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कुंभ के दौरान गंगा स्नान का क्या महत्व हैं?

इस बारे में आपका क्या द्रष्टिकोण है?

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2783 days 16 hrs 40 mins ago By Gulshan Piplani
 

मात्र भावों का खेल है| प्रतिदिन लोगों को सता कर,लूट कर, दुःख पहुंचा कर, मर्डर कर के, अनपयुक्त वाणी बोल कर, इत्यादि कार्य कर के कुम्भ के दोरान गंगा जा कर नहा लें सब पाप भस्म हो जायेंगे क्या? हाँ कुम्भ के दोरान अपने पापों का पश्चाताप करके गंगा सनान करना और पुन: वोह गलती न करने का स्वम से वादा करना जरूर महत्वपूर्ण दिखाई देता है|

2785 days 18 hrs 2 mins ago By Vipin Sharma
 

KOI MAHATVA NAHI H.

2786 days 11 hrs 12 mins ago By Gulshan Piplani
 

कबीर ने कहा कहा था पाथर पूजे हरि मिलें तो मैं पूजूं पहाड़ घर की चक्की न पुजे जिस पिस खाए संसार मैं यहाँ कहना चाहूँगा गंगा पूजें हरि मिले तो मैं पूजूं समुन्द्र| फैक्ट्री कारें न पुजें जो निमित बना समुन्द्र|| अर्थात पोलुशन से धुआं बनता है धुआं अपने में सूरज द्वारा पानी को उपर भेजता है और पानी बादल में समां जाते हैं, बादल के टकराने से पानी बरसता है और पानी नदियों में गिरता है और नदियाँ समुन्द्र में समां जाती हैं और नदियाँ समुन्द्र में गिरती हैं पर कारण फक्ट्रियां और कारें होती हैं|

2786 days 15 hrs 54 mins ago By Aditya Bansal
 

The first written evidence of the Kumbha Mela can be found in the accounts of Chinese traveler, Huan Tsang or Xuanzang (602 - 664 A.D.) who visited India in 629 -645 CE, during the reign of King Harshavardhana. However, the observance dates back many centuries to ancient India's Vedic period, where the river festivals first started getting organised. In Hindu mythology, its origin is found in one of the popular creation myths, the Samudra manthan episode (Churning of the ocean of milk), mentioned in the Bhagavata Purana, Vishnu Purana, the Mahabharata, and the Ramayana. The account goes that the Gods had lost their strength, and to regain it, they thought of churning the Ksheera Sagara (primordial ocean of milk) for amrita (the nectar of immortality). This required them to make a temporary agreement with their arch enemies, the demons or Asuras, to work together with a promise of sharing the nectar equally thereafter. However, when the Kumbha (urn) containing the amrita appeared, a fight ensued. For twelve days and twelve nights (equivalent to twelve human years) the gods and demons fought in the sky for the pot of amrita. It is believed that during the battle, Lord Vishnu flew away with the Kumbha of elixir spilling drops of amrita at four places: Prayag, Haridwar, Ujjain and Nashik.

2787 days 12 hrs 30 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... मन के पवित्र होने पर तन स्वतः ही पवित्र हो जाता है लेकिन तन के पवित्र होने पर मन कभी पवित्र नहीं होता है।.... गंगा में पवित्र भावना से स्नान करने से तन के पाप मिटते हैं, मन के पाप नहीं मिटते हैं।.... मन के पाप सत्संग (संतो का संग) करने से मिटते हैं।.... कुंभ के दौरान गंगा स्नान करने से संतो का भी संग प्राप्त होता है, जिससे तन और मन दोनों ही पवित्र हो जाते हैं।

2788 days 14 hrs 55 mins ago By Silky Verma
 

जैसे तीरथ सबको पवित्र करता है वैसे ही साधू गंगा को पवित्र करते हैं। गंगा चेतन्यमयी और ब्रह्म रूप है। यहाँ स्नान करते ही तुम नया और ताज़ा महसूस करते हो। मन की सारी अशुद्धता धुल जाती है और मन स्वस्थ बनता है। पर कानपुर और उसके आगे के गंगा के हिस्से के लिए मैं ऐसा नहीं कहूँगा। गंगा के जल को शुद्ध रखने की आवश्यकता है।

2788 days 15 hrs 40 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

कुम्भ में स्नान क्या गंगा में तो कभी भी स्नान करो हमेशा ही लाभकारी है | पर सबको लाभ अलग अलग होते हैं जो जिस भाव से स्नान करता है गंगा माँ उसको वैसा ही फल देती हैं हाँ जो अपने पापों का प्रायश्चित करके गंगा में स्नान करता है गंगा माँ उसका मन जरूर निर्मल कर देती हैं | विशेष पर्व पर स्नान का महत्व का जरूर है पर असली महत्व तो सिर्फ भाव का है | पर्व पर एक साथ इतने संतो के दर्शन और सारा माहोल ही भक्ति मय हो जाता है इसलिए मन उसी भाव में सरोवोर होकर जब स्नान करता है तो निश्चित ही पापो का क्षय होता है | राधे राधे

2788 days 19 hrs 51 mins ago By Bhakti Rathore
 

jai shree radhe radhe kyunki kumbh ke sanana me saare devi devta aata he us jal me sanana kerne.aur wase bhi gnaga ji se to wase he saare papa dhul jaate he ek baar snana se

2789 days 2 hrs 34 mins ago By Manish Nema
 

तीरथ सबको पवित्र करते है,गंगा चेतन्यमयी और ब्रह्म रूप है। यहाँ स्नान करते ही हमें नया और ताज़ा महसूस होता है । मन की सारी अशुद्धता धुल जाती है और मन स्वस्थ बनता है। "राधे राधे"

 
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