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  2145 days 4 hrs 30 mins ago By Ravi Kant Sharma
 असफलता को सफलता में कैसे परिवर्तित कर सकते हैं?
जय श्री कृष्णा.... व्यक्ति स्वयं के विचारों से ही असफलता को सफलता में परिवर्तित कर सकता है।
   
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  2145 days 4 hrs 33 mins ago By Ravi Kant Sharma
 आध्यात्म की लगन को जैसे जागृत रखें?
जय श्री कृष्णा.... स्वयं के विचारों को जानने की प्रक्रिया को आध्यात्म कहते हैं।..... निरन्तर स्वयं के विचारों को जानने वाले व्यक्ति में ही आध्यात्म की लगन जागृत रहती है।
   
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  2145 days 4 hrs 40 mins ago By Ravi Kant Sharma
 हम अधिक अनुशासित कैसे बने?
जय श्री कृष्णा.... जिस प्रकार राष्ट्र के नियमों (देश का कानून) का पालन करने वाला व्यक्ति अनुशासित होता है उसी प्रकार प्रकृति के नियमों का पालन करने वाला व्यक्ति अनुशासित होता है।..... यानि शास्त्र विधि के अनुसार अपने कर्तव्य कर्मो का पालन करने वाला व्यक्ति ही अनुशासित होता है।
   
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  2145 days 4 hrs 51 mins ago By Ravi Kant Sharma
 पूजा का महत्त्व बताएं?
जय श्री कृष्णा.... (पूजा = पूर्ण+जाना) कर्म की विशेष विधि पूजा कहलाती है।...... पूर्ण की ओर ले जाने वाली मन की प्रत्येक क्रिया को पूजा कहते हैं।.... पूर्ण एक मात्र भगवान हैं।..... (पूजा कर्म नहीं होती हैं, बल्कि कर्म को उस विधि से करना चाहिये कि प्रत्येक कर्म पूजा बन जाये।)
   
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  2145 days 14 hrs 27 mins ago By Ravi Kant Sharma
 अंधविशवासी होने का अर्थ बताएं?
जय श्री कृष्णा.... विश्वास और अविश्वास नाम के ही शब्द होते है, अविश्वासी स्वभाव वाले व्यक्ति, विश्वासी स्वभाव वाले व्यक्ति के लिये अंधविश्वास नाम के शब्द का प्रयोग करते हैं।..... जबकि अविश्वासी स्वभाव वाले व्यक्ति ही वास्तव में विश्वास के अंधे होते हैं।
   
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  2145 days 15 hrs 9 mins ago By Ravi Kant Sharma
 सत चित आनंद का अर्थ बताएं?
जय श्री कृष्णा.... "आत्मा" ही एक मात्र सत्य है, जीव के मन में उत्पन्न विचारों का संग्रह केन्द्र "चित्त" होता है, "आनन्द" स्वरूप भगवान स्वयं है।..... (जब व्यक्ति स्वयं को अकर्ता और "आत्मा" को ही कर्ता रूप में दृष्टा भाव से देखने लगता है, तब व्यक्ति के "चित्त" में सात्विक विचारों का संग्रह होने लगता है, और जब व्यक्ति के चित्त में से समस्त तामसी और राजसी विचार मिटकर केवल सात्विक विचार ही शेष रह जाते है, तब व्यक्ति के हृदय में "आनन्द" स्वरूप भगवान स्वयं प्रकट हो जाते है।)
   
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  2145 days 19 hrs 59 mins ago By Kiran Kejriwal
 सत चित आनंद का अर्थ बताएं?
sat chit anand shree krisna ha krisna ma sampyrn chit laga lange to humko sacha anand mil sakta ha radhey radhey
   
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  2145 days 20 hrs 2 mins ago By Kiran Kejriwal
 सत चित आनंद का अर्थ बताएं?
sat chit anand shree krisna ha krisna ma sampurn chit laga lange to humko sacha anand mil sakta ha radhey radhey
   
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  2147 days 12 hrs 26 mins ago By Kiran Kejriwal
 संस्कार क्या है ?
sanskar hi sub kuch hote ha ache sanskar hi insan ka caritr ka nirman karte ha radhey radhey
   
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  2147 days 12 hrs 30 mins ago By Kiran Kejriwal
 असफलता को सफलता में कैसे परिवर्तित कर सकते हैं?
bhagwan jo kar rahe ha acha hi karenge sub uske upper chod denge to kahi bhi asafalta lagegi hi nahi radhey radhey
   
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  2148 days 19 hrs 21 mins ago By Waste Sam
 असफलता को सफलता में कैसे परिवर्तित कर सकते हैं?
राधे राधे, असफलता को भी भगवान् के प्रसाद रूप में देखने से असफलता भी सफलता में परिवर्तित हो जाती है | जय श्री राधे
   
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  2148 days 19 hrs 23 mins ago By Waste Sam
 संकल्प शक्ति को कैसे बढ़ायें?
राधे राधे, संकल्प शक्ति बढाने के लिए हमे अपने अंदर सात्त्विक शक्ति बढानी चाहिए जिससे संकल्प शक्ति बढती है | जय श्री राधे
   
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  2148 days 19 hrs 25 mins ago By Waste Sam
 नकारक विचारों को कैसे टाला जाये?
राधे राधे, नकारात्मक विचारो से बचने के लिए हमे भगवान् की भक्ति करनी चाहिए | जय श्री राधे
   
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  2148 days 19 hrs 28 mins ago By Waste Sam
 हम मोक्ष कैसे प्राप्त कर सकते हैं?
राधे राधे, हम यदि राग द्वेष से खुद को मुक्त कर ले तो ये ही स्तिथि मोक्ष है | जय श्री राधे
   
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  2148 days 19 hrs 29 mins ago By Waste Sam
 आध्यात्म की लगन को जैसे जागृत रखें?
राधे राधे, अध्यात्म की लगन जागृत करने के लिए हमे भगवान् से प्रेम करना आवश्यक है | जय श्री राधे
   
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  2148 days 19 hrs 31 mins ago By Waste Sam
 प्रसाद का वैज्ञानिक महत्व बताएं?
राधे राधे, प्रसाद भगवान को लगाया हुआ भोग है जो समर्पण का प्रतीक है इससे हमारे अंदर समर्पण जागृत करता है | जय श्री राधे
   
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  2148 days 19 hrs 34 mins ago By Waste Sam
 मनुष्य होने के नाते क्या सबसे आवश्यक है?
राधे राधे, मनुष्य होने के नाते सबसे आवश्यक है इंसानियत, दूसरे के दुःख से दुखी होना, दूसरो के सुख से ख़ुशी का अनुभव करे बस ये ही सबसे जरूरी है | जय श्री राधे
   
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  2148 days 19 hrs 38 mins ago By Waste Sam
 इच्छा कहाँ से आती है?
राधे राधे, इच्छा हमारे स्वार्थ से आती है | जय श्री राधे
   
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  2150 days 15 hrs 18 mins ago By Kiran Kejriwal
 संकल्प शक्ति को कैसे बढ़ायें?
dire dhre iswar ki bhakti me dridh viswas karte jay to sankalp sakti badh sakti ha jai shree krisna
   
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  2151 days 3 hrs 31 mins ago By Ravi Kant Sharma
 संकल्प शक्ति को कैसे बढ़ायें?
जय श्री कृष्णा.... चित्त की स्थिरता से ही संकल्प पर दृड़ रहने की शक्ति का विकास संभव हो पाता है।
   
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  2151 days 23 hrs 18 mins ago By Kiran Kejriwal
 नकारक विचारों को कैसे टाला जाये?
always positive thinkig hone se negative thinking nahi aati ha radhey radhey
   
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  2151 days 23 hrs 19 mins ago By Kiran Kejriwal
 नकारक विचारों को कैसे टाला जाये?
always positive thinkig hone se negative thinking nahi aati ha radhey radhey
   
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  2152 days 2 hrs 8 mins ago By Ravi Kant Sharma
 नकारक विचारों को कैसे टाला जाये?
जय श्री कृष्णा.... सकारक विचारों से नकारक विचार स्वतः ही मिटने लगते हैं।
   
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  2152 days 15 hrs 7 mins ago By Kiran Kejriwal
 हम मोक्ष कैसे प्राप्त कर सकते हैं?
bina kisi asakti ke nirantar prabhu nam smarn se ant samay hame prabhu hi dikhege to moksh prapt ho sakta ha radhey radhey
   
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  2152 days 15 hrs 12 mins ago By Kiran Kejriwal
 प्रसाद का वैज्ञानिक महत्व बताएं?
bhagwan jab bhog lag late ha to prased ho jata ha prabhu bhog lagaya hua prasad amrit tulya ho jata ha radhey radhey
   
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  2153 days 2 hrs 29 mins ago By Ravi Kant Sharma
 मनुष्य होने के नाते क्या सबसे आवश्यक है?
जय श्री कृष्णा.... मनुष्य की सर्वोच्च आवश्यकता आनन्द स्वरूप परमसत्ता को प्राप्त करना है।
   
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  2153 days 2 hrs 33 mins ago By Ravi Kant Sharma
 चलायमान मन के विचारों से कैसे मुक्त हुआ जाये?
जय श्री कृष्णा.... चलायमान मन नहीं होता है, कामनाओं के कारण बुद्धि मन को चलायमान करती है।..... कामनाओं के त्याग होने पर ही मन के विचारों से मुक्त होना संभव है।
   
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  2153 days 2 hrs 37 mins ago By Ravi Kant Sharma
 आत्मज्ञान हमे कैसे हो सकता हैं?
जय श्री कृष्णा.... सभी जीवों के शरीर में आत्मा का वास है यही आत्मज्ञान है, यह आत्मज्ञान सभी मनुष्यों को प्राप्त है, कामनाओं के कारण जीव को आत्मज्ञान विस्मृत रहता है।..... प्रभु कृपा से ही जीव को आत्म ज्ञान की स्मृति संभव है।
   
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  2153 days 2 hrs 45 mins ago By Ravi Kant Sharma
 इच्छा कहाँ से आती है?
जय श्री कृष्णा.... जीव की पूर्व जन्म की कामनायें ही इच्छा के रूप में भगवान के द्वारा मन में प्रकट की जाती हैं।.... इच्छायें सदैव पूर्ण होती हैं।
   
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  2153 days 2 hrs 50 mins ago By Ravi Kant Sharma
 कैसे जाने कि हम जीवन के उद्देश्य को पूरा कर रहे है
जय श्री कृष्णा.... मनुष्य जीवन का एकमात्र उद्देश्य भगवान की शरणागति प्राप्त करने के लिये कर्म करना है।..... जिस व्यक्ति को भगवान की शरणागति प्राप्त हो जाती है, उसी व्यक्ति के जीवन का उद्देश्य पूर्ण हो पाता है।..... अधिकांशतः व्यक्ति अज्ञानतावश भौतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिये ही कर्म करते हुये अपने बहुमूल्य जीवन को नष्ट कर रहें हैं।..... सत्संग द्वारा जिस व्यक्ति का विवेक जागृत हो गया है वही जीवन के उद्देश्य की पूर्णता की ओर अग्रसर होता है।
   
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  2153 days 3 hrs 5 mins ago By Ravi Kant Sharma
 कृष्ण अवतार पूर्ण अवतार क्यों है
जय श्री कृष्णा.... कृष्णस्तु भगवान् स्वयं।..... श्रीकृष्ण मात्र अवतार नहीं, अपितु साक्षात् भगवान् (परमेश्वर) ही हैं।..... ईश्वर: परम: कृष्ण: सच्चिदानन्दविग्रह:। अनादिरादिर्गोविन्द:सर्वकारणकारणम्॥...... सत्, चित् और आनंद के विग्रह श्रीकृष्ण ही परमेश्वर हैं। समस्त इन्द्रियों के स्वामी आदि और अन्त से रहित, समस्त कारणों के मूल कारण हैं।.... इसीलिये भगवान श्री कृष्ण पूर्ण पुरुषोत्तम हैं।
   
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  2153 days 3 hrs 16 mins ago By Ravi Kant Sharma
 हम मोक्ष कैसे प्राप्त कर सकते हैं?
जय श्री कृष्णा.... फल की कामना से रहित होकर कर्तव्य-कर्म करने से मोक्ष की प्राप्ति शीघ्र हो जाती है।
   
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  2153 days 13 hrs 18 mins ago By Dasi Radhika
 प्रसाद का वैज्ञानिक महत्व बताएं?
प्रसाद अर्थात कृपा। परमात्मा की कृपा स्वतः बरसती है- कुछ भी नेक काम करने पर,परमात्मा का प्रसाद अर्थात कृपा तो अकारण ही होती है।। मानव की पूजा, प्रार्थना, ध्यान, सुमरिन, भजन कीर्तन आदि से जो फल प्राप्त होता है वो उस परमात्मा की कृपा से ही मिलता है। परमात्मा की कृपा बरसती है अगर पूजा-प्रार्थना व ध्यान सुमरिन अंतस से हो तॊ। जय श्री राम!
   
