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आत्म साक्षात्कार के लिये क्या जरुरी है?

इस बारे में आपका क्या द्रष्टिकोण है?

  Views :872  Rating :5.0  Voted :2  Clarifications :11
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2725 days 16 hrs 35 mins ago By Gulshan Piplani
 

2725 days 16 hrs 35 mins ago By Gulshan Piplani
 

the most difficult but very simple about the enlightnment is the most obvious. But every one mised it because it is obvious. In this world if i say that u go to that irland and u can buy it, by now everybody would have gotten it. but this is the real problem with everyone. what we have we dont care that, what we dont have we want that. So this is the real problem, that it is right here within us. So many people chased me for that tell us, but actually they dont want to know, they wants know that i know that or not. It was there problem, but my problem was that whether they are actually capable to receive it right know or not. I told the same things by giving few articles and poems but, no one was trying to understand, it may possible that they wants to see it in other form. At this time, right now our whole perception of life is depending on our five senses. Yes, i m repeating it that the five senses give the information or that what we know have entered by either seeing, touching, tasting, smelling or hearing. This is the way to know the world. If we close these five senses we will not be able to get the experiences of our life in ourselves. the same things happen when we fall asleep. The same thing happen when we shut down these five sense by asleep or by death. when the body is alive on the same time the mind is on, the whole world is on. If we shut down our all five senses (which depends upon our present stithi) and open it in our inner world you will enlightened. Ho jayega aatam sakshatkaar. In that situation your connection with outer world will disconnect and the connection with inner world will connect. आत्म-साक्षात्कार मन भटके न बाहर-अंदर अंत:करण होए सुजान| भटकन-अटकन शम-दम होए, बढे परमात्म ज्ञान| भोग-विषयों का चिंतन छूटे, मिलें खोये भगवान शम-दम बाद उपरति होए, मिले ब्रह्मज्ञान-विज्ञान| अशुभ का प्रतिकार न होए, दुःख में भी सुख: पाये| कठिन तितिक्षा अंदर बेठे ब्रह्म से तुझे मिलाये|| श्रद्धा जगे धरमात्मा बन ब्रह्म में लीन हो जाये| हो ब्रह्मलीन परब्रह्म मिलें बिना जुगत लगाये|| - hariom tatsat -

2725 days 16 hrs 35 mins ago By Gulshan Piplani
 

2751 days 20 hrs 10 mins ago By Parul Srivastava
 

Nirmaal mind

2752 days 15 hrs 49 mins ago By Bhakti Rathore
 

radhe radhe nirmal man

2753 days 16 hrs 46 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

aatm sakshaatkaar ke liye man rupi darpan ko sirf seedha hi karna hai aur uske seedha hote hai aatmsaakshaatkaar ho jaayega.....radhe radhe

2753 days 19 hrs 54 mins ago By Aditya Bansal
 

 सबको भौतिक विज्ञान के विषय में थोड़ी जानकारी अवश्य होनी चाहिये। हमारा शरीर करोड़ों कोशिकाओं से बना है और प्रत्येक कोश में जीवन है। प्रतिदिन नयी कोषिकायें बनती और मिटती रहती हैं। जब रगड़ कर नहाते हो तो चमड़ी पर से मरी कोषिकायें धुल जाती हैं। तुम एक अकेले व्यक्ति नहीं हो। हमारे ऋषि मुनियों ने कहा है कि तुम एक ‘पुरुष’ हो, यानि कि चलती फिरती नगरी हो। संस्कृत में ‘पुर' का अर्थ नगरी होता है। हमारी आत्मा इस नगरी यानि हमारे इस चलते फिरते शरीर में वास करती है। और इस चलते फिरते शरीर में भी अनेक जीव जन्तु घूम रहें हैं साथ साथ। जानते हैं, हमारे शरीर की केवल आँतों में ही ५०,००० कीटाणु रहते हैं?!

तो, यह शरीर तो प्रतिदिन बदल रहा है, फिर भी इसमें एक कुछ है जो नहीं बदल रहा। यह समझने के लिये मधुमक्खी के छत्ते को जानना होगा। आपने देखा है कभी छत्ता? उसे थामे रखने वाला आधार कौन है? रानी मधु मक्खी। यदि रानी उड़ जाती है तो सब नष्ट हो जाता है।

वैसे ही हमारा शरीर भी अनेक परमाणुओं से बना है और इसमें एक रानी मधुमक्खी छुपी बैठी है। प्रत्येक शरीर मधु से भरे एक छत्ते के समान है। अपने शरीर रूपी छत्ते में छुपी रानी को ढ़ूँढ निकालो। यही ध्यान है। करोड़ों परमाणु जो हमारे शरीर में मौजूद हैं वैसे ही हाथी या अन्य प्राणी में भी हैं। बाहरी शरीर की बनावट का कोई महत्व नहीं है। अंदर वास करती आत्मा सबमें एक है और नित्य है, कभी बदलती नहीं। यह ज्ञान होने पर तुम्हें कुछ भी नहीं सता सकता है, तुम्हें सब अपने लगने लगेंगे, कोई बात तुम्हें विचलित नहीं कर पायेगी तब, और यही आध्यात्म का सार है।

2754 days 14 hrs 35 mins ago By Gulshan Piplani
 

आत्म-साक्षात्कार के लिए इच्छा-शक्ति का होना बहुत ज़रूरी है| करोड़ों शिष्य बिना इच्छा शक्ति के इससे वंचित रह जाते हैं| - बाकि तो बस राधे राधे करता जा आगे आगे बढता जय - राधे राधे











2754 days 17 hrs 14 mins ago By Waste Sam
 

राधे राधे आत्मा साक्षात्कार के लिए गुरु का होना बहुत जरूरी है | जय श्री राधे 

2755 days 1 hrs 53 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... 

"श्रीमद भगवत गीता" के अनुसार आत्म-साक्षात्कार की केवल दो ही विधियाँ बतायी गयीं हैं। 

पहली विधि तो यह है कि अष्टांग-योग द्वारा आत्मा और शरीर का अलग-अलग अनुभव करके, जीवन के हर क्षण में आत्मा को परमात्मा के सुपुर्द करना होता है और शरीर को प्रकृति को सुपुर्द करना होता है, इस विधि को  "श्रीमद भगवत गीता"> के अनुसार "सांख्य-योग" कहा गया है।

दूसरी विधि यह है कि बुद्धि-विवेक के द्वारा अपने कर्तव्य कर्म को "निष्काम भाव" से करते हुए कर्म-फलों को भगवान के सुपुर्द कर दिया जाता है, इस विधि को "श्रीमद भगवत गीता" के अनुसार "निष्काम कर्म-योग" या "भक्ति-योग" कहा गया है और इसी को "समर्पण-योग" भी कहते हैं।

जिस व्यक्ति को "सांख्य-योग" अच्छा लगता है वह पहली विधि को अपनाता है, और जिस व्यक्ति को "भक्ति-योग" अच्छा लगता है वह दूसरी विधि को अपनाता है। जो व्यक्ति इन दोनों विधियों के अतिरिक्त बुद्धि के द्वारा जो भी कुछ करता है, उससे सांसारिक बंधन ही उत्पन्न होता है।

2755 days 23 hrs 52 mins ago By Bhakti Rathore
 

radhe radhe nirmal man  hona jururi he  radhe radhe

 
Tags :
Radha Blessings



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