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आजादी क्या है और हमारे जीवन में आजादी का क्या मूल्य है ?

इस बारे में आपका क्या द्रष्टिकोण है?

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2644 days 14 hrs 45 mins ago By Aditya Bansal
 

आजादी को परिभाषित करना बहुत मुश्किल है। हर इंसान अपनी बुद्धि का सही उपयोग करते हुए आजादी की सीमा तय करता है। हर व्यक्ति स्वतंत्र रहना चाहता है, परंतु इसकी अधिकता कभी-कभी नुकसानदेह साबित होती है। आज बेटी-बेटे को समानता का दर्जा दिया जाता है, लेकिन समाज का माहौल देखते हुए लडकियों की सुरक्षा की दृष्टि से माता-पिता उनकी आजादी की सीमाएं तय कर देते हैं, जो कि किसी दृष्टि से गलत नहीं है। यही बात बेटों पर भी लागू होती हैं। उन्हें भी अनुशासित करने के लिए समय-समय पर उनकी आजादी की सीमाएं तय करना बहुत जरूरी है। आजादी में संतुलन बहुत जरूरी है। मेरे विचार से आजादी का सही अर्थ है-सामंजस्य। अगर हर इंसान आजादी के साथ अनुशासन का भी महत्व समझे तभी देश सही मायने में आजाद होगा।

2646 days 6 hrs 38 mins ago By Bhakti Rathore
 

azadi yaani gulami mukt jeevan jub humhre jeevan se gulmi chali jaati he to humfree ho ker ke jeevan jeete he

2648 days 12 hrs 8 mins ago By Gulshan Piplani
 

राधे राधे- आज़ादी उर्दू का शब्द है और इसे हिंदी में स्वतंत्रता कहते हैं| तंत्र-मन्त्र और यंत्र से यह दुनिया स्वचालित है| तन+त्र = तंत्र| मन+त्र=मन्त्र| और यं+त्र=यंत्र होता है| तन का अभिप्राय शरीर और त्र का अभिप्राय उद्धार से है| अर्थात जो तन का उद्धार करे वोह तंत्र जो मन का उद्धार करे वोह मन्त्र और जो सम्पूर्ण योनी का उद्धार करे वोह यंत्र होता है| इस प्रकार स्व + तन +त्र = अपने तन के उद्धार करने का जब हमें सुअवसर प्रदान हुआ तो हम स्वतंत्र हुए और जब हमारा उद्धार करने के कार्य कोई और करता था तो हम परतन्त्र हुए| दरअसल स्वतंत्रता में परतन्त्रता रहती है और परतंत्रता में स्वतंत्रता| ऐसा मेरा मानना है| मैं अपने घर का मुख्या हूँ घर चलाने का मुझे अधिकार है पर घर के और लोगों का आलोचना करने का भी अधिकार है जो मुझे परतन्त्र कर देता है| जब हम औरों के अधिकार को समझने लगते हैं तो आज़ादी का मूल्य स्वत: समझ आने लगता है|- राधे राधे

2649 days 12 hrs 27 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

आजादी यानी स्वतंत्रता हर जीव की प्राथमिक इच्छा है की वो स्वतंत्र हो पर वो समझ ही नहीं पता स्वतंत्रता है क्या | जन्म होते ही माँ बाप के बंधन में, किशोर अवस्था में विद्या और गुरु के अनुशासन का बंधन जवान होते ही गृहस्थ का बंधन समाज का बंधन तो है ही | क्या इतने बन्धनों के होते भी जीव आज़ाद है देखने में तो लगता है की नहीं इतने बन्धनों में होते जीव कैसे आज़ाद हो सकता है आजादी तो ऐसा लगता है मृत्यु के बाद ही है | लेकिन ऐसा नहीं है नियमों में रहकर ही हम आज़ाद रह सकते हैं वर्ना हम इस संसार में ठीक से सांस भी ना ले पायें जीना तो दूर है | अगर प्रकृति के नियम ना हो तो हमारा जीवन ही ना चले | सूर्य का समय से निकलना हवा का बहना मौसम का परिवर्तन सब कुछ नियम से चल रहा है | अगर प्रकृति नियम को ख़तम कर दे तो हम लगभग मृत प्राय ही हो जायेंगे | जीवन रहेगा ही नहीं | फिर स्वतंत्रता आखिर है क्या आजादी है जीने की अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए दूसरे के अधिकारों की रक्षा करना ही असली आजादी है | जो जीव इस नियम के तहत जीवन जीता है वो सदा आज़ाद रहता है | आजादी की अर्थ है मन का स्थिर हो जाना, जीवन में संतोष का होना आनंद के समुद्र में डूबे रहना ही असली स्वतंत्रता है | जो दुखों से मुक्त है वो स्वतंत्र है | स्वतंत्रता का मूल्य है अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहकर हमें दूसरों के अधिकारों की रक्षा करनी है | पूरे देश का परिकर इसी तरह से अपना जीवन जिए तभी हम आजादी का असली लुत्फ़ ले पायेंगे | राधे राधे