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  2155 days 19 hrs 40 mins ago By Kiran Kejriwal
 मनुष्य होने के नाते क्या सबसे आवश्यक है?
manusya janm bahut durlabh ha isko pane ki risi muni bhi kamna karte ha is janam ma humko bhagwt bhakti ache sad juru ki kripa pakar bhav sagar se mukt hokar janm mrutua se picha chura kar parmdham ma vass ka rasta dundhna chahiya radhey radhry
   
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  2156 days 17 hrs 55 mins ago By Kiran Kejriwal
 इच्छा कहाँ से आती है?
ikcha man se aati ha iksha ka koi ant bhi nahi ha ikcha ko niyantran karke man per kaboo pakar humko bhakti marg per jana chahiya jisne ikcha per niyantran kiya usne sab per niyantran kar liya radhey radhey
   
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  2157 days 14 hrs 36 mins ago By Waste Sam
 भगवान से अपनी प्रार्थना का उत्तर कैसे पा सकते हैं?
राधे राधे, भगवान् से हम अपनी प्रार्थना का उत्तर पाने के लिए हमे अपना भगवान् से जोड़ना पड़ता है | जय श्री राधे
   
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  2157 days 14 hrs 52 mins ago By Waste Sam
 हम अपने पथ पर सशक्त और प्रतिबद्ध कैसे हो सकते है?
राधे राधे, अपने पथ पर सशक्त और प्रतिबद्ध रहने के लिए हमे अपने मन को सत्संग का रस पान सदा करते रहना चाहिए | जय श्री राधे
   
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  2157 days 14 hrs 58 mins ago By Kiran Kejriwal
 भगवान से अपनी प्रार्थना का उत्तर कैसे पा सकते हैं?
bhagwan antaryami ha kan kan ma niwasha agar jarorat samjhenge to humko jab uttar cahiya to swayam hamko anuhw kara denge radhey radhey
   
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  2157 days 15 hrs 1 mins ago By Waste Sam
 कोई हमेशा प्रतिबद्ध कैसे रह सकता है?
राधे राधे, सदा प्रतिबद्ध रहने के लिए हमे अपना मन को भगवान् के सिमरन में लगा देना चाहिए | जय श्री राधे
   
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  2157 days 15 hrs 10 mins ago By Waste Sam
 आत्मज्ञान हमे कैसे हो सकता हैं?
राधे राधे, आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए भगवद गीता हमारा मार्गदर्शन करती है, भगवद गीता के अनुसार हमे किसी समर्थ गुरु की शरण में जा कर हमे आत्मज्ञान के विषय में ज्ञान प्राप्त करना चाहिए, क्योंकि गुरु भगवान् का ही रूप होता है | जय श्री राधे
   
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  2157 days 17 hrs 16 mins ago By Kiran Kejriwal
 भगवान से अपनी प्रार्थना का उत्तर कैसे पा सकते हैं?
bhagwan antaryami ha kan kan ma niwas ha agar jarorat samjhenge to humko jab uttar cahiya to swayam hamko anbhw kara denge
   
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  2159 days 18 hrs 41 mins ago By Kiran Kejriwal
 कृष्ण अवतार पूर्ण अवतार क्यों है
bhagwan shree krisan 16teen kala yukt ha ya avtar nahi swayam awtari ha isliya purn avtar ha radhey radhey
   
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  2160 days 32 mins ago By Nidhi Nema
 विनम्रता और शांति के पथ पर कैसे चला जाये?
राधे राधे,विनम्रता और शान्ति दोनों जीवन में तक आते है जब हम जीवन में नि स्वार्थ हो जाये क्योकि व्यक्ति जब तक किसी स्वार्थवश कोई काम करता है तो जीवन में शान्ति तो आ ही नहीं सकती और स्वार्थ पुन नहीं होता तो विनम्रता भी नहीं आती.दोनों को जीवन में लाने के लिए एक ही रास्ता है "सेवा",किसी कि भी कैसे भी बड़ी या छोटी,"निस्वार्थ सेवा"
   
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  2160 days 36 mins ago By Nidhi Nema
 चलायमान मन के विचारों से कैसे मुक्त हुआ जाये?
राधे राधे,मन कोई दर्पण नहीं है जिसमे अच्छे बुरे विचारों कि धूल जमती रहे और उसे हम हमेशा साफ करते रहे क्योकि मन में हमेशा विचार आते ही रहेगे,हमें बस इतना करना है कि मन में आये विचारों के रुख को परमात्मा कि तरफ मोड़ देना है.और वह होता है सत्संग से.
   
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  2160 days 41 mins ago By Nidhi Nema
 आत्मज्ञान हमे कैसे हो सकता हैं?
राधे राधे,आत्मज्ञान के एक ही रास्ता है वह है गुरुकृपा,जिस व्यक्ति पर गुरु कृपा कर दे तो उस पर ईश्वर कि कृपा अपने आप हो जाती है,ओर जब ईश्वर में आते है तो व्यक्ति बहीमुखी से अन्तःमुखी हो जाता है.ओर अन्तःमुखी होने पर आत्म ज्ञान अपने आप हो जाता है.
   
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  2160 days 46 mins ago By Nidhi Nema
 कृष्ण अवतार पूर्ण अवतार क्यों है
राधे राधे,जब-जब भगवान अवतार लेते है तो उनका अवतार अपने भक्तो के लिए ही होता है.जब राम अवतार हुआ तो जब अयोध्या की गोपिया मिथिला की सखिया,वन की सखिया जब प्रभु श्री राम को देखा करती थी तो उनके मन में प्रभु को पति रूप में पाने की इच्छा थी,पर रामा अवतार तो मर्यादा का अवतार था इसलिए श्रीरामने उनके मन की बात जानकर उनको वचन दिया,कि जब मेरा अगला अवतार होगा तो में तुम सब कि इच्छा पुरी करूँगा,यदि कृष्ण रूप में भी वे पूर्ण अवतारी के रूप में नहीं आते तो सखियों कि इच्छा कैसे पुरी होती.इसलिए कृष्ण पूर्ण अवतार है.
   
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  2161 days 1 hrs 51 mins ago By Astro Kaushal Pandey
 संसार में इतना दुःख क्यों है ?
radhe radhe
   
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  2162 days 4 mins ago By Dilip Makwe
 आत्मज्ञान हमे कैसे हो सकता हैं?
By Spirituality because Spirituality begins where religion ends.The soul is the traveller on its way back home. The journey is the life we adopt on the way home. It is life itself. The vehicle is the body in which the soul travels through life. Our spiritual goal is to achieve that original condition and the spiritual path is the way we travel to reach that goal.Spiritual journey is an inner journey. If widely practiced, spirituality is perhaps the most potent force for bringing about human integration.
   
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  2162 days 19 hrs 20 mins ago By Kiran Kejriwal
 कैसे जाने कि हम जीवन के उद्देश्य को पूरा कर रहे है
hum jeene ka udashya pur kar rahe ya nahi ya to guru hi bata sakta ha kuki marg darshk guru haa radhey radhey
   
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  2162 days 19 hrs 21 mins ago By Kiran Kejriwal
 कैसे जाने कि हम जीवन के उद्देश्य को पूरा कर रहे है
hum jeene ka udashya pur kar rahe ya nahi ya to guru hi bata sakta ha kuki marg darshk guru haa
   
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  2162 days 19 hrs 35 mins ago By Waste Sam
 कैसे जाने कि हम जीवन के उद्देश्य को पूरा कर रहे है
राधे राधे, जीवन का उद्देश्य है भगवान् की प्राप्ति और हम इस लक्ष्य की ओर बढ रहे है इसको जानने के लिए हमे यह देखना चाहिए की क्या हमारी भक्ति रोज़ बढ रही है या नहीं | जय श्री राधे
   
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  2162 days 19 hrs 45 mins ago By Waste Sam
 चलायमान मन के विचारों से कैसे मुक्त हुआ जाये?
राधे राधे,मन के चलायमान विचारो से मुक्त होना तभी संभव है जब इस मन को हम भगवान् के चरणों में लगा दे | जय श्री राधे
   
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  2162 days 19 hrs 46 mins ago By Waste Sam
 चलायमान मन के विचारों से कैसे मुक्त हुआ जाये?
राधे राधे,मन के चलायमान विचारो से मुक्त होना तभी संभव है जब इस मन को हम भगवान् के चरणों में लगा दे | जय श्री राधे
   
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  2162 days 19 hrs 47 mins ago By Waste Sam
 चलायमान मन के विचारों से कैसे मुक्त हुआ जाये?
राधे राधे,मन के चलायमान विचारो से मुक्त होना तभी संभव है जब इस मन को हम भगवान् के चरणों में लगा दे | जय श्री राधे
   
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  2162 days 19 hrs 50 mins ago By Waste Sam
 विनम्रता और शांति के पथ पर कैसे चला जाये?
राधे राधे, विनम्रता और शांति के पथ पर चलना तभी आसन हो पाता है जब हम मन से शांत रहे और मन को शांत करने की क्षमता भगवान् के भक्ति में है | जय श्री राधे
   
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  2163 days 18 hrs 25 mins ago By Kiran Kejriwal
 चलायमान मन के विचारों से कैसे मुक्त हुआ जाये?
prabhu satat nam jap se chalyman vichar se mukti milti ha
   
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  2163 days 20 hrs 55 mins ago By Waste Sam
 जीने का उद्देश्य कैसे ढूँढा जा सकता है?
राधे राधे, जीने का उद्देश्य केवल एक है मोक्ष प्राप्ति या भगवान् की भक्ति प्राप्त करना और इस उद्देश्य को ढूंढना तभी संभव होता है जब गुरु की कृपा हो या भगवान् की कृपा हो जाये | जय श्री राधे
   
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  2163 days 21 hrs 5 mins ago By Waste Sam
 जीवन में भीतरी संतुष्टि के लिये सेवा कैसे सहायक है
राधे राधे, हर व्यक्ति के अंदर वही एक परमात्मा बैठे हुए है इस तरह से सोचे तो किसी भी व्यक्ति की सेवा उस प्रभु की ही सेवा | इस तरह से सेवा हमे भगवान् के पास ले जाने में सहायक होती है, और भगवान् का सामीप्य सदा हम संतोष देता है | जय श्री राधे
   
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  2165 days 22 hrs 31 mins ago By Kiran Kejriwal
 जीने का उद्देश्य कैसे ढूँढा जा सकता है?
bhagwan ki bhakti se udyash pat chlta ki hamara jeene ka udyash bhagwat prapti ha sansar ke sab ristay jhote ha radhey radhey
   
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  2166 days 2 hrs 32 mins ago By Ravi Kant Sharma
 नकारात्मक विचारों के प्रवाह को कैसे रोक सकते हैं?
जय श्री कृष्णा.... सकारात्मक विचारों से नकारात्मक विचारों का प्रवाह स्वतः रुकने लगता है।
   
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  2166 days 2 hrs 35 mins ago By Ravi Kant Sharma
 हम अपने मन की रक्षा कैसे करें?
जय श्री कृष्णा.... मन की सुरक्षा प्रभु चरणों में ही संभव होती है।
   
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  2166 days 2 hrs 40 mins ago By Ravi Kant Sharma
  हम स्वयं को ईश्वर के पास कैसे ला सकते हैं?
जय श्री कृष्णा.... ईश्वर सर्वज्ञ व्याप्त है, ईश्वर की सर्व व्यापकता के ज्ञान की आवश्यकता है, ज्ञान दृष्टि से देखने पर ही अनुभव होगा कि ईश्वर जितना पास अन्य कुछ नहीं है।
   
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  2166 days 2 hrs 49 mins ago By Ravi Kant Sharma
  इच्छाओं पर नियंत्रन कैसे करें?
जय श्री कृष्णा.... इच्छाओं को नियंत्रण करने के लिये मन में संतुष्टि का भाव उत्पन्न करना होगा।...... संतुष्टि का भाव उत्पन्न होने पर इच्छायें स्वतः नियन्त्रित हो जाती हैं।..... इच्छाओं के नियंत्रित होने पर सभी इन्द्रियाँ स्वतः नियंत्रित हो जाती हैं।
   
