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१६ संस्कार क्या होते है और उनका जीवन में क्या महत्व है ?

इस बारे में आपका क्या द्रष्टिकोण है?

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2611 days 11 hrs 44 mins ago By Waste Sam
 

राधे राधे गुलशन जी ने जो १६ संस्कार लिखे है वही हमारे १६ संस्कार है | यह १६ संस्कार मनुष्य जन्म को सफल बनाते, मनुष्य को मनुष्य बनाते है | हर संस्कार मनुष्य को नया जीवन देता है और हर संस्कार मनुष्य जीवन को दिशा देता है और हमारे कर्तव्यों का एहसास करते है | जय श्री राधे

2619 days 12 hrs 39 mins ago By Gulshan Piplani
 

जीव को समय समय पर उसके दायित्वों का आभास करना ही संस्कारों की उपयोगिता और महत्त्व का मूल प्रतीत होता है - ऐसा मेरा मानना है - हरि ॐ तत्सत -

2619 days 12 hrs 42 mins ago By Gulshan Piplani
 

वेद व्यास द्वारा निर्दिष्ट 16 संस्कार महर्षि गौतम ने 40 तथा महर्षि अंगिरा ने 25 संस्कार माने हैं, परन्तु महर्षि वेद व्यास ने 16 संस्कार ही प्रमुख रूप से मान्यता दी गयी हैं. ये षोडश संस्कार हैं - 1. गर्भाधान 2. पुंसवन 3. सीमन्तोन्नयन 4. जातकर्म 5. नामकरण 6. निष्क्रमण 7. अन्नप्राशन 8. चूडाकर्म 9. कर्णवेध 10. वेदारम्भ 11. यज्ञोपवीत 12. समावर्तन 13. विवाह (पाणिग्रहण) 14. वानप्रस्थ 15. संन्यास 16. अंत्येष्टि संस्कार.

2621 days 8 hrs 27 mins ago By Aditya Bansal
 

मनुष्य जीवन में हमारे जन्म के पहले से लेकर मृत्यु के बाद तक कुल 16 संस्कार किए जाते हैं। ये संस्कार हमारे धार्मिक और सामाजिक जीवन की पहचान होते हैं। यह न केवल हमें समाज और राष्ट्र के अनुरूप चलना सिखाते हैं बल्कि हमारे जीवन की दिशा भी तय करते हैं। भारतीय संस्कृति में मनुष्य को राष्ट्र, समाज और जनजीवन के प्रति जिम्मेदार और कार्यकुशल बनाने के लिए जो नियम तय किए गए हैं उन्हें संस्कार कहा गया है। इन्हीं संस्कारों से गुणों में वृद्धि होती है। हिंदू संस्कृति में प्रमुख रूप से 16 संस्कार माने गए हैं जो गर्भाधान से शुरू होकर अंत्येष्टी पर खत्म होते हैं। व्यक्ति पर प्रभाव संस्कारों से हमारा जीवन बहुत प्रभावित होता है। संस्कार के लिए किए जाने वाले कार्यक्रमों में जो पूजा, यज्ञ, मंत्रोच्चरण आदि होता है उसका वैज्ञानिक महत्व साबित किया जा चुका है। संस्कार कितने गौतम स्मृति शास्त्र में ४क् संस्कारों का उल्लेख है। कुछ जगह ४८ संस्कार भी बताए गए हैं। महर्षि अंगिरा ने २५ संस्कारों का उल्लेख किया है। वर्तमान में महर्षि वेद व्यास स्मृति शास्त्र के अनुसार १६ संस्कार प्रचलित हैं। ये है भारतीय संस्कृति के 16 संस्कार गर्भाधान संस्कार, पुंसवन संस्कार, सीमन्तोन्नयन संस्कार, जातकर्म संस्कार, नामकरण संस्कार, निष्क्रमण संस्कार, अन्नप्राशन संस्कार, मुंडन संस्कार, कर्णवेध संस्कार, उपनयन संस्कार, विद्यारंभ संस्कार, केशांत संस्कार, समावर्तन संस्कार, विवाह संस्कार, विवाहाग्नि संस्कार, अंत्येष्टि संस्कार।

2621 days 17 hrs 53 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... जिस प्रकार चन्द्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्णता हासिल करता है, उसी प्रकार प्रत्येक जीवात्मा को "गर्भाधान संस्कार से अन्त्येष्टि संस्कार" तक सोलह संस्कारों से पूर्णता हासिल होती है।.... कलियुग में धर्म पच्चीस प्रतिशत रह जाता है इसलिये केवल चार संस्कारों (नामकरण, यज्ञोपवीत, पाणिग्रहण और अन्त्येष्टि) का ही महत्व रह जाता है।

 
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