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धर्म और आध्यात्म में क्या अंतर है?

इस बारे में आपका क्या द्रष्टिकोण है?

  Views :546  Rating :5.0  Voted :2  Clarifications :17
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2689 days 9 hrs 7 mins ago By Pt Chandra Sagar
 

सद्गुणों को धारण करना ही धर्म है , धर्म नैतिक व शाश्वत मूल्यों की रक्षा करना सिखाता है

,एकांत में जीव की रक्षा धर्म ही करता है |
 जबकि आत्मा का ज्ञान ही अध्यात्म है |परमात्मा के अंश आत्मा स्वरूपिणी अग्नि को 
जानने की प्रक्रिया ही अध्यात्म है |

2706 days 13 hrs 42 mins ago By Aditya Bansal
 

निश्चित रूप से धर्म और आध्यात्म में अंतर है.....आपने कहा कि "धर्म अन्धों कि लाठी मात्र है...".....आपकी बात से सहमत हुआ जा सकता है अगर आप "धर्म" कि जगह "पंथ या कर्मकांड" शब्द का प्रयोग करें.......धर्म कोई कर्मकांड नहीं, धर्म सामाजिक आवश्यकता है....समाज के विकास कि पद्धति है......आध्यात्म और धर्म में तुलना कि जाए तो धर्म का पलड़ा भारी बैठता है.....आध्यात्म मनुष्य की व्यक्तिगत आवश्यकता है.....आप आध्यात्मिक है तो आप निश्चित रूप से मोक्ष को स्वयं के लिए सुरक्षित कर रहे हैं....परन्तु यदि आप धार्मिक है तो समाज में अपना योगदान, न चाहने पर भी, स्वतः दे देंगे.....धर्म किसी समुदाय विशेष से सम्बंधित नहीं है...जिसे धर्म समझ रहे हैं आप , वो बस एक पंथ के अंतर्गत आने वाला कर्मकांड मात्र है.

2706 days 13 hrs 42 mins ago By Aditya Bansal
 

निश्चित रूप से धर्म और आध्यात्म में अंतर है.....आपने कहा कि "धर्म अन्धों कि लाठी मात्र है...".....आपकी बात से सहमत हुआ जा सकता है अगर आप "धर्म" कि जगह "पंथ या कर्मकांड" शब्द का प्रयोग करें.......धर्म कोई कर्मकांड नहीं, धर्म सामाजिक आवश्यकता है....समाज के विकास कि पद्धति है......आध्यात्म और धर्म में तुलना कि जाए तो धर्म का पलड़ा भारी बैठता है.....आध्यात्म मनुष्य की व्यक्तिगत आवश्यकता है.....आप आध्यात्मिक है तो आप निश्चित रूप से मोक्ष को स्वयं के लिए सुरक्षित कर रहे हैं....परन्तु यदि आप धार्मिक है तो समाज में अपना योगदान, न चाहने पर भी, स्वतः दे देंगे.....धर्म किसी समुदाय विशेष से सम्बंधित नहीं है...जिसे धर्म समझ रहे हैं आप , वो बस एक पंथ के अंतर्गत आने वाला कर्मकांड मात्र है.

2708 days 5 hrs 21 mins ago By Bhakti Rathore
 

dhrem jo hume humhre purvajo se mila he aur jo shicha hume humhre gyan guru ke dewara mile wo adhatm he

2716 days 42 mins ago By Waste Sam
 

radhey radhey...adhyatam hai bhagwan ke saath judana yaa aisa kahe ke khud se judna aur dharam woh hai jo is judne ke raasta dikhata hai.. jai shri radhey

2716 days 3 hrs 23 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

धर्म जो जीवन में धारण किया जा सके | यानी हमारी दिनचर्या से लेकर ध्यान समाधि और हमारे आचरण हमारी मर्यादाएं तक सब कुछ धर्म के निहित हैं | और अध्यात्म वो अध्धयन है जो हमें अन्धकार से निकाल कर उजाले में ले जाए यानी हमारे अंतर का अन्धकार मिटा कर हमारे अंतर को सत्य के उजाले से प्रकाशित कर दे | बहुत बड़ा अंतर नहीं है धर्म से अध्यात्म की ओर जाएँ या अध्यात्म से धर्म की ओर मतलब एक ही सत्य को पहचानना उसे पाना और उसमे मिल जाना | राधे राधे

2716 days 8 hrs 52 mins ago By Gulshan Piplani
 

थोडा और जोड़ना चाहूँगा धरम अलग अलग हो सकते हैं पर अध्यातम एक ही होता है - राधे राधे

2717 days 6 hrs 19 mins ago By Gulshan Piplani
 

सबसे पहले धर्म और अध्यात्म में जो थोडा सा भेद है उसे हम समझें धर्म जीवन जीने का एक रास्ता मात्र है पर अध्यात्म जीवन की समग्रता का... नाम है| धर्म व्यापकता है अध्यात्म सर्व व्यापकता है| मनुष्य को मर्यादित जीवन जीने के लिए एक दिशा चाहिए , धर्म में मर्यादा है| अध्यात्म पूरा जीवन है अगर जीवन अमर्यादित हो जाये तो क्या होगा? अध्यात्म जीवन की दिशा नहीं है, समग्र जीवन अध्यात्म है।मनुष्य जन्म लेते ही अपने मात-पिता और बंधुजनों से घिरा होता है और हर किसी की स्थिति भिन्न -भिन्न होती है| हर घर की मर्यादा अलग-अलग होती हैं इस लिए जीव अपनी प्रकृति अनुसार मर्यादित हो पाता है| धर्म उसे जीवन की उचित मर्यादायें प्रदान करता है और उसके जीवन को प्रकाशित कर उज्जवलता प्रदान करता है|