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  2166 days 2 hrs 55 mins ago By Ravi Kant Sharma
 जीवन में भीतरी संतुष्टि के लिये सेवा कैसे सहायक है
जय श्री कृष्णा.... अपना कर्तव्य समझकर कर्म करना ही वास्तविक सेवा होती है, सेवा से ही आन्तरिक संतुष्टि का अनुभव संभव होता है।
   
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  2166 days 3 hrs 1 mins ago By Ravi Kant Sharma
 जीने का उद्देश्य कैसे ढूँढा जा सकता है?
जय श्री कृष्णा.... जीवन के उद्देश्य को ढूँढना नही पड़ता है, जीवन के उद्देश्य को निरन्तर याद रखने की आवश्यकता होती है।....... ईश्वर प्राप्ति ही सभी मनुष्यों के जीवन का एक मात्र उद्देश्य होता है।..... इस उद्देश्य की प्राप्ति वर्ण और वर्णाश्रम के अनुसार निष्काम भाव से कर्म करने से होती है।
   
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  2167 days 11 hrs 20 mins ago By Kiran Kejriwal
 जीवन में भीतरी संतुष्टि के लिये सेवा कैसे सहायक है
kisi jaruratmandki agar hum bina koi swarth ke seva karne se atm santusti milti ha radhey radhey
   
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  2167 days 11 hrs 20 mins ago By Kiran Kejriwal
 जीवन में भीतरी संतुष्टि के लिये सेवा कैसे सहायक है
kisi jaruratmandki agar hum bina koi swarth ke seva karne se atm santusti milti ha radhey radhey
   
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  2167 days 11 hrs 22 mins ago By Kiran Kejriwal
 जीवन में भीतरी संतुष्टि के लिये सेवा कैसे सहायक है
prabhuki sava niskam bhav sekarne per bhitari santusti milti ha radhey radhey
   
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  2167 days 11 hrs 31 mins ago By Kiran Kejriwal
 हम जीवन में ही मोक्ष कैसे पा सकते है?
kalug ma bhagean ka satat sankirtan se moksh millta ha radhey radhey
   
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  2167 days 14 hrs 21 mins ago By Waste Sam
  इच्छाओं पर नियंत्रन कैसे करें?
राधे राधे, इच्छायो पर नियंत्रण पाने के लिए हमे अपने ह्रदय और इन्द्रियों पर नियंत्रण पाना सीखना होगा | जय श्री राधे
   
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  2167 days 14 hrs 21 mins ago By Waste Sam
  हम स्वयं को ईश्वर के पास कैसे ला सकते हैं?
राधे राधे, हम भगवान् के पास तब आ सकते है जब उस भगवान् की हम पर कृपा हो जाये नहीं तो कौन भगवान् को पा सकने में समर्थ है | भगवान् के ही अंश अवतार होते है गुरु, गुरु की कृपा से भी हम भगवान् के निकट जा सकते है | जय श्री राधे
   
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  2167 days 14 hrs 23 mins ago By Waste Sam
 हम अपने मन की रक्षा कैसे करें?
राधे राधे, अपने मन की रक्षा हम केवल गुरु के आशीर्वाद और भगवान् की भक्ति से ही कर सकते है | जय श्री राधे
   
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  2167 days 14 hrs 27 mins ago By Waste Sam
 नकारात्मक विचारों के प्रवाह को कैसे रोक सकते हैं?
राधे राधे, नकारात्मक विचार आते है हमारी अति इच्छाओ के कारण तो अगर हम अपने मन को काबू में कर ले तो नकारात्मक विचारो से भी अपना पीछा छुडा सकते है | जय श्री राधे
   
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  2167 days 14 hrs 29 mins ago By Waste Sam
 हम हर अवस्था में कैसे मुस्कुरा सकते हैं?
राधे राधे, हर अवस्था में मुस्कुराने के लिए हमे सदा हर परस्थिति को भगवान् का प्रसाद समझ कर जीना शुरू कर दे | जय श्री राधे
   
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  2167 days 14 hrs 31 mins ago By Waste Sam
 हम जीवन में ही मोक्ष कैसे पा सकते है?
राधे राधे, जीवन में मोक्ष पाने के लिए हमे अपने अंदर का राग द्वेष खत्म कर देना चाहिए, बस ये ही मोक्ष है | जय श्री राधे
   
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  2167 days 14 hrs 31 mins ago By Waste Sam
 परमात्मा कब अपने भक्त की ओर स्वयं कदम बढा लेते है?
राधे राधे, परमात्मा अपने भक्त की तरफ कदम तब बढ़ाते जब भक्त भगवान् की ओर कदम बढाता है | जय श्री राधे
   
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  2167 days 14 hrs 32 mins ago By Waste Sam
 परमात्मा कब अपने भक्त की ओर स्वयं कदम बढा लेते है?
राधे राधे, परमात्मा अपने भक्त की तरफ कदम तब बढ़ाते जब भक्त भगवान् की ओर कदम बढाता है | जय श्री राधे
   
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  2167 days 14 hrs 37 mins ago By Waste Sam
 परमात्मा से भेट कब हो सकती हैं?
राधे राधे, परमात्मा हमारे अंदर है, हम उसी भगवान् के अंश है इसलिए उनसे भेंट करने के लिए हमे सिर्फ अपने अंदर देखने के ज़रुरत है | भगवान् से मिलना सबसे आसान है क्योंकि वो हमारे सबसे करीब है | जय श्री राधे
   
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  2167 days 17 hrs 40 mins ago By Kiran Kejriwal
  इच्छाओं पर नियंत्रन कैसे करें?
iswar ki bhaki se ikchao per niyantran hoga hum bhakti me itna dub jai humko har chees ma iswar hi deka meera bai ; mane to mharo sawario suwahy dugo to mhane day koni aee tab koi ikcha apne aap nahi rahegi radhey radhey
   
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  2170 days 20 hrs ago By Kiran Kejriwal
 नकारात्मक विचारों के प्रवाह को कैसे रोक सकते हैं?
radhey radhey har kam ko prabhu arpit samghe koi hamko bura kahe to prasaad samghe jo ho raha ha acha ha sab mere prabhu kar rahy ha har ke ma bhgwan hi dekhe to negative vichar ruk sakte ha
   
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  2171 days 17 hrs 21 mins ago By Ravi Kant Sharma
 हम हर अवस्था में कैसे मुस्कुरा सकते हैं?
जय श्री कृष्णा.... जो हुआ अच्छा हुआ, जो हो रहा है अच्छा हो रहा है और जो होगा अच्छा ही होगा।..... इस भावना में स्थित होकर निरन्तर अपने कर्तव्य-कर्म को करते रहने से हम हर अवस्था में मुस्कुरा सकते हैं।
   
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  2171 days 17 hrs 56 mins ago By Reena Jhamb
 हम हर अवस्था में कैसे मुस्कुरा सकते हैं?
jai Dukh ke din hoge to Ishwar ki sameepta khushi degi.. aur jab sukh ke din hai..toe har pal unki yad me anand hi anand.. ab hue har haal me khush..
   
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  2171 days 23 hrs 53 mins ago By Kiran Kejriwal
 हम हर अवस्था में कैसे मुस्कुरा सकते हैं?
radhey radhey jab iswar ko sab kuch man karjo bhi karenge isear ke jo ho raha ha bhagwan ki agya se to hum her awastha ma muskuryge
   
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  2171 days 23 hrs 53 mins ago By Kiran Kejriwal
 हम हर अवस्था में कैसे मुस्कुरा सकते हैं?
radhey radhey jab iswar ko sab kuch man karjo bhi karenge isear ke jo ho raha ha bhagwan ki agya se to hum her awastha ma muskuryge
   
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  2173 days 3 hrs 3 mins ago By Ravi Kant Sharma
 हम जीवन में ही मोक्ष कैसे पा सकते है?
जय श्री कृष्णा.... कर्म के द्वारा कर्म बन्धन से मुक्त होना ही मोक्ष कहलाता है।...... संस्कारों का मिटना मोक्ष कहलाता है।...... मोक्ष की प्राप्ति पूर्व जन्म के संस्कारों पर आधारित होती है।....... जब तक व्यक्ति की बुद्धि में ईश्वर प्राप्ति की कामना के साथ सांसारिक वस्तुओं की प्राप्ति की भी कामना रहती हैं तब तक संस्कारों की उत्पत्ति होती रहती है।...... जब व्यक्ति की बुद्दि में केवल ईश्वर प्राप्ति की ही कामना शेष रह जाती है तब उस व्यक्ति को शीघ्र मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।..... जिस जीवात्मा को शरीर में रहते हुए मुक्ति का अनुभव हो जाता है, उसी जीवात्मा को शरीर छूटने के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।
   
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  2173 days 23 hrs 47 mins ago By Ravi Kant Sharma
 वास्तव में दर्पण हमें जीवन की कौन सी सच्चाई बताता है?
जय श्री कृष्णा.... दर्पण हमें हमारे वास्तविक रूप की सच्चाई बताता है।...... प्रत्येक व्यक्ति का अपना मन ही एक मात्र दर्पण होता है, जो व्यक्ति अपने मन रूपी दर्पण में स्वयं को निरन्तर देखता रहता है वही व्यक्ति स्वयं के वास्तविक रूप की सच्चाई को जान पाता है।
   
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  2174 days 2 mins ago By Ravi Kant Sharma
 भक्ति के अनुभव के लिए हमे कहाँ जाना होगा?
जय श्री कृष्णा.... भक्ति के लिये कहीं जाने की आवश्यकता नहीं होती है, जब व्यक्ति मन से एक ही इष्ट पर आश्रित होकर कर्म करता है तब भक्ति स्वतः ही होने लगती है।
   
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  2174 days 33 mins ago By Ravi Kant Sharma
 परमात्मा कब अपने भक्त की ओर स्वयं कदम बढा लेते है?
जय श्री कृष्णा.... जब जीवात्मा के निष्काम कर्म के फल, सकाम कर्म के फलों से अधिक हो जाते हैं, तभी जीव पर कृपा करने के लिये भगवान के कदम स्वयं उस भक्त की ओर बढ़ जाते हैं।
   
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  2174 days 11 hrs 31 mins ago By Kiran Kejriwal
 परमात्मा कब अपने भक्त की ओर स्वयं कदम बढा लेते है?
radhey radhey bhakt agar bhagwan ki taraf ak kadam baddhata ha to bhagwan 10 kadam badhate ha
   
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  2175 days 11 mins ago By Ravi Kant Sharma
 परमात्मा से भेट कब हो सकती हैं?
जय श्री कृष्णा.... श्रद्धा के साथ परमात्मा पर निर्भर होकर निरन्तर कर्तव्य-कर्म करने से एक दिन परमात्मा से भेंट हो सकती है।..... चरेवेति चरेवेति... सतत चलना सदा चलना।
   
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  2175 days 13 hrs 16 mins ago By Waste Sam
 इच्छा और संकल्प में क्या अंतर है?
राधे राधे, इच्छा हमारी आकांशा है हमारी महत्वकांषा है परन्तु संकल्प हमारी शक्ति है | इच्छा हमे भटकती है और संकल्प हमारे लक्ष्य को प्रशस्त करते है | जय श्री राधे
   
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  2175 days 13 hrs 17 mins ago By Waste Sam
 भक्ति के अनुभव के लिए हमे कहाँ जाना होगा?
राधे राधे, भक्ति के अनुभव के लिए हमे गुरु के पास जाना होता है | जय श्री राधे
   
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  2175 days 13 hrs 17 mins ago By Waste Sam
 भक्ति के अनुभव के लिए हमे कहाँ जाना होगा?
राधे राधे, भक्ति के अनुभव के लिए हमे गुरु के पास जाना होता है | जय श्री राधे
   
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  2175 days 13 hrs 17 mins ago By Waste Sam
 इच्छा और संकल्प में क्या अंतर है?
राधे राधे, इच्छा हमारी आकांशा है हमारी महत्वकांषा है परन्तु संकल्प हमारी शक्ति है | इच्छा हमे भटकती है और संकल्प हमारे लक्ष्य को प्रशस्त करते है | जय श्री राधे
   
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  2175 days 13 hrs 17 mins ago By Waste Sam
 भक्ति के अनुभव के लिए हमे कहाँ जाना होगा?
राधे राधे, भक्ति के अनुभव के लिए हमे गुरु के पास जाना होता है | जय श्री राधे
   