2650 days 9 hrs 6 mins ago By Akshay Soni
 

aazadi,,,, sunne men ek,saral,, sahaj,, sundar,, aur swapinil sa shabd hai parantu ye apne aap men ek goodh rahasya, ek goodh arth samete hue hai,, agar sansarik drishti se dekhen to azadi hamari niji aur samajik swatantrata hai,, jisme hum nirbadh roop se,, bina kisi rok-tok k apne ichcha anusar har karya kar saken,,, parantu agar adhyatmik drishti se dekhen to azadi ka arth aur goodh athva gehra ho jata hai,,, adhyatmik drishti me azadi hamari jeevatma ki pavitra swachchandata bhar hai,, jab hamari jeevatma nirbadh roop se, bina kisi sansarik ,moh, maya, pralobhan, aadi se mukt hokar apni adhyatmik unnati karte hue adhyatmik jagat me hi swatantra vichran kar sake to hum,,, ya hamari jeevatma azadi ho jati hai,,,, aur sachche arthon me yahi azadi hai,,,,

2651 days 11 hrs 3 mins ago By Waste Sam
 

radhey radhey, azaadi ko yadi mein apne najariye se dekhoon toh jo bhagwan ne toh iss manav tan diya yeh azaadi ka pratik hai, aur jo hume usne poorantah saksham banaya yeh uske kripa hai. azaadi ka arth hai swatantra jo hum hai kyonki hum kaise bhi karm karne ke liye azaad, yadi hum galat karm karte hai toh bhagwan ke parshad hume rookte nahi par hissab karte hai mrityu ke baad... mere liye karmo ko karne ke azaadi hee azaadi hai aur azaadi mere liye bahut mahtvpoorna hai. Azaadi isliye mulyawaan hai kyonki hum apni iccha anusar karm kar sakte hai, ab yeh mujhe par(mere bhuddhi) chod diya hai ke mein kaise karmo ka anusaaran karun-bandhankari yaa swatantrata ko aur pusht karne wale...jai shri radhey

2651 days 14 hrs 45 mins ago By Vipin Sharma
 

jeevan me hum kabhi bhi azaad nahi ho sakte. APNI AATMA KA KALYAAN HI AZADI HAI. JANM-MARAN KE BANDHAN SE MUKT HONA AZADI HAI.

