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हम बार बार जन्म और मृत्यु का अनुभव क्यों करते हैं?

इस बारे में आपका क्या द्रष्टिकोण है?

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2810 days 2 hrs 25 mins ago By Aditya Bansal
 

जब हम जनम लेते है तो हमसे कोई न कोई पाप ज़रूर होता है और हम माया के बंधन में बांध जाते है उसी पाप को ख़तम करने के लिए हम जनम मरण की चर्व्युह में फसते है

2811 days 18 hrs 57 mins ago By Pt Chandra Sagar
 

राधे-राधे ! असीमित मन की कामनायों को भोगने बार -बार देह धारण करना पड़ता है | शरीरका मित्थ्या अभिमान त्यागकर केवल श्याम सुन्दर को अपना मान लेने से ही आवागमन छूट सकता है | " शाश्वत सम्बन्ध यही है कि --"मै हूँ श्री भगवान् का मेरे श्रीभगवान् |, अनुभव यह करते चलो , तजि ममता अभिमान || "

2811 days 23 hrs 2 mins ago By Diwakar Kushwaha
 

अब तक हम सभी यही सुनते और कहते आये हैं की जो अछे कार्य करता है उसको स्वर्ग और जो बुरे कार्य करता है उसको नरक की प्राप्ति होती है -- मेरे अनुसार जो अछे कर्म करते हैं उनको स्वर्ग तो मिलता है लकिन उसके बाद पुनः धरती पर अपने अछे कर्मो के अनुरूप जन्म लेना पड़ता है और जो नरकगामी प्राणी है उनको नरक भोगने के पश्चात पुनः अपने कर्मो के अनुरूप शारीर मिलता है और ये दोनों ही प्रकार के जीव चाहे अछे कर्मो वाले हो अथवा बुरे कर्मो वाले इनको जन्मा लेना ही पड़ता है परन्तु जो अपने कर्मो को इश्वर को समर्पित करके ईश्वरमय हो जाते है वे जीव इस भाव बंधन से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करते हैं और यही गति परमगति है , इससे बढ़कर कोई सद्गति नहीं है-------हरी ॐ तत्सत

2812 days 3 hrs 1 mins ago By Gulshan Piplani
 

जब तक जीव अपने अहंकार को समाप्त कर परमात्मा में विलय नहीं हो जाता अर्थात अहंकार वश कर्म निर्माण करता चला जाता है और बार बार जन्म-मरण के चक्कर में फंसता रहता है|

2812 days 3 hrs 26 mins ago By Waste Sam
 

राधे राधे हम अपने कर्म बंधन के कारण बार बार भोतिक शरीर प्राप्त करते है और अपने कर्मो को भोगते है | जय श्री राधे

2812 days 9 hrs 23 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... सभी व्यक्ति मिथ्या अहंकार के कारण जन्म और मृत्यु का अनुभव करते हैं।.... स्वय़ं को शरीर समझना और शरीर को कर्ता समझना ही मिथ्या अहंकार कहलाता है।

 
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