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  2175 days 13 hrs 19 mins ago By Waste Sam
 वास्तव में दर्पण हमें जीवन की कौन सी सच्चाई बताता है?
राधे राधे, दर्पण हमारे व्यक्तित्व का अक्स दिखाता है, यह दर्पण हमे दिखाता है की हम दुनिया के लिए कैसे दिखते है | हम दर्पण में खुद को देख सकते है और अपने अंदर सुधार की जगहों को देख सकते है | जय श्री राधे
   
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  2175 days 13 hrs 19 mins ago By Waste Sam
 वृन्दावन के वृक्ष का मर्म कैसे जान सकते है?
राधे राधे, वृन्दावन के वृक्ष कोई वृक्ष नहीं है वो तो भगवान् के प्रेमी भक्त है | वृन्दावन के वृक्ष वो ऋषि समुदाय है जो कृष्ण प्रेम में कृष्ण की नगरी वृन्दावन में आ गए है उनके पास रहने के लिए | जय श्री राधे
   
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  2175 days 20 hrs 47 mins ago By Kiran Kejriwal
 इच्छा और संकल्प में क्या अंतर है?
ikcha hamari kuch bi ho sakti endless per sankalp to vahi ha jo hum lay latey ha to phi poora kartey ha ikcha jeewan ma kabhi poori nani hoti aur thode samay ke lita hoti ha sankalp ma dridhta hoti ha ikcha ma nahi aati ha jati ha
   
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  2176 days 22 hrs 22 mins ago By Kiran Kejriwal
 भक्ति के अनुभव के लिए हमे कहाँ जाना होगा?
bhakti ke anubhav ke liya hame prabhu sadhna dhyan her kam prabhu ka samajh kar karna hoga
   
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  2177 days 21 hrs 53 mins ago By Kiran Kejriwal
 वास्तव में दर्पण हमें जीवन की कौन सी सच्चाई बताता है?
darpan ak to hume yeh batatahe deklo itnia samay bit gaya balpan gata jawani gayi ab bridhaawasth aaagai ab to prabhu ko sumarkar apna jiwan sudhar lo
   
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  2178 days 23 hrs 57 mins ago By Kiran Kejriwal
 वृन्दावन के वृक्ष का मर्म कैसे जान सकते है?
vrindadavan ka ak ak vriksh bade bade rishi muni ha unka marm janna to bahoot muskil ha har dal aur pate per radhey radhey krisn krisn ha
   
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  2179 days 12 hrs 56 mins ago By Waste Sam
 हम कार्य और आराम में संतुलन कैसे लाये?
राधे राधे, कार्य और आराम में संतुलन बनाने के लिए हम काम को भी पूजा बना ले तो संतुलन अपने आप बन जाता है | जय श्री राधे
   
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  2179 days 13 hrs 4 mins ago By Waste Sam
 हम अधिक रचनात्मक और कल्पनाशील कैसे बनें?
राधे राधे, रचनात्मक और कल्पनाशील बनाने के लिए हमे बस भगवान् की बनाई दुनिया को देखना चाहिए और वहीँ से हम अपनी रचनात्मक शक्ति और कल्पनाशीलता को बढा सकते है | जय श्री राधे
   
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  2179 days 14 hrs ago By Manish Nema
 हम कार्य और आराम में संतुलन कैसे लाये?
प्रकृति में इस तरह का संतुलन है| गर्मियों में दिन बड़े होतें हैं और सर्दियों में रातें बड़ी होती हैं| इस प्रकार प्रकृति किसी तरह से संतुलन बनाये रखती है| एक स्थान पर ठण्ड होगी तो दूसरी किसी जगह गर्मी होगी| इस तरह गर्मी और सर्दी,रात और दिन, प्रकृति में संतुलन लातें हैं| और ये बहुत से तरीकों से आप को बतातें हैं कि आपको कार्य और आराम में संतुलन लाना है|
   
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  2180 days 19 hrs 7 mins ago By Kiran Kejriwal
 हम अधिक रचनात्मक और कल्पनाशील कैसे बनें?
bhagwan na jo shristi banai ha woh kitni sundar banai ha hum yeh kalpna kare aur bhagwan ki rachna dekhe aur swaym bhagwan ko dekh kar maan ma kalpna kare deko bhagwan kitna sunder ha bhagwan ke ek ek shree aang ko niharna aur hradya mai basaya
   
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  2181 days 12 hrs 2 mins ago By Dasi Radhika
 जीवन में सामजस्य (consistency) कैसे प्राप्त करें?
सामजस्य लाने की इच्छा ही तुम्हे सही रास्ते पर ले जायेगी| जब तक तुम प्रगतिशील हो, एक दो बार नीचे आ भी जाते हो तो उस पर ध्यान देने की आवश्यक्ता नहीं| यदि तुम इसके लिए चिंता करते हो, यां तो तुम खुद को दोषी ठहराने लगते हो यां गुस्से और तनाव में आ जाते हो। इसलिए इसको स्वीकार करो|
   
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  2181 days 12 hrs 53 mins ago By Waste Sam
 जीवन में सामजस्य (consistency) कैसे प्राप्त करें?
राधे राधे, जीवन में तालमेल रखने के लिए संतो से सुना हुआ ये विचार अच्छा बिलकुल सही लगता है जो कहता है की मन भगवान् को दे दो क्योंकि बस यह ही दुनिया को नहीं चाहिए और सब कुछ संसार को दे दो जैसे अपना पैसे, सेवा आदि | यदि हम इस सलाह पर चले तो निश्चित ही हमारा कल्याण हो जायेगा और तालमेल रहेगा जीवन में | जय श्री राधे
   
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  2181 days 13 hrs ago By Waste Sam
 स्मरण शक्ति को कैसे बढ़ायें?
राधे राधे, स्मरण शक्ति बढाने के लिए माँ सरस्वती की उपासना कर सकते है | और जो नीचे राधिका जी का विचार है वो भी सही है | जय श्री राधे
   
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  2181 days 13 hrs 5 mins ago By Waste Sam
 मन को तनाव मुक्त कैसे करे?
राधे राधे, मन को तनाव मुक्त करने के लिए भक्ति और भगवान् का नाम ही एक आसरा होता है | जय श्री राधे
   
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  2181 days 13 hrs 8 mins ago By Waste Sam
 भूतकाल को छोड़कर कैसे आगे बढा जाये?
राधे राधे, भूतकाल को छोड़ने का एक ही रास्ता है की हम अपने भूतकाल को भी भगवान् के चरणों में समर्पित करके अपनी बुरे या अच्छाई कुछ ना देख कर बस खुद को भगवान् का अंश मान कर भविष्य के विषय में सोचे और उन गलतियों को दुबारा ना दुहराने का प्रण ले | जय श्री राधे
   
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  2181 days 13 hrs 16 mins ago By Waste Sam
 मुक्ति की इच्छा रखना ठीक है?
राधे राधे, मुक्ति की इच्छा रखना भी सकाम भक्ति का रूप है परन्तु यह इच्छा एक उच्च इच्छा इसलिए मेरे मत अनुसार ऐसी सकाम इच्छा रख कर भक्ति करना गात नहीं मानती | जय श्री राधे
   
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  2181 days 13 hrs 20 mins ago By Waste Sam
 समर्पण के बाद भी मन क्यों अटक जाता है?
राधे राधे, समर्पण के बाद भी मन इसलिए अटक जाता है क्योंकि गुरु के मार्गदर्शन को हम ठीक से अपने जीवन में नहीं उतारते, यदि हम भक्ति में पूर्ण समर्पण ले आये और हर कर्म को भगवान् को अर्पित करते जाये तो मन कभी माया में नहीं अटक सकता | जय श्री राधे
   
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  2181 days 13 hrs 31 mins ago By Waste Sam
 प्रारब्ध और संचित कर्म के बारे मे बताएं?
राधे राधे, संचित कर्म वो है जो हम अपने कर्मो के द्वारा इस जन्म में जोड़ते है | प्रारब्ध कर्म वो है जो हमारे साथ पता नहीं कितने जन्मो से जोड़े हुए है | प्रारब्ध कर्म से थोड़े से कर्म लेकर हमारा यह जीवन बनता है | जय श्री राधे
   
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  2182 days 12 hrs 18 mins ago By Dasi Radhika
 मन को तनाव मुक्त कैसे करे?
मन को भगवान की भक्ति में लगा लो तनाव अपने आप दूर हो जायेगा................राधे राधे.
   
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  2182 days 13 hrs 38 mins ago By Dasi Radhika
 स्मरण शक्ति को कैसे बढ़ायें?
थोड़ा अधिक प्राणायाम करो, और आयुर्वेद में भी कुछ उपाय हैं, तुम ब्रह्मी और शंखपुष्पी जड़ी बूटियां ले सकते हो, ये स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिये अच्छी हैं।
   
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  2184 days 12 hrs 26 mins ago By Dasi Radhika
 भूतकाल को छोड़कर कैसे आगे बढा जाये?
हमें भूतकाल को भाग्य के रूप में देखना चाहिये और भविष्य को स्वतंत्र इच्छा के रूप में, और वर्तमान क्षण में सुखपूर्वक जीना चाहिये। आमतौर पर हम लोग इसका ठीक विपरीत करते हैं। हम क्या करते हैं? हम भूतकाल को स्वतंत्र इच्छा से निर्मित समझते हैं और भविष्य को भाग्य मान कर, वर्तमान में निष्क्रिय और दुखी रहते हैं। ऐसा बेवकूफ़ लोग करते हैं। बुद्धिमान लोग क्या करते हैं? बुद्धिमान लोग देखते हैं कि भूतकाल तो अब है नहीं, वो तो चला गया है, ख़त्म हो गया है, और ऐसा होना ही निश्चित था, भाग्य था।
   
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  2184 days 23 hrs 27 mins ago By Kiran Kejriwal
 भूतकाल को छोड़कर कैसे आगे बढा जाये?
bhoot kaal ko chod kar age badhne ke liya hme past ko bhulna hoga jo bhi hamko lagta ha galat hua ha uske liya regret feel kar ke aage dekhenge tab aage bad sakte ha
   
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  2186 days 13 hrs 41 mins ago By Dasi Radhika
 समर्पण के बाद भी मन क्यों अटक जाता है?
माया की पहुँच दूर तक है| ये कई तरफ से आप को पकड़ लेती है| जब आपको लगता है कि यह आप को कोई ख़ुशी दे रही है तो मन इसकी ओर आकर्षित हो जाता है| इसे समर्पण, भोग या समझदारी से खत्म कर दो| यदि कुछ भी नहीं तो समय के साथ यह अपने आप समाप्त हो जाएगा|
   
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  2187 days 13 hrs 6 mins ago By Dasi Radhika
 प्रारब्ध और संचित कर्म के बारे मे बताएं?
संचित कर्म भक्ति के द्वारा कम किया जा सकता है जबकि प्रारब्ध कर्म का कुछ अंश सहन करते हुए अनुभव करना पड़ता है |
   
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  2188 days 14 hrs 58 mins ago By Waste Sam
 पिछले जन्म के कर्मों का इस जीवन पर क्या असर होता हैं?
राधे राधे, यह जो जन्म हमे मिला है ये पिछले जन्म के कर्मो के कारण ही है | यदि हम सोचे की हमारा चेहरा ऐसा क्यों, हमारा कद इतना क्यों, कोई गरीब परिवार में जन्मा और कोई अमीर परिवार में क्यों इत्यादी तो हमे इन तरह के सवालो के जवाब नहीं मिलते | पर जब हम गुरु के सानिध्य में आते है तो हमे ज्ञान होता है की हर घटना के पीछे हमारे पूर्व कर्म है | अर्थात सब कुछ हमारे पूर्व जन्मो के ही कर्मो का फल है | जय श्री राधे
   
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  2188 days 14 hrs 58 mins ago By Waste Sam
 पिछले जन्म के कर्मों का इस जीवन पर क्या असर होता हैं?
राधे राधे, यह जो जन्म हमे मिला है ये पिछले जन्म के कर्मो के कारण ही है | यदि हम सोचे की हमारा चेहरा ऐसा क्यों, हमारा कद इतना क्यों, कोई गरीब परिवार में जन्मा और कोई अमीर परिवार में क्यों इत्यादी तो हमे इन तरह के सवालो के जवाब नहीं मिलते | पर जब हम गुरु के सानिध्य में आते है तो हमे ज्ञान होता है की हर घटना के पीछे हमारे पूर्व कर्म है | अर्थात सब कुछ हमारे पूर्व जन्मो के ही कर्मो का फल है | जय श्री राधे
   
