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समृद्धी कैसे बढ़ाई जा सकती है?

इस बारे में आपका क्या द्रष्टिकोण है?

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2813 days 7 hrs 27 mins ago By Pt Chandra Sagar
 

भागवत में भगवान कहते हैं -"यत्र संकीर्तने नैव सर्व स्वर्थोभी लभ्यते " अर्थात हे लक्ष्मी ! जहाँ मेरे नाम का संकीर्तन होगा , तुम उस परिवार की समस्त स्वार्थों की पूर्ति करोगी | लक्ष्मी की कृपा के विना समृद्धि नहीं आती, नारायण के साथ यदि लक्ष्मी आती है तो समृद्धि अवश्य बढेगी | इसलिए सतत जपिए --- हरे कृष्ण हरे कृष्ण ,कृष्ण कृष्ण हरे हरे | हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे ||

2833 days 22 hrs 30 mins ago By Bhakti Rathore
 

apne east ka bhajn aur pujan ker ke sub kuch unko sopker ke

2834 days 4 hrs 9 mins ago By Vipin Sharma
 

JAHA SHANTI HAI VAHI SUKH HAI OR VAHI SAMRIDHHI

2839 days 22 hrs 53 mins ago By Waste Sam
 

radhey radhey... samriddhi baad sakti hai- yadi hum apne lakshmi ka prayog sahi prakar se kare arthat hum apni lakshmi ko daan mein kharch kare, mann mein sab ke liye satvik bhav rakhe, bhagwan ke bhakti kare, santo ka sammaan kare, satsang kare aadi... har karya/karm bhagwan ko arpit karte chale.. jai shri radhey

2844 days 4 hrs 30 mins ago By Vipin Sharma
 

PREM BHAAV SE

2845 days 3 hrs 46 mins ago By Ashish Anand
 

pehale ye samjhana hoga ki wastvik samriddhi kya hai... iss sansar mein wastvik samriddhi sirf aur sirf 'bhagwan ke naam ka smaran aur unki bhakti karna hai'... jiss vyakti ke paas bhagwan ki 'ananya bhakti' hai usse hi sabse 'samriddh-shali' vyakti mana jata hai... kyunki 'bhagwan ke naam' se bada kya hai...

2845 days 3 hrs 51 mins ago By Jyoti Batra
 

kanha ko yad kr k bol tay h na hum krta ni m kuch b mara nam ho rha h

2846 days 19 hrs 17 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... (समृद्धि = सम+वृद्धि = समानता की वृद्धि) समानता के भाव में वृद्धि होना ही समृद्धि कहलाती है।.... जो व्यक्ति संसार की प्रत्येक वस्तु को भगवान की समझकर भगवान के लिये ही उपयोग करता है वही व्यक्ति भगवान की कृपा से समृद्धि को प्राप्त होता है।.... यानि जिस व्यक्ति के मन में समानता का भाव उत्पन्न हो जाता वही व्यक्ति वास्तव में समृद्धिशाली होता है।

2846 days 19 hrs 18 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... (समृद्धि = सम+वृद्धि = समानता की वृद्धि) समानता के भाव में वृद्धि होना ही समृद्धि कहलाती है।.... जो व्यक्ति संसार की प्रत्येक को भगवान की समझकर भगवान के लिये ही उपयोग करता है वही व्यक्ति भगवान की कृपा से समृद्धि को प्राप्त होता है।.... यानि जिस व्यक्ति के मन में समानता का भाव उत्पन्न हो जाता वही व्यक्ति वास्तव में समृद्धिशाली होता है।