2651 days 15 hrs 50 mins ago By Chandrani Purkayasth
 

इस दुनिया में कोई भी जीव, आजाद नही हैं, वह तो धरती पर आता हैं अपने कर्म फल को भोगने . प्रारब्ध का हिसाब ख़िताब लेकर. काम, क्रोध , लोभ, मोह, मद, मात्सर्य जैसे छे रिपुओं तथा सत्व , रज और तमोगुण द्वारा नियंत्रित होता हुआ वह काठपुतलियों जैसा नाचता रहता हा माया के इशारो पर . हमारा देश आज स्वतंत्र हैं. लाखो बीर बिरांगनाओं ने फल के कामना किये बिना देश के लिए अपना सब कुछ निछावर कर दिया था इसीलिए आज हम खुली हवा में सांस ले रहे हैं. पर खून , हत्या , लुट मार, अपहरण, भ्रस्टाचार के काले बादलों से घिरी हुई ये स्वतंत्रता आज तड़प रही हा. शासक आज शोषक बन गया हैं , शासन और विचार दोनों आज अज्ञान का पट्टी बांधे खड़े हैं. इस विषाक्त समय में एक मात्र उपाय हैं भगवत गीता द्वारा दिखाया गया मार्ग. गीता में भगवन ने स्वयं रास्ता बतलाया हैं, सही रूप से जीबन निरबाह करने का तथा जन्म मृत्यु के चक्रब्यूह से बाहर निकल कर सही रूप में अपने जीबन में स्वतंत्रता अर्जन करने का. अगर हम भगवत गीता द्वारा दिखाए गए मार्ग का अनुसरण करते हुए एक सदाचारी जीबन निर्वाह करें और भगवान को अपने कर्म का फल अर्पण करते हुए , अपने कर्तब्य का पालन करते रहे , कभी भी सत्य और धर्म के मार्ग से विचलित न हो, तभी ये देश सुन्दर , सुशासित हो उठेगा. भ्रस्टाचार और बुराइया अपने आप मिट जायेंगी और हमे दोहरे रूप से स्वतंत्रता की प्राप्ति होगी एक तो सामाजिक रूप से और दूसरी आत्मिक और आध्यात्मिक रूप से. राजनीतिक स्वतंत्रता असम्पूर्ण हैं सामाजिक, आत्मिक और आध्यात्मिक स्वतंत्रता के बिना. आइये एक सुंदर , स्वतंत्र देश , जाती और जीबन का गठन करें.

2651 days 16 hrs 55 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... भौतिक रूप से किसी भी आज़ादी का कोई भी महत्व नहीं होता है। भौतिक रूप से आज़ादी का मूल्य सभी व्यक्तियों के लिये भिन्न-भिन्न होता है। यह भौतिक आज़ादी सभी के लिये प्रारब्ध पर आधारित होती है।....... वास्तविक आज़ादी का मूल्य तो सूक्ष्म देह से आजाद होना है, जो सभी प्राणीयों के लिये एक ही लक्ष्य होता है।

2651 days 17 hrs 39 mins ago By Dasi Radhika
 

आज़ादी का शाब्दिक अर्थ ……….पूर्ण रूप से स्वतंत्र होना है ……अर्थात किसी भी रूप में आप पर किसी का नियंत्रण न हो. आज़ादी का अर्थ है…………. कोई भी आप के जीवन में हस्तक्षेप ना करे. लेकिन हमारे जीवन में ऐसी आज़ादी किसी काम की नहीं है ……. कारण………इससे मानव की समुचित विकास की संभावना नहीं बनती है. स्वाभाविक रूप से जो हमारे अधिकार हैं …….उनकी स्वंत्रता हमें मिलनी चाहिए. एक बच्चे का अपने माता-पिता का प्यार पाना उसकी अधिकारिक स्वंत्रता है. भूख लगने पर बच्चे का रोना ……… स्वाभाविक लक्षण है………..यह कृत्य उसकी स्वंत्रता है. बच्चे की माता उसके इस कृत्य पर उसको भोजन उपलब्ध कराती है………यह एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है……..और हम लोग भी इसे अन्यथा नहीं लेते है. लेकिन यदि बच्चे बड़े होने पर उपद्रव करते हैं ……तो हम उनको ऐसा करने की आज़ादी नहीं देते हैं……..हम उनकी इस स्वतंत्रता पर हस्तक्षेप करते हैं……..यह अनुशासन है ….. यह मानव के चारित्रिक उत्थान एवं सामाजिक प्रक्रिया के लिए ….आवश्यक तत्त्व है. इसी प्रकार सरकार की भी यह जिम्मेदारी है कि…………… वह नागरिकों के विकास एवं सुविधा हेतु प्रयास करे……….. समाज के हर वर्ग को स्वस्थ एवं स्वतंत्र माहौल मिले ताकि उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके …………यही सच्ची स्वतंत्रता है. हमे जरुरत है प्रशासनिक रूप से सफल ढांचा तैयार करने की …………… तभी हम स्वाभिमान के साथ उन्नति कर पाएंगे और तभी हमें वास्तविक आज़ादी प्राप्त हो पायगी …….. आइये …… वास्तविक आज़ादी के लिए एक बार फिर …… आज़ादी की नई जंग में भागीदार बने…….. जय हिंद.

 
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