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  2189 days 14 hrs 41 mins ago By Waste Sam
 ये संभव है कि हम सभी को आत्मज्ञान हो जाये?
राधे राधे, हम सब भगवान् के अंश है अर्थात हम ज्ञान से पूर्ण है बस उस पर माया का पर्दा है | बस हमे उस माया के परदे को हटाने के देर है ओर हम सब के अंदर की ज्ञान की ज्योति दिख जाएगी | इसलिए हम सबको आत्मज्ञान प्राप्त हो सकता है | जय श्री राधे
   
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  2189 days 14 hrs 46 mins ago By Waste Sam
 हम क्रोध को कैसे काबू में करे?
राधे राधे, क्रोध होता काम के कारण, जब हमारी इच्छाये पूरी नहीं होती तो हमे क्रोध आता है | क्रोध को काबू करने के लिए हमे अपनी कामनाओं पर अंकुश लगाना चाहिए | यह करने की क्षमता हममें नहीं है यह भगवान् ओर गुरु की कृपा से ही संभव है | इसलिए बस भगवान् की भक्ति करो समर्पण भाव से क्रोध को काबू करने के लिए | जय श्री राधे
   
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  2189 days 15 hrs 19 mins ago By Waste Sam
 अपनापन और सात्विक शक्ति को कैसे बढ़ायें?
राधे राधे, अपनापन तभी हम महसूस कर सकते है जब हम सबके अंदर भगवान् के ही दर्शन करे | जब हम किसी को अपना समझाते है तब अपने आप अपनापन महसूस होने लगता है | सात्त्विक शक्ति बढाने के लिए केवल भगवान् की भक्ति ही एक साधन हो सकती है | गुरु ही एक साधन है जो भगवान् से हमारा परिचय कराकर भक्ति प्रदान करते है | जय श्री राधे
   
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  2189 days 15 hrs 25 mins ago By Waste Sam
 मन को एकाग्र कैसे करे?
राधे राधे, मन एकाग्र करने के लिए हमे अपने मन को एक लक्ष्य दे देना चाहिए | और यदि वो लक्ष्य सात्त्विक और उच्च हो जैसे भगवान् को पा लेना का, या मोक्ष के ओर अग्रसर होना का तो कहना हे क्या | जय श्री राधे
   
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  2189 days 20 hrs 7 mins ago By Balvinder Aggarwal
 ये संभव है कि हम सभी को आत्मज्ञान हो जाये?
हरी ओम तत्सत:जी हाँ ये संभव है आवश्यकता है दृढ विश्वास,जिज्ञासा एवं उचित मार्गदर्शन की ....वेदिक ऋषि
   
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  2190 days 12 hrs 20 mins ago By Dasi Radhika
 हम क्रोध को कैसे काबू में करे?
चिंता करने से कोई लाभ नहीं है। जीवन में आगे बढ़ो। कल जो हो चुका है उसके पीछे वर्तमान को व्यर्थ मत करो। जागो और कहो, ‘इस से निपटने की हिम्मत मुझ में है।’ यदि कोई और क्रोधित है तो तुम हर युक्ति का प्रयोग कर के उसे शांत करने की कोशिश करो और फिर सब ईश्वर पर छोड़ दो। शिक्षा दो और नज़रंदाज़ करो। उसे कुछ समय दो। माफ़ी मांग लो तो बहुत से लोग बीती बात भुला ही देते हैं। अगर तब भी माफ़ ना करें तो ये अज्ञान के कारण है।
   
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  2193 days 3 hrs 37 mins ago By Boris Kurma
 मन को एकाग्र कैसे करे?
А ум надо сконцентрировать на повторении и воспевании Святых Имен Господа И всю свою материальную деятельность направить в духовно-творческое русло Преданного Служения.
   
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  2193 days 14 hrs 41 mins ago By Waste Sam
 इच्छाओं को कैसे त्यागा जाये?
राधे राधे, इच्छायों को त्यागने के लिए हमे अपने मन को भगवान् के समर्पित कर देना चाहिए, सदा उस एक भगवान् में ही रमण करना चाहिए तो इन्द्रियाँ और इच्छाएं सब खुद-ब-खुद हमे छोड़ देंगे | जय श्री राधे
   
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  2193 days 14 hrs 46 mins ago By Waste Sam
 विचार कैसे हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं?
राधे राधे, विचारो से ही हमारी प्रकृति और कर्म बनते है | यदि हम उच्चकोटि के विचार रखेंगे तो उच्च बनेगे अन्यथा हमारा पतन हो जायेगा | जय श्री राधे
   
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  2193 days 14 hrs 49 mins ago By Waste Sam
 कार्य क्षेत्र को बेहतर कैसे बना सकते हैं?
राधे राधे, कार्य क्षेत्र को बेहतर बनाने के लिए हमे भगवद गीता से मार्गदर्शन लेना चाहिए | भगवद गीता कहती है मनुष्य को कर्म को कभी नहीं छोडना चाहिए बस हमे अपना हर कर्म भगवान् के चरणों में अर्पित कर देना चाहिए | जब हम कर्म को भगवान् के लिए करते है तो अपने आप कार्य भी अच्छा होता है | जय श्री राधे
   
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  2193 days 15 hrs 27 mins ago By Waste Sam
 हम विश्व शांति में कैसे सहयोग दे सकते है?
राधे राधे, यदि हम सबको अपना माने अपने परिवार के सदस्य माने तो विश्व मं शांति अपने आप आ जाएगी | जय श्री राधे
   
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  2193 days 15 hrs 31 mins ago By Waste Sam
 जीवन में उद्देश्य चाहिए या हम ऐसे ही खुश रह सकते हैं?
राधे राधे, जीवन में उद्देश्य होना जरूरी है | परन्तु हमारे उद्देश्य सात्त्विक होने चाहिए जैसे की भगवान् को पाना, भक्त बनना इत्यादी | जय श्री राधे
   
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  2193 days 15 hrs 35 mins ago By Waste Sam
 मन में विचार कैसे उठते हैं?
राधे राधे, मन के विचार भगवान् के प्रेरणा के दर्पण है | एक और दृष्टिकोण से हम ये कह सकते है की जैसे हम कर्म करते है वैसे ही हमारे विचार बनते है | जय श्री राधे
   
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  2193 days 15 hrs 39 mins ago By Waste Sam
 हम स्वयं को प्रेम करना कैसे सिखा सकते हैं?
राधे राधे, प्रेम सीखने के लिए हमे निस्वार्थ कार्य करने चाहिए | प्रेम का दूसरा नाम निस्वार्थ है | जय श्री राधे
   
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  2193 days 15 hrs 44 mins ago By Waste Sam
 धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का सामना कैसे करे?
राधे राधे, यदि हम सब धर्म के मार्ग का अनुसरण करे तो हमे किसी परेशानी से नहीं लड़ना पड़ेगा क्योंकि हम कोई गलत काम ही नहीं कर पाएंगे | जय श्री राधे
   
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  2193 days 15 hrs 52 mins ago By Waste Sam
 दिल और दिमाग़ में से किसका कहना माने?
राधे राधे, यदि हमारा दिल और दिमाग अर्थात सारी इन्द्रियां भगवान् में लगे हुए है तो हम किसी की भी सुन सकते है परन्तु यदि हम संसारी है तो ज़्यादातर हमे दिल से काम लेना चाहिए क्योंकि दिल भगवान् का घर है | जय श्री राधे
   
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  2194 days 19 hrs 40 mins ago By Vijay Mishra
 विचार कैसे हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं?
"विचार - चिंतन - आचरण - स्वाभाव - प्रकृति - आदर्श - परिचय - जीवन " जीवन - हमारे सुन्दर विचारों में से न्यूनाधिक बार -बार चिंतन में आते है ,उनमेसे कुछ का रूपायन हमारे आचरण और फिर स्वाभाव में होता है ,इनमें से कुछ हमारी प्रकृति में रच -बस जाती है जो हमारे जीवन का आदर्श और परिचय बनता है .अच्छे विचारों के संग्रहन से अंततः एक सुन्दर जीवन प्राप्त होता है और ये सुन्दर विचार हमें पोथियों से या फिर सत्संग से प्राप्त होते हैं
   
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  2195 days 22 hrs 22 mins ago By Dilip Makwe
 भगवान से साक्षात्कार कैसे हो सकता हैं?
No need we are part of GOD. He is deep within. Look inside he is very much there sitting silently and observing you. Hide yourself and expose GOD within you.
   
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  2195 days 22 hrs 27 mins ago By Dilip Makwe
 इन्द्रियों को कैसे जीत सकते हैं?
Convince them to follow you not you follow them.
   
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  2195 days 22 hrs 29 mins ago By Dilip Makwe
 आध्यात्म जीवन में किस तरह सहायक है?
Sprituality is a means of transport for journey from birth to death, to take you to right destination.
   
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  2195 days 23 hrs 3 mins ago By Dilip Makwe
 दिल और दिमाग़ में से किसका कहना माने?
Our mind should be governed/driven by heart.
   
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  2195 days 23 hrs 7 mins ago By Dilip Makwe
 हम स्वयं को प्रेम करना कैसे सिखा सकते हैं?
Just by taking a drop of love every morning. You cannot love anyone if you don't love yourself. How can you give love if you don't have love in stock. If i ask you for Rs.1000 how can you give if you don't have in your pocket.
   
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  2195 days 23 hrs 14 mins ago By Dilip Makwe
 मन में विचार कैसे उठते हैं?
First we swallow thoughts, the same comes out. Be aware of what we in take.
   
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  2195 days 23 hrs 19 mins ago By Dilip Makwe
 जीवन में उद्देश्य चाहिए या हम ऐसे ही खुश रह सकते हैं?
Go on creating happiness, goals will be created automatically there after.
   
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  2195 days 23 hrs 22 mins ago By Dilip Makwe
 हम विश्व शांति में कैसे सहयोग दे सकते है?
By helping ourself to be in peace of mind.
   
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  2195 days 23 hrs 25 mins ago By Dilip Makwe
 कार्य क्षेत्र को बेहतर कैसे बना सकते हैं?
By the feeling of belongingness.
   
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  2196 days 19 hrs 45 mins ago By Manish Nema
 जीवन में उद्देश्य चाहिए या हम ऐसे ही खुश रह सकते हैं?
तुम ने खुश रहना अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है| तुम्हारे पास तो पहले ही उद्देश्य है| पर क्या तुम खुश रह सकते हो जब तुम्हारे आसपास के लोग खुश नहीं हैं? जब तुम अपने दृष्टिकोण का विकास करते हो तो तुम सब में अपने आप को पाते हो| अगर तुम्हारे आसपास के लोग खुश नहीं हैं तो तुम खुश नहीं रह सकते| तुम जितना अपने केन्द्र में जाते हो तुम दुनिया में सबके साथ एक महसूस करते हो| तुम इंसान, वनस्पति और जानवरों के साथ भी एकता महसूस करते हो| तुम वातावरण की देखभाल करना भी शुरु कर देते हो|
   
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  2196 days 19 hrs 54 mins ago By Dasi Radhika
 हम विश्व शांति में कैसे सहयोग दे सकते है?
विश्व शांति के लिए हमे कार्य करते रहना चाहिए। सारी दुनिया एक ही परिवार है - वासुदेव कुटुम्बकम।
   
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  2196 days 19 hrs 57 mins ago By Dasi Radhika
 हम विश्व शांति में कैसे सहयोग दे सकते है?
विश्व शांति के लिए हमे कार्य करते रहना चाहिए। सारी दुनिया एक ही परिवार है - वासुदेव कुटुम्बकम।
   
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  2198 days 23 hrs 59 mins ago By Dasabhas DrGiriraj N
 मन में विचार कैसे उठते हैं?
विचारों का कारण धन जैसा हो धन, वैसा हो अन्न, वैसा हो मन, अन्न एवं धन के आधार पर मन में तीन प्रकार क विचार उठते हैं- १. सात्विक, २. राजसिक, ३. तामसिक, जैसे विचार होते हैं, वैसा ही हमारा आचार या आचरण होता है, विचारों के कारण ही हम सदा ही प्रसन्न, क्रियाशील,एवं क्रोधित होते हैं अतः सदैव आधार वास्तु धन पर ध्यान रहे की किसी भी प्रकार से दूषित या दुसरे को दुःख देकर धन का संग्रह न होने पाए इस प्रकार जब जड़ ठीक होगी तो सब ठीक होगा, न बुरे विचार उठेंगे, न बुरा आचरण होगा, न दुःख होगा, न क्लेश, सर्वत्र होगा - आनंद ही आनंद JAI SHRI RADHE DASABHAS Dr GIRIRAJ nangia Lives, Born, Works = L B W at Vrindaban www.harinampress.com www.shriharinam.blogspot.com
   
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  2199 days 2 hrs 28 mins ago By Ravi Kant Sharma
 मन में विचार कैसे उठते हैं?
जय श्री कृष्णा.... प्रत्येक व्यक्ति के मन में विचार उत्पन्न होने के दो कारण होते हैं।..... प्रारब्ध के कारण और वर्तमान कामनाओं के कारण।...... जो विचार प्रारब्ध यानि पूर्व संस्कार के कारण मन में उत्पन्न होते हैं वही विचार शारीरिक रूप से क्रियान्वित होता हैं, लेकिन जो विचार वर्तमान कामना के कारण मन में उत्पन्न होता हैं उस विचार से नये संस्कार यानि अगले जीवन के प्रारब्ध की उत्पत्ति होती है।
   
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  2199 days 20 hrs 31 mins ago By Dasabhas DrGiriraj N
 हम स्वयं को प्रेम करना कैसे सिखा सकते हैं?
प्रेम के विषय - श्री कृष्ण दो बात हैं : एक है विषय, दूसरा है आश्रय प्रेम के एकमात्र विषय हैं - श्री कृष्ण, दूसरा कोई है ही नहीं अर्थात प्रेम यदि हो सकता है, तो कृष्ण से ही हो सकता है. = विषय और जो प्रेम करता है, वह है आश्रय = राधाजी , आप, हम, अनेक संत, भक्त. कृष्ण के अतिरिक्त यदि हम किसी से प्रेम करते हैं तो शास्त्र कहता है कि वह प्रेम है ही नहीं, हो भी नहीं सकता, क्योंकि प्रेम के एकमात्र आश्रय कृष्ण ही हैं ठीक वैसे जैसे मिटटी के बिना 'मिटटी का बर्तन' बन ही नहीं सकता, मिटटी के बिना बनेगा तो वह 'मिटटी का बर्तन' नहीं होगा. तो फिर हम माता-पिता , भाई - बहिन या पति - पत्नी या लड़का - लड़की से जो प्रेम करते हैं, वह क्या है ? वह प्रेम नहीं ; 'काम' या कामना है, इसीलिये ऊपर लिखे ये समस्त प्रेम टूट जाते हैं, और कृष्ण से यदि प्रेम हो जाय तो आज तक किसी का न टूटा है, न टूटेगा JAI SHRI RADHE DASABHAS Dr GIRIRAJ nangia Lives, Born, Works = L B W at Vrindaban
   
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  2199 days 22 hrs 15 mins ago By Dasabhas DrGiriraj N
 हम स्वयं को प्रेम करना कैसे सिखा सकते हैं?
PREM yadi hota h to shri krishn se hi hota h, kisi aur se yadi h to vh kam ya kamnaa hi hai. ham ya jeev krishna ka das h, apne se ya kisi aur se krishn-das samajh kr prem karen to theek, anyatha apne se ya kisee se bh prem karenge to asakti m faskar sarvnash hoga, jaise jadbharat ji ka hiran k prem m hua tha. plz visit - http://shriharinam.blogspot.com/2011/08/prem-ya-moh.html
   
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  2199 days 23 hrs 27 mins ago By Balvinder Aggarwal
 हम स्वयं को प्रेम करना कैसे सिखा सकते हैं?
हरी ओम तत्सत :इस प्रशन में ये जानना जरूरी है में स्वयं कौन हूँ यदि में शुद्ध चेतन आत्मा हूँ तो इश्वर से प्रेम करना होगा अर्थात भक्तिमार्ग यदि में शरीर हूँ तो संसार के अनुसार खाओ पीओ मोज करो यही है स्वयं से प्रेम ....वेदिक ऋषि
   
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  2200 days 2 hrs 5 mins ago By Ravi Kant Sharma
 हम स्वयं को प्रेम करना कैसे सिखा सकते हैं?
जय श्री कृष्णा.... वसुदेव कुटुंब की भावना में स्थिर होकर हम स्वयं को प्रेम करना सिखा सकते हैं।
   
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  2200 days 22 hrs 46 mins ago By Dasabhas DrGiriraj N
 धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का सामना कैसे करे?
bhrastaachaar nayee baat nhi h, hamesha tha, rahega. ram k samay m bh tha, krishn k samay m bh tha, atah koi chinta ki baat nhi h, sristi k aadhar hn 3 gun : satv raj tam, bhrastaachaar tam gun ka prateek h, sristi se yh kabhi samapt nhi hoga, han aapko achchh nhi lagtaa to aap apne se , apne pariwaar se ise door kar sakte hai. aap bhrastaachaar na karen http://shriharinam.blogspot.com/2011/08/log-kya-kar-rahe-hain.html JAI SHRI RADHE !
   
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  2200 days 23 hrs 3 mins ago By Balvinder Aggarwal
 संस्कार क्या है और संस्कार से कैसे जीवन शुद्ध होता है?
हरी ओम तत्सत :संस्कार वो क्रिया है जिनके अपनाने से हमारे तत्व शुद्ध होते हैं तत्व शुधि से हमारे भीतर विवेक जागृत होता है विवेक से ही मनुष्य भले बुरे का फर्क महसूस कर पता है इस क्रिया से तामसिक भाव समाप्त होकर सात्विक भाव जागृत होता है संकर के नित्य सेवन से व्यक्ति तीनों गुणों को लाँघ लेता है और पुरुषार्थी अर्थात परमार्थी अर्थात जन-जन का सेवा दर हो जाता है ....वेदिक ऋषि
   
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  2200 days 23 hrs 15 mins ago By Balvinder Aggarwal
 धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का सामना कैसे करे?
हरी ओम तत्सत :इस समस्या से बचने के लिए हर व्यक्ति को हर स्थिति,अवस्था में अपने एवं परिवार सहित समाज को संस्कारित करना होगा यानि वेदिक संस्कृति के अंतगत जीवन जीना होगा तो ही ये संभव है .....वेदिक ऋषि
   
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  2201 days 3 hrs 11 mins ago By Ravi Kant Sharma
 धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का सामना कैसे करे?
जय श्री कृष्णा.... आध्यात्मिक दृष्टिकोण से जो कुछ तन की आँखों से दिखलाई देता है वह सत्य नहीं होता है।..... संसार में प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को ही ठग रहा होता है और स्वयं के द्वारा ही ठगा जा रहा होता है।.... जब कोई व्यक्ति केवल स्वयं को ही देखता है, वहीं व्यक्ति सांसारिक धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का सामना करते हुए स्वयं को धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से मुक्त रख पाता है।..... *****'होइ है वही जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥*****
   
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  2202 days 3 hrs 34 mins ago By Ravi Kant Sharma
 दिल और दिमाग़ में से किसका कहना माने?
जय श्री कृष्णा.... प्रत्येक व्यक्ति की बुद्धि का निवास स्थान दिमाग (मस्तिष्क) होता है, और मन का निवास स्थान दिल (हृदय) होता है।........ बुद्धि का उपयोग प्रकृति के नियमों को जानने के लिये होता है और मन का उपयोग प्रकृति के नियमों को मानने के लिये होता है।...... जाने बिना मानना असंभव होता है और माने बिना जानना असंभव होता है।...... बुद्धि और मन एक दूसरे के पूरक होते हैं।....... इसलिये प्रत्येक व्यक्ति को अपने दिमाग का उपयोग केवल अपने दिल की भावना को जानने के लिये ही करना चाहिये।....... यह तभी संभव होता है जब व्यक्ति दूसरों की भावना को जानने की कामना नहीं करता है।
   
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  2202 days 3 hrs 41 mins ago By Keshav Singh
 दिल और दिमाग़ में से किसका कहना माने?
According to time we can lesion both
   
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  2202 days 17 hrs 4 mins ago By Ravi Kant Sharma
 सभी ग्रंथो में सिर्फ गीता जयंती ही क्यों मनाई जाती हैं?
जय श्री कृष्णा.... "श्रीमद भगवद गीता = (श्री+मद+भग+वद+गीता) = (जीवात्मा+अहंकार+भगवान+वाणी+गीत) = जीवात्मा के अहंकार को मिटाने वाला भगवान का वाणी गीत।"....... वेदों का जन्म ब्रह्मा जी के मुख से हुआ है और अन्य ग्रंथ वेदों के अंश मात्र हैं।........ ब्रह्मा जी लेकर मनुष्य सहित कीट पर्यन्त सभी योनियाँ प्रकृति के गुणों के अधीन होती है।....... वेदों में केवल इस लोक का ही ज्ञान है, वेदों का मनुष्यों के लिये अन्तिम उपदेश "न इति" यानि यही सम्पूर्ण ज्ञान नहीं है, वेदों का ज्ञान अपूर्ण हैं।........ गीता का जन्म स्वयं पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण के मुख से हुआ है।..... गीता में इस लोक के ज्ञान के साथ साथ परलोक का भी ज्ञान समाहित है, गीता सम्पूर्ण ग्रन्थ है।...... मोक्ष प्रदान करने वाली गीता का जन्म अगहन शुक्ल एकादशी के दिन हुआ था, इसलिये इस एकादशी को मोक्षदा एकादशी भी कहा जाता है और इसीलिये केवल "श्रीमद भगवद गीता" के जन्मदिन, गीता जयंती के रूप में मनाई जाती है।
   
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  2202 days 19 hrs 15 mins ago By Ravi Kant Sharma
 शक्ति और भक्ति कैसे प्राप्त कर सकते हैं?
जय श्री कृष्णा.... शक्ति की उपासना करने से शक्ति की प्राप्ति होती है, और शक्तिमान की उपासना करने से भक्ति की प्राप्ति होती है।...... भक्ति के प्राप्त होने पर व्यक्ति में शक्ति का संचार स्वतः ही हो जाता है।
   
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  2203 days 1 hrs 20 mins ago By Balvinder Aggarwal
 सभी ग्रंथो में सिर्फ गीता जयंती ही क्यों मनाई जाती हैं?
हरी ओम तत्सत :भगवान श्री कृष्ण एवं अर्जुन जी दोनों नर एवं नारायण थे अर्जुन जी को ज्ञान नहीं था ये बात नहीं थी परन्तु वो समर्थ थे यह सोच कर भगवान जी ने अर्जुन के माध्यम से गीता ज्ञान दिया क्यूंकि कलियुग में सत्य,ज्ञान,गुरु का आभाव होंगा ऐसा मान कर सम्पूर्ण वेदों का ज्ञान मात्र १८ श्लोकों में अर्जुन जी को प्रदान किया वाही १८ अध्याय बने ये शास्त्र नहीं इश्वर निराकारभवान के साकार रूप के मुख्वाक्य हैं इस लिए गीता का महात्म्य है औरसभी शास्त्रों में केवल गीता जयंती मानी जाती है
   
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  2203 days 2 hrs 47 mins ago By Rajat Sinha
 सभी ग्रंथो में सिर्फ गीता जयंती ही क्यों मनाई जाती हैं?
गीता-सुगीता किमन्यै शास्त्र विस्तरै: या स्वयं पद्मनाभस्य मुखपद्मा द्विनिसृता:
   
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  2203 days 16 hrs 13 mins ago By Boris Kurma
 महत्वकांक्षा और लालच कैसे दूर हो सकती है?
Направив амбиции и жадность в духовно-творческое русло Преданного Служения,мы их можем преодолеть.Харе Кришна!Радхе Радхе!
   
