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मुक्ति क्या है?, और हम मुक्त कैसे होंगे?

इस बारे में आपका क्या द्रष्टिकोण है?

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2706 days 13 hrs 20 mins ago By Aditya Bansal
 

भागवत सुनने से मुक्ति मिलती है

2708 days 5 hrs 1 mins ago By Bhakti Rathore
 

hume kabal bhgwaan bhajna ker ke mukt ho sakte he jeevan se aur subse nahi to nahi

2716 days 10 mins ago By Waste Sam
 

राधे राधे....संतो से जैसा भाव मैंने सुना है और जो मेरे मन को सबसे आधिक भाया वो है - मुक्ति है राग दवश से मुक्त हो जाना और हम यदि इस निकल दे तो हम मुक्त हो जायेंगे और वैराग्य में स्थिर हो जायेंगे | इस कार्य में भगवान के कृपा के आवश्यकता है उसके लिए भगवान सुमिरन सदा करे | जय श्री राधे...

2716 days 17 hrs 13 mins ago By Raghu Raj Soni
 

Getting out of vicious circle of birth & death, by merging self with the being, by constant meditation under shelter of a revered Satguru, Mukti is said to have attained by a true seeker when he performs all actions without attachment. He dwells in divine bliss as a pure drishta & not a doer. But a true seeker does not even want Mukti; all he needs is to remain merged for ever with the Supreme.

2718 days 7 hrs 50 mins ago By Vipin Sharma
 

sabhi icchaayon ko tyaagkar manushya mukt ho sakta h. koi iccha na rahna hi mukti h.

2719 days 26 mins ago By Kailash Chandra Shar
 

आत्म तत्व जब जीव स्वरूप होता है तो कर्म का और त्रिगुनात्म प्रकृति की सलग्नता हो जाती है और कर्म से ही पाप और पुन्य का जन्म होता है | इन पाप और पुन्य के परिणाम स्वरूप ही जन्मो की श्रृंखला बंधनकारी हो जाती है | भगवान कृष्ण गीता के १८ वें अध्याय में कहते हैं ....सर्व धर्मान परितज्य माँ एकं शरणम् ब्रज ...... और साथ ही वचन देते हैं कि मै तुझे सारे पापो से मुक्त कर दूंगा ..इसप्रकार ... मुक्ति का सहज और एकमात्र उपाय '' सम्पूर्ण समर्पण'' है |

2719 days 1 hrs 38 mins ago By Prahlad Sharma
 

इस मोह माया को छोड़ कर राध्ये में राम जाना ही मुक्ति है ? मुक्ति तब मिलेगी जब आप अपने आप को श्रीराध्ये को समर्पित कर दोगे ? और दूसरा कोई रास्ता ही नहीं है ??

2719 days 2 hrs 17 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... सूक्ष्म देह से मुक्त होना ही वास्तविक मुक्ति है।.... हम सूक्ष्म देह से केवल निष्काम भाव से कर्म करके ही मुक्त हो सकते हैं।

2719 days 7 hrs 55 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

हर जीव की चाह होती है वो मुक्त हो जाए स्वतंत्र हो जाए | हम अपने जीवन में हमेशा कहते रहते हैं ये काम हो जाए तो मुक्त हो जाऊँ लड़की की शादी हो जाए तो मुक्त हो जाऊँ लड़के की नौकरी लग जाए तो मुक्त हो जाऊँ | लड़का सेट हो गया तो उसकी शादी हो जाए | यानी जितने बंधन हैं हम सब बांधते रहते हैं और चाहते ये हैं की मुक्त हो जाऊँ | वास्तव में मुक्ति तो है की हम कर्म के बंधन से मुक्त हो जाएँ | कर्म करते हुए भी उसके बंधन से मुक्त होना ही असली मुक्ति है | मरने के बाद की मुक्ति है या नहीं ये अलग बात है पर जीवित रहते हुए मुक्त होने का अर्थ तो इतना है की हम किसी बंधन में ना हो | अगर जीवित रहते मुक्त हो गए तो मृत्यु के बाद मुक्त होना तो निश्चित ही है | अब सवाल ये है की मुक्त हों कैसे तो इसके लिए तो भगवान् श्री कृष्ण ने स्वयं गीताजी में कहा है कि कर्म का त्याग करने से मुक्त नहीं हुआ जा सकता सिर्फ कर्म के फल का त्याग करने से ही कर्मों के बंधन से मुक्त हुआ जा सकता है | जब जीव कर्म बंधन से मुक्त होगा तो मन में संकल्प विकल्प बंद हो जायेंगे मन स्थिर हो जाएगा | जब मन में संकल्प विकल्प नहीं होगा तो नए कर्मों का सृजन नहीं होगा और पुनर्जन्म से मुक्त हो जायेंगे क्योंकि कर्म ही पुनर्जन्म का हेतु है | राधे राधे

2719 days 9 hrs 14 mins ago By Gulshan Piplani
 

जब मनुष्य संभावी हो जाता है और उसके लिया दुःख:सुख, सर्दी गर्मी अक सामान हो जाते हैं तो उस संभावी पुरष को मुक्तात्मा की संज्ञा प्रदान हो जाती है अर्थात इस मृत्यु लोक के आवागमन से मुक्ति| एक उद्धरण अपनी पुस्तक गीता जी - कविता जी से देना चाहूँगा जो की अध्याय ४ के २३ शलोक का दोहे में अनुवाद है: प्रकृतिक गुणों से मुक्त होकर, जो नर आसक्ति विहीन| दिव्य ज्ञान में पूर्ण स्थित हो, कर्म,ब्रह्म में लीन||

2719 days 10 hrs 31 mins ago By Ashish Anand
 

sansar ke iss jeevan-maran ke bandhan se mukta hokar, uss parmehswar ke param dham ko jana hi mukti kehlati hai... jab-tak humare mann mein 'ikccha' rahegi aur jab-tak hum khud ko uss parmeshwar ko puri tareh samrpit nahin kar deten... tab-tak hum mukta nahin ho sakte... to yadi hume mukta hona hai to apne ko usse surrender karna hi padega... yahin mukti ka marg hai... bhagwan ki ananya-bhakti aur humesha unke naam ka smaran... radhe-krishna...

2719 days 13 hrs 40 mins ago By Vipin Sharma
 

JEEVAN-MARAN SE CHHUTKARA PAANE KO MUKTI KAHTE H OR SACHHE MAN SE ISHWAR KI BHAKTI KARKE AATMA KO PAVAN BANAKAR HUM MUKT HO SAKTE HAIN

2719 days 13 hrs 41 mins ago By Vipin Sharma
 

2719 days 14 hrs 9 mins ago By Ramnish Gupta
 

84 lakh yoniyo se chhutkare ko mukti kehte hai.only a true GURU can teach us the right way to mukti.

2719 days 16 hrs 50 mins ago By Dasi Radhika
 

मैं मुक्त कैसे हो‍उंगा? हम सभी को ये मानना होगा कि हम मुक्त है । बंधन भी मन की एक मान्यता है, तो मुक्ति भी मान ले । बंधन मन में है। "राधे राधे"

 
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Radha Blessings



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