2717 days 10 hrs 48 mins ago By Aditya Bansal
 

आध्यात्म बन सकता है शांति का वाहक

2717 days 10 hrs 49 mins ago By Aditya Bansal
 

ईश्वरीय दूत ईश्वरीय संदेश प्राप्त करते हैं क्योंकि उनमें कुछ एसी विशेषताएं व क्षमताएं होती हैं जो हर मनुष्य में नहीं हो सकती और यही विशेषताएं व क्षमताएं उन्हें पापों से भी रोकती हैं। ग़लती, अपराध व पाप, वास्तव में ज्ञान व जानकारी में कमी के कारण होता है और यदि अपराधी को अपने अपराध की बुराई, परिणाम और प्रभाव का पूर्ण रूप से ज्ञान हो जाए तो वह अपराध नहीं करता। पिछली कुछ कड़ियों में यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि ईश्वरीय दूत पापों से क्यों दूर रहते है इसके साथ यह भी बताया कि उनका पापों से दूर रहना क्यों आवश्यक है किन्तु ईश्वरीय दूतों के पापों से दूर रहने की बात पर कई शंकाएं की जाती हैं जिनमें से कुछ शंकाओं और उनके निवारण का हम वर्णन कर रहे हैं। कुछ लोगों का यह कहना है कि यदि ईश्वर ने अपने दूतों को पापों से दूर रखा है और उनकी यह पवित्रता उनके कर्तव्यों के सही रूप से निर्वाह के लिए आवश्यक भी है तो इस स्थिति में अधिकार व चयन व अपनी इच्छा की विशेषता उन में बाकी नहीं रहेगी तो इस दशा में उनके अच्छे कामों ईश्वर उन्हें फल भी नहीं दे सकता क्योंकि यदि उन्होंने अच्छा काम किया है तो इस लिए किया है क्योंकि ईश्वर ने उन्हें पापों से दूर रखा और ईश्वर जिसे भी इस प्रकार से पापों से दूर रखेगा वह अच्छा काम ही करेगा। इस शंका का निवारण किसी सीमा तक पिछली कड़ी में हो चुका है जिसका सार यह है कि पवित्र होने का अर्थ विवश होना नहीं है और पापों से दूरी वास्तव में उनकी स्वेच्छा से होती है इस अंतर के साथ कि उन पर ईश्वर की विशेष कृपा होती है किंतु पवित्र लोगों और ईश्वरीय दूतों पर ईश्वर की विशेष कृपा, विशिष्ट लोगों को प्राप्त सुविधाओं की भांति होती है। अतिरिक्त सुविधा, अतिरिक्त दायित्व और अतिरिक्त संवेदनशीलता का कारण होती है।

2717 days 10 hrs 58 mins ago By Vipin Sharma
 

dharm to har ek samudaay ke alag alag ho jate hain koi kisi ko manta h koi kisi ho lekin adhyatm sabhi ka ek hi hota h.

2717 days 11 hrs 11 mins ago By Vipin Sharma
 

Radhe Radhe

2717 days 11 hrs 16 mins ago By Ashish Anand
 

dharma, bhagwan se judane ka ek sadhan hai means 'a process to conect with God.' aur adhyatma 'adhi+atma' means jo puri tareh se sirf bhagwan ki bhakti mein apne aap ko busy kar leta hai... usse adhyatma kehaten hain... dharam mein manushya apne sansarik jeevan ke karya bhi karta hai, vo bhi uska ek dharma hai... lekin adhyatma mein sirf wo bhagwan ki bhakti karta hai, aur unki seva mein laga rehata hai... hum keh sakten hai ki dharma ka ek part adhyatma hai leikn adhyatma ke ek part dharm nahin hain... hare krishna...

2717 days 13 hrs ago By Gulshan Piplani
 

धर्म और आध्यात्म में क्या अंतर है?” इस बारे में आपका क्या द्रष्टिकोण है? भागिरिथि नदी है जो जब अलकनंदा में समाहित हो जाती है तो अलकनंदा बन जाती है अलकनंदा जब मन्दाकिनी में समां जाती है तो मन्दाकिनी बन जाती है और मन्दाकिनी जब गंगा में समां जाती है तो गंगा बन जाती है और गंगा जब सागर में समां जाती है तो सागर बन जाती है हम कहते हैं इंडियन ओसियन (ocean) पसिफिक ओसियन, अरेबिक ओसियन अलग अलग नाम से जानते हैं पर क्या सागर अलग अलग हैं| सागर तो एक ही है जिस देश को निहाल करता है वोह उसे अपना कहने लगता है| इसी तरह सब धर्म अध्यातम में समाहित हैं| जब हम येष्टी से निकलने लगते हैं तभी समष्टि का ज्ञान होता है| गुलशन हरभगवान पिपलानी - राधे राधे

2717 days 14 hrs 12 mins ago By Vipin Sharma
 

DHARM HAME ADHYATM KI OR LE JATA H OR ADHYATM MOKSH KI OR.

2717 days 16 hrs 19 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... (अध्यात्म = अध्यन+आत्मा = आत्मा का ज्ञान).... धर्म के आचरण के बिना अध्यात्म की प्राप्ति असंभव होती है।

2717 days 16 hrs 55 mins ago By Dasi Radhika
 

आध्यात्म सबको जोड़ता है। अलग अलग मान्यताएं हैं पर आध्यात्म इन सबको एक सूत्र में बांधता है। कोई वैष्नव हो सकता है, कोई हिंदु हो सकता है, कोई सिक्ख हो सकता है, पर आध्यात्म मान्यता नहीं बल्कि अनुभव है। "राधे राधे"

 
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