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  2204 days 57 mins ago By Waste Sam
 शक्ति और भक्ति कैसे प्राप्त कर सकते हैं?
राधे राधे, शक्ति भगवान् का एक और रूप है जिसे हम प्रकृति के नाम से भी बुलाते है | जब हम भगवान् की भक्ति के पथ पर बढते है तो शक्ति अपने आप ही हमारे द्वार तक आती है | भक्ति के पथ पर अग्रसर होने के लिए ह्रदय में भगवान् के प्रति प्रेम होना जरूरी है और यह प्रेम भगवान् के अनुग्रह से हे प्राप्त होता है | यदि एक और नजरिये से इसे देखे तो यह भी कह सकते है की खुद को जानने की इच्छा, हमे और संसार को बनाने वाले को जानने के इच्छा भी हमे कभी कभी भगवान् के प्रेम के पथ पर ले जाती है और ये ही भक्ति का स्वरुप है | भक्ति से ही हमे शक्ति के भी प्राप्ति हो जाती है | जय श्री राधे
   
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  2204 days 1 hrs 25 mins ago By Waste Sam
 इन्द्रियों को कैसे जीत सकते हैं?
राधे राधे, इन्द्रियों को जीतना मनुष्य के बस में नहीं क्योंकि इन्द्रियाँ बहुत बलवती होती है | इनके बल पर को वश में करने की क्षमता केवल प्रभु की भक्ति और गुरु के आशीर्वाद से ही प्राप्त की जा सकती है | जय श्री राधे
   
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  2205 days 13 mins ago By Ravi Kant Sharma
 इन्द्रियों को कैसे जीत सकते हैं?
जय श्री कृष्णा.... इन्द्रियों पर जीत हासिल करने की दो विधियाँ है, (१). निष्काम भाव में मन को स्थिर करके सभी दस इन्द्रियों को निरन्तर कर्तव्य-कर्म में लगाने से एक दिन सभी इन्द्रियाँ भगवान की कृपा से स्वतः ही वश में हो जाती हैं।....... (२). सांख्य ज्ञान के निरन्तर अभ्यास द्वारा सभी दस इन्द्रियों को एक-एक करके वश में करने से एक दिन भगवान कृपा से मन स्वतः ही वश में हो जाता है।______ भगवान की कृपा के बिना इन्द्रियों पर जीत हासिल करना असंभव है।
   
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  2205 days 18 hrs 58 mins ago By Waste Sam
 महत्वकांक्षा और लालच कैसे दूर हो सकती है?
राधे राधे, महत्वाकांक्षाओ और लालच को दूर करने के लिए भगवान् के चरणों का आसरा लेना चाहिए क्योंकि भगवान् की भक्ति ही हमे शुद्ध कर सकती है | जय श्री राधे
   
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  2205 days 19 hrs 3 mins ago By Waste Sam
 संतुलन और संयम को कैसे बनाये रखें?
राधे राधे, संतुलन और संयम बनायें रखने के लिए हम अपनी अकांक्षाओ / इच्छायों को सीमित रखना चाहिए | जय श्री राधे
   
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  2205 days 19 hrs 9 mins ago By Waste Sam
 माया से कैसे पार पाया जा सकता हैं?
राधे राधे, माया से पार पाने के लिए गुरु का मार्गदर्शन और भगवान् के प्रति प्रेम होना जरूरी है | माया भगवान् के चेरी है, यदि हम भगवान् की सेवा करते है तो माया खुद ही हमारे मार्ग से हट जाती है | जय श्री राधे
   
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  2205 days 19 hrs 14 mins ago By Waste Sam
 आध्यात्म जीवन में किस तरह सहायक है?
राधे राधे, अध्यात्म का अर्थ है धर्म के मार्ग पर चलकर जीवन का यापन करना | अध्यात्म- जीवन जीने की कला सिखाता है | जय श्री राधे
   
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  2205 days 19 hrs 29 mins ago By Waste Sam
 भगवत भक्ति कैसे प्राप्त हो सकती हैं?
राधे राधे, भगवान् की भक्ति गुरु की सेवा से प्राप्त हो सकती है | जय श्री राधे
   
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  2205 days 19 hrs 32 mins ago By Waste Sam
 भगवान से साक्षात्कार कैसे हो सकता हैं?
राधे राधे, भगवान् का साक्षात्कार करने के लिए गुरु के आवश्यकता होती है | गुरु की शिक्षा के प्रकाश से ही साधक भगवान् को प्राप्त कर सकता है | जय श्री राधे
   
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  2205 days 19 hrs 36 mins ago By Waste Sam
 भगवत प्रसाद का महत्व बाताये?
राधे राधे, भगवत प्रसाद का महत्व वाणी से नहीं कहा जा सकता, ये न केवल भगवान् का भोग है परन्तु यह अमृत है जो भगवान् का आशीर्वाद है जिससे विचार शुद्धि होती है प्रसाद ग्रहण करने वाले की | जय श्री राधे
   
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  2205 days 21 hrs ago By Waste Sam
 जिज्ञासा का सार तत्व कैसे जान सकते है?
राधे राधे, जिज्ञासा का अर्थ है कुछ जानने की इच्छा जिसका ज्ञान हमे नहीं है | जिज्ञासा होनी चाहिए परम तत्व को जानने की, उस परमात्मा को जानने की जिसने हमे ये जीवन दिया है | मेरे मत अनुसार जिज्ञासा का सार तत्व है परमतत्व को जानना | जय श्री राधे
   
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  2205 days 21 hrs 8 mins ago By Waste Sam
 अंतर्ज्ञान को कैसे बढ़ाया जा सकता है?
राधे राधे, अंतर्ज्ञान सदा से ही हमारे अंदर स्थित रहता है आत्मा के रूप में क्यों हमारी आत्मा भगवान् का प्रतीक है जो ज्ञान से पूर्ण है | बस ज़रुरत है तो उस माया के आवरण को हटाने का जिसके कारण ये ज्ञान ढक जाता है | इस आवरण को हटाते है सद्गुरु और उनसे प्राप्त सत्संग | जय श्री राधे
   
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  2205 days 23 hrs 16 mins ago By Ravi Kant Sharma
 महत्वकांक्षा और लालच कैसे दूर हो सकती है?
जय श्री कृष्णा.... संसार की किसी भी वस्तु को अपना समझना और उस वस्तु को प्राप्त करने की इच्छा करना महत्वाकांक्षा कहलाती है।..... वस्तु के प्राप्त हो जाने पर और अधिक पाने की इच्छा लालच कहलाता है।_________ जब व्यक्ति मन से संसार को भगवान का स्वरूप मानकर और संसार की सभी वस्तुओं को भगवान की मानकर, भगवान की सेवा में लगाने लगता है तब व्यक्ति में नई महत्वाकांक्षाओं का जन्म नहीं होता हैं।...... जब तक व्यक्ति में नई महत्वाकांक्षायें उत्पन्न होती रहती हैं, तब तक लालच का मिटना असंभव होता है, और जब महत्वाकांक्षायें मिटने लगती हैं, तब लालच भी स्वतः मिटने लगता है।
   
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  2207 days 3 hrs 35 mins ago By Ravi Kant Sharma
 संतुलन और संयम को कैसे बनाये रखें?
जय श्री कृष्णा.... जीवन उसी व्यक्ति का संतुलित होता है जो व्यक्ति संसार के आश्रित न होकर, केवल भगवान के आश्रित होकर, न तो बीते हुए समय का पश्चाताप करता है, और न ही भविष्य की चिन्ता करता है, केवल वर्तमान पर दृष्टि रखकर निरन्तर अपने कर्तव्य-कर्म करता रहता है, ऎसा व्यक्ति संयमी यानि धैर्य धारण करने वाला भी होता है।
   
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  2207 days 16 hrs 53 mins ago By Arjun Gartaula
 भगवान कृष्ण ने राधा जी से विवाह क्यों नहीं किया ?
विवाह तो किया ही है पर ये बात गुप्त रखी गयी है .परम रसमय परमात्मा प्रेम का आस्वाद अनेक रीतियों से लेते हैं . हम भारतीय हैं हमें ये मालूम होना चाहिए कि हमारे यहाँ रस के संबंध में महामनीषियों कि विविध मान्यताएं प्रचलित हैं .रसों में अग्रगण्य श्रृंगार रस है. श्रृंगार रस में स्थायी भाव का आस्वादन दो तरीके से हुआ करता है १ .स्वकीया नायिका में २ .परकीया नायिका में . तो श्री कृष्ण ने लौकिक संसारियों को ये बताने के लिए कि स्वकीया से अधिक परकीया में रस का चरम उत्कर्ष प्राप्त होता है..इसी रहस्य बताने के लिए ये स्पष्ट नहीं दिखाया कि उन्हों ने परम प्रेममयी श्रीराधा से विवाह किया है .वैसे तो रकृष्ण का विवाह श्रीब्रह्मा जी ने स्वयं कराया था ऐसा प्रसंग ब्रह्मवैवर्तपुराण में आता है ये प्राय कह ही लोग जानते होंगे .और जानकारी चाहिए तो हम से संपर्क करें .
   
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  2207 days 21 hrs 24 mins ago By Dasabhas DrGiriraj N
 माया से कैसे पार पाया जा सकता हैं?
'mam maya duratyayaa'-arthat maya se paar pana bhut kathin hai, satshastr, satsang, bhajan, bhakti se jab prabhu prasann hote hn to maya fir pareshan nhi kartee atah bhajan m lage raho
   
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  2208 days 40 mins ago By Ravi Kant Sharma
 माया से कैसे पार पाया जा सकता हैं?
जय श्री कृष्णा.... भगवान श्री कृष्ण गीता में कहते हैं...... मेरी इस माया को कोई भी प्राणी स्वयं पार नहीं कर सकता है।...... लेकिन जो व्यक्ति मेरे शरणागत हो जाता है, वह इस माया को आसानी से पार कर जाता है।__________ जो व्यक्ति निरन्तर भगवान के आश्रित होकर बिना किसी कामना के (निष्काम भावना से) अपने कर्तव्य-कर्मों का निर्वाह करता है, उसे एक दिन भगवान की ज्ञान रूपी नौका स्वतः प्राप्त हो जाती है, जिस पर सवार होकर व्यक्ति इस माया रूपी भव-सागर को आसानी पार कर जाता है।
   
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  2208 days 3 hrs 24 mins ago By Mohan Arora
 माया से कैसे पार पाया जा सकता हैं?
माया से पार पाना है तो माया पती (श्री कृष्ण) की शरण लो। उन्ही के भक्तो के शरणागत होकर उन्ही को रिझाओ उन्ही का भजन करो उनसे ही प्रेम केवल माया से पार ले जा सकता है। माया से मन को हटाना है तो कुछ छोड़ना नही पड़ता ब्लकि पकड़ना पड़ता है किसको? कृष्ण को अर्थात भगवान की शरण ही जीव को माया से मुक्त करा सकती है। जय श्री राधे
   
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  2208 days 18 hrs 18 mins ago By Vijay Mishra
 आध्यात्म जीवन में किस तरह सहायक है?
अध्यात्म ही हमारा बिशिष्ठ विज्ञान है ,जिन्हें इसका अध्ययन नहीं है वो आधे -अधूरे लोग हैं जो जीवन के मर्म ,इसके सार्थक उपयोग से दूर रह जाते है और सांसारिक जंजाल उनके जान पर भारी होने लगता है ,छटपटाते है किन्तु उन्हें मुक्ति द्वार नहीं दिखता क्योंकि अध्यात्म ही हमें आत्म विश्लेषण की शक्ति तथा जीवन के सदुपयोग के लिए अंतर्दृष्टि देता है .कलियुग में इसी का तो अभाव हुआ है जो जड़मति जीवन ,पापाचार ,अधर्म आदि में लोग आकंठ लिप्त है तथापि प्रसन्न है .
   
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  2208 days 20 hrs 55 mins ago By Meenakshi Goyal
 आध्यात्म जीवन में किस तरह सहायक है?
aadhyatm hamen anand, khushi, shanti, aur sukh sahaj mei pradan kar deta hain. ye hamara is lok mei to saath deta hi hai sath hi marne ke uparant jab hame bhagwan ke sanmukh khada hona hota hai us samay bhi ek dharm aur adhyatma hi hain jo hamare saath chalte hain. bhagwat mei aisa bataya gaya hai ki us samay jeev ko dharm kehta hai ki tum chinta na karna mei prabhu se tumhari sifarish karunga aur dekhunga ki tumhe kam se kam saza ho. bhagwat ki atmadev ki katha hame batati hai ki adhyatam jeevan mei hone se or na hone se gokarn aur dhundkari jaise do swarup prakat hote hain..................... gokarn maha pandit gyani, hai bhajnandi sant param.......par idhar dhundkari khal hai, snan shauch se kiya alam..........shav ke haathon se bhojan le, dushit padarth ko kare grahan...............vah krodhpurn ati pakhandi, hai kriyaheen, karta na bhajan.............................................lekin ant mei us dhundkari ko bhi apni mrityu uprant prapt prait yoni sudharne ke liye gokarn ji ki sharan mei ana pada tha aur jab gokarnji ne bhagvat ka paath kiya tab uski mukti huyi thi..........................................................ham bina adhyatam ke jee hi nahin sakte jaise hamare sharir ko bhuk pyaas lagti hai to use bhojan aur paani ki avashyakta hoti hai usi tarha jab hamari aatma ko bhuk lagti hai tab use adhyatm aur dharm ki avashyakta hoti hai. adhyatam is aatma ko us parmatma se milane ka sehaj marg hai. Adhyatm aatma ki saanson ke saath juda hai ya yun kahun ki saansen hi hai to galat na hoga. jab se ye jeev prabhu se alag hua tab se ek adhyatm hi hai jo uska pal pal par saath deta hai . aatma ati shuddh hai vah Astik aur nastik nahin hoti.............. bade se bade nastik par bhi jab koi vipatti sankat ya dukh aata hai tab vah bhi kisi na kisi rup mei prabhu ki sharan leta hai.....................
   
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  2208 days 22 hrs 1 mins ago By Ravi Kant Sharma
 आध्यात्म जीवन में किस तरह सहायक है?
जय श्री कृष्णा.... बिना आध्यात्मिक ज्ञान के मनुष्य जीवन, पशु जीवन के समान होता है।
   
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  2209 days 20 hrs 51 mins ago By Meenakshi Goyal
 भगवत भक्ति कैसे प्राप्त हो सकती हैं?
Binu satsang vivek na hoyi. Ram kripa binu sulabh na soyi
   
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  2209 days 22 hrs 38 mins ago By Ravi Kant Sharma
 भगवत भक्ति कैसे प्राप्त हो सकती हैं?
जय श्री कृष्णा.... ब्रह्म-साक्षात्कार होने के बाद ही व्यक्ति कर्म के बंधन से मुक्त होता है।...... कर्म के बंधन से मुक्त होने पर ही भगवान के एक रूप के प्रति पूर्ण श्रद्धा के साथ सम्पूर्ण समर्पण का भाव उत्पन्न होता है।...... सम्पूर्ण समर्पण होने के साथ ही भगवान की कृपा से अनन्य भक्ति प्राप्त होती हैं।..... ब्रह्म-साक्षात्कार से पहले सभी व्यक्ति कर्म के बंधन में ही होते हैं।
   
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  2209 days 23 hrs 49 mins ago By Meenakshi Goyal
 भगवत भक्ति कैसे प्राप्त हो सकती हैं?
bhagvat bhakti sirf bhagwan ki kripa se prapt hoti hai jab bhagwan kripa karenge to aapko bhakton ka sang karwayenge, aapni leela sunwayenge, aapne bhakton ke charitr sunwayenge aapne sankirtan mei le jayenge isse dheere dheere aap par bhi sang ka rang chadhega aur aap bhi bhagwaan ki bhakti paa sakenge. Jaisa ki ajmil ji ke saath hua tha unhone aapne dharm ka tyaag kiya aur saare galat karm kiye fir bhi bhagwan ko unpar daya aa gayi aur bhagwaan ne kuchh bhakton ko unke ghar bhej diya. bhakton ne jab rat bhar kirtan kiya to ajamil ji ki kuchh buddhi sudhri unhone un bhakton ke kehne par aapne putr ka naam narayan rakh diya. jab ajamil ji ka ant samay aaya to yamraj ke dut unhen pakdne ko aaye tab ajamil ne dar ke maare apne putr narayan ko awaz di us samay unka balak narayan to nahin aaya lekin ha bhagwan ke parshad zarur aa pahunche or yamraj ke duton ko waha se khali haath bhej diya. ye tha prabhav ek baar agyanta vash narayan naam lene ka. ajamil ji ye saara vritant apni aankhon se dekh rahe the iske baad unhone apne jeevan ko purntah krishnaarpan kar diya. to bhakti to tabhi prapt hoti hai jab prabhu kripa kar dete hain. agar aisa na hota to aaj saari duniya bhakt hoti kahin par bhi kaliyug ka prabhav dekhne ko hi nahin milta.
   
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  2210 days 16 hrs 13 mins ago By Chandrani Purkayasth
 भगवान से साक्षात्कार कैसे हो सकता हैं?
Koi dil se pukare o use aana hi hota ha, woh to prem ka pyasa ha, hum sab rupaye paise sansar baccho ke liye kitna kitna rote hein, kitna tadapte hein , uske liye kaun rota ha, jo uske birah me byakul hokar rota ha, wahi use pata ha....
   
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  2210 days 22 hrs 11 mins ago By Meenakshi Goyal
 भगवान से साक्षात्कार कैसे हो सकता हैं?
............. gyanam yadbrahmdarshnam..................jise parmatama ke darshan hote hain, uska jeevan kuchh bhinn hota hai. kuchh nirala hota hai. use antarik aanand milta hai. use bahar ka samgr sukh tuchchh lagta hai. jise parmatma ka anand mil jaata hai, vah kabhi aisa nahin kehta ki main ishvar ko janta hun....................................jisne paaya usne chhipaya..............jise parmatma ki anubhuti hoti hai, va aisa bol hi nahin saktaki main ishvar o janta hun. jo aisa kehta ki main parmatma ko janta hun, vah ishvar se hi dur hi hai. parantu jo aisa kehta hai ki main ishvar ko nahin jaan paaya, use bhi thik se bhi gyan nahin gyaan nahin hai. parmatma ko jaan paata hai, uska jeevan dhany ho jaata hai. vah adhik bol hi nahin pata. jo ishvar ko janta hai, vah ishvar se ek shan bhi dur nahin reh sakta................ soyi janat jaahi dehu janayi..... jaanat tumhin tumhin hoyi jaayi.
   
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  2210 days 22 hrs 29 mins ago By Meenakshi Goyal
 भगवान से साक्षात्कार कैसे हो सकता हैं?
jab tak deh-gyaan hai, tab tak parmatma nahin dikh padte hain. dev ke darshan karne hain to deh-gyan bhulna padega. jisko yaad hai ki " main pita hun, main patni hun, main purush hun, main stri hun." - vah parmatama ke darshan sahi se nahin kar sakta. use parmatama ke darshan thik se nahin hote. parmatma ki bhakti karte huye jo deh- bhaan bhulata hai, use apne bheetar virajmaan parmatma ke darshan hote hain. aatm-swarup mei parmatma ke darshan ko hi aparoksh darshan kehte hain. ...................................................khoj dala kul jahan mei, par pata tera nahin. jab pata tera laga to, ab pata mera nahin.................bhakt kehta hai-' kayi varshon se main tere peechhe laga tha. main sab mei tumhen khoj raha tha, par tum mile nahin. tumhara pata nahin mila. par jab tumhara darshan hua tab fir main hi nahin raha. prem ke atyadhik badh jaane par main aur tum alag rehte hi nahin...........................................................................laali dekhan main gayi, main bhi ho gayi laal....................... gopi baal krishn ke darshan karne ke liye yashoda mata ke ghar jaati hain, par jab prem badhne laga tab jahan-jahan uski drishti jaati hai, vahan-vahan use shri krishn hi dikh padte hain. bbhagwan mei magn gopi deh bhaan bhul jaati hai. tab gopi ko apne bheetar shri krishn dikh padte hain........................................................................................................ prem gali ati sankari taamen do na samayen..................... prem mei donon ek ho jaate hain. parmatma gyan swarup hain. gyan ke vishay nahin hai. jagat ke sampurn padarth gyan ke vishay ho sakte hain. jab main janta hun phoolon ki mala hai, tab main hua gyata aur phoolon ki mala huyi gyae.vyavhaar mei gyaan mei gyata aur gyae- aisa dvait rehta hai. parantu parmatma ka jisko anubhav hua, anubhuti huyi, vah bhagwan se alag nahin reh sakta............................................................
   
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  2211 days 2 hrs 5 mins ago By Ravi Kant Sharma
 भगवान से साक्षात्कार कैसे हो सकता हैं?
जय श्री कृष्णा.... श्रीमद भगवद गीता के अनुसार...... भगवान से साक्षात्कार के दो ही मार्ग है।...... १. निवृत्ति मार्ग यानि सांख्य मार्ग।....... २. प्रवृत्ति मार्ग यानि कर्म मार्ग।....... जब तक व्यक्ति व्रह्मचर्य आश्रम में होता है, तब तक प्रत्येक व्यक्ति के लिये दोनों मार्ग खुले होते हैं।..... जो व्यक्ति ने ब्रह्मचर्य आश्रम से सन्यास धर्म धारण करता है, उसे निवृत्ति मार्ग यानि सांख्य के सिद्धान्तों (यम, नियम, आसन, प्राणयाम, प्रत्यहार, धारणा, ध्यान, समाधि) पर क्रमशः दृड़ रहकर आचरण करने से एक दिन भगवान का साक्षात्कार स्वतः ही हो जाता है।.......... और जो व्यक्ति ब्रह्मचर्य आश्रम से गृहस्थ धर्म धारण करता है उसे प्रवृत्ति मार्ग यानि कर्म के सिद्धान्तों (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) पर क्रमशः दृड़ रहकर आचरण करने से एक दिन भगवान का साक्षात्कार स्वतः ही हो जाता है।
   
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  2211 days 2 hrs 27 mins ago By Ravi Kant Sharma
 भगवत प्रसाद का महत्व बाताये?
जय श्री कृष्णा.... संसार में भगवद प्रसाद के अतिरिक्त अन्य कुछ है ही नहीं।........ प्रत्येक व्यक्ति को जो कुछ भी मिला है वह सब भगवद प्रसाद ही तो है।....... भगवद प्रसाद प्रत्येक व्यक्ति को जन्म से ही प्राप्त होता है।........ मनुष्य शरीर से अधिक महत्वपूर्ण भगवद प्रसाद अन्य क्या हो सकता है?......... जिस व्यक्ति ने अपने शरीर को ही भगवद प्रसाद "मान" लिया है केवल उसके लिये संसार की प्रत्येक वस्तु भगवद प्रसाद रूप ही होती है, न कि केवल मन्दिर से प्राप्त होने वाला अन्न ही प्रसाद रूप होता है।
   
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  2211 days 17 hrs 55 mins ago By Meenakshi Goyal
 संत कौन है और उनके क्या लक्षण है?
बंदउँ प्रथम महीसुर चरना। मोह जनित संसय सब हरना॥ सुजन समाज सकल गुन खानी। करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी॥................... पहले पृथ्वी के देवता ब्राह्मणों के चरणों की वन्दना करता हूँ, जो अज्ञान से उत्पन्न सब संदेहों को हरने वाले हैं। फिर सब गुणों की खान संत समाज को प्रेम सहित सुंदर वाणी से प्रणाम करता हूँ॥......................................................... साधु चरित सुभ चरित कपासू। निरस बिसद गुनमय फल जासू॥ जो सहि दुख परछिद्र दुरावा। बंदनीय जेहिं जग जस पावा॥................... संतों का चरित्र कपास के चरित्र (जीवन) के समान शुभ है, जिसका फल नीरस, विशद और गुणमय होता है। (कपास की डोडी नीरस होती है, संत चरित्र में भी विषयासक्ति नहीं है, इससे वह भी नीरस है, कपास उज्ज्वल होता है, संत का हृदय भी अज्ञान और पाप रूपी अन्धकार से रहित होता है, इसलिए वह विशद है और कपास में गुण (तंतु) होते हैं, इसी प्रकार संत का चरित्र भी सद्गुणों का भंडार होता है, इसलिए वह गुणमय है।) (जैसे कपास का धागा सुई के किए हुए छेद को अपना तन देकर ढँक देता है, अथवा कपास जैसे लोढ़े जाने, काते जाने और बुने जाने का कष्ट सहकर भी वस्त्र के रूप में परिणत होकर दूसरों के गोपनीय स्थानों को ढँकता है, उसी प्रकार) संत स्वयं दुःख सहकर दूसरों के छिद्रों (दोषों) को ढँकता है, जिसके कारण उसने जगत में वंदनीय यश प्राप्त किया है॥......................................................... मुद मंगलमय संत समाजू। जो जग जंगम तीरथराजू॥ राम भक्ति जहँ सुरसरि धारा। सरसइ ब्रह्म बिचार प्रचारा॥................... संतों का समाज आनंद और कल्याणमय है, जो जगत में चलता-फिरता तीर्थराज (प्रयाग) है। जहाँ (उस संत समाज रूपी प्रयागराज में) राम भक्ति रूपी गंगाजी की धारा है और ब्रह्मविचार का प्रचार सरस्वतीजी हैं॥......................................................... बिधि निषेधमय कलिमल हरनी। करम कथा रबिनंदनि बरनी॥ हरि हर कथा बिराजति बेनी। सुनत सकल मुद मंगल देनी॥................... विधि और निषेध (यह करो और यह न करो) रूपी कर्मों की कथा कलियुग के पापों को हरने वाली सूर्यतनया यमुनाजी हैं और भगवान विष्णु और शंकरजी की कथाएँ त्रिवेणी रूप से सुशोभित हैं, जो सुनते ही सब आनंद और कल्याