता जा आगे आगे बढ़ता जा - राधे राधे

2744 days 24 mins ago By Aditya Bansal
 

जब कभी भी आप किसी लिये राय बनाते हैं, तो वह गलत ही निकल जाती हैं | उससे आपको क्या सीख मिलती हैं कि यह सब कुछ माया ही हैं? आपका मन आपको सिखाता हैं कि सब कुछ माया हैं | आपको कभी कभी भय, आशंका और कल्पनायें होती हैं और फिर अचानक आप पाते हैं कि वह सब गलत हैं | यह सब आपके मन की ही देन हैं | उस क्षण आपको एहसास होता कि यह मन माया हैं और यह उसकी क्रीड़ा हैं | अपने मन का अवलोकन करे, किसी व्यक्ति को देखे और उनके लिये राय बनाये और आप पायेंगे कि वह सही नहीं हैं | सारी गलत धारणायें, समझ, धारणायें, गलत कल्पनायें और राय आप को यह बताने के लिये पर्याप्त हैं कि मन माया या मिथ्या हैं |

2744 days 2 hrs 45 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... संसार तो मन और बुद्धि दोनों का क्रीड़ा स्थल है, यहाँ मन और बुद्धि दोनों मिलकर क्रीड़ा करते हैं।..... संसार में हर वस्तु का जोड़ा बनाया गया है, जो एक दूसरे के पूरक होते हैं, इस जोड़े का सार तत्व "जड़ और चेतन" है।.... संसार में कोई भी क्रीड़ा अकेले पूर्ण नहीं हो सकती है, मन और बुद्धि की यह क्रीड़ा इन्द्रियों के द्वारा यह क्रीड़ा प्रकट होती प्रतीत होती है।

 
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