2846 days 22 hrs 1 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

समृद्धि दो तरह की है एक भौतिक और दूसरी अध्यात्मिक | और दोनों ही को बढाने के लिए संकल्प का होना जरुरी है और उसके लिए मनोबल का होना जरुरी है | मन में संकल्प हो कि आगे बढ़ना है अपने लक्ष्य को प्राप्त करना है तो कोई भी लक्ष्य मुश्किल नहीं है | संकल्प को दृढ करने के लिए मनोबल होना चाहिए जब तक ऊँचा मनोबल नहीं होगा संकल्प दृढ नहीं हो सकता | कहते हैं मन के जीते जीत है और मन के हारे हार | जिसका मन हार गया किसी असफलता से उसमे निराशा छा गयी वो दृढ संकल्प नहीं कर सकता | उच्च मनोबल का मतलब है इच्छा शक्ति का दृढ होना और ये तभी हो सकती है जब हम अपने मन को एकाग्र करना सीख ले | बिना एकाग्रता के ना इच्छा शक्ति दृढ होगी ना उच्च मनोबल बनेगा | और मन को एकाग्र करने के लिए अभ्यास कि जरूरत है | छोटी छोटी बातों से शुरू कर सकते हैं | जैसे भोजन करते समय मन भोजन में ही एकाग्र करने की कोशिश करें, स्नान करते समय स्नान में, कपडे पहनते समय कपडे पहनने में, कोई भजन या गाना सुने तो उसे सुनने में, या मंदिर में घटा बजाएं तो उसकी ध्वनि को सुनने में मन को वहीँ लगाए जितना मन एकाग्रता होता जाएगा उतना ही मनोबल ऊँचा होगा और उतना ही दृढ संकल्प से हम कार्य करेंगे | दृढ संकल्प से किये हुए कार्य से ही हमारी समृद्धि बढ़ेगी चाहे हमें भौतिक समृद्धि बढानी हो चाहे अध्यात्मिक समृद्धि को बढ़ाना हो दोनों के लिए मनोबल तो उच्च होना ही चाहिए | राधे राधे

2847 days 58 mins ago By Aditya Bansal
 

केवल पैसा होना ही धन नहीं है। आपके पास बड़ी बैंक राशि हो, बड़ी रियासतें हों पर यदि मुख पर तनाव झलकता हो तो आप इतने दुखी नज़र आते हैं कि कोई आपको समृद्ध नहीं कह सकता। समृद्धि केवल ढ़ेर सारा धन जमा करना नहीं है, समृद्धि का अर्थ है जीवन की भव्यता को मान्यता देना, जीवन का सम्मान करना। व्यक्ति का सच्चा धन उसका मनोबल है। धन का जीवन में होने का प्रयोजन क्या है? यही कि उससे आपका मनोबल बढ़े। जिस धन से मनोबल नहीं बढ़ सकता, वह धन ही क्या? जिस धन से बीमारी आये, तो वह धन ही क्या? जिस धन से विवाद बढ़े , वो धन ही क्या? ठीक है ना? धन भी कई प्रकार के होते हैं जैसे - विद्या धन, ज्ञान धन, स्वास्थ्य धन, मनोबल धन, वीर्य धन इत्यादि। यदि आप में मनोबल है तो कोई भी कार्य सम्भाल सकते हो, हर प्रबंध को कुशलतापूर्वक कर सकते हो।

2847 days 4 hrs 22 mins ago By Gulshan Piplani
 

दरअसल पहले विरक्ति होती है फिर वैराग्य उत्पन होता है और फिर इच्छाओं का त्याग करने से हमें संतोष की प्राप्ति होती है और हम स्वत: संतुष्ट होने लगते हैं अर्थात समृद्धि बढ़ने लगती है|

2847 days 6 hrs 6 mins ago By Vipul Nema
 

asli smradhi santosh se pai ja sakti hai yadi hame santosh hoga to man khush are mah sawasth rahege. jo ki samradhi ka suchak hai. radhe radhe

2847 days 6 hrs 17 mins ago By Vipin Sharma
 

TYAAG KI OR AGRASAR HONE SE.

2847 days 9 hrs 48 mins ago By Manish Nema
 

समृद्धि केवल ढ़ेर सारा धन जमा करना नहीं है, समृद्धि का अर्थ है जीवन की भव्यता को मान्यता देना, जीवन का सम्मान करना। व्यक्ति का सच्चा धन उसका मनोबल है। धन का जीवन में होने का प्रयोजन क्या है? यही कि उससे आपका मनोबल बढ़े। जिस धन से मनोबल नहीं बढ़ सकता, वह धन ही क्या? जिस धन से बीमारी आये, तो वह धन ही क्या? जिस धन से विवाद बढ़े , वो धन ही क्या? "राधे राधे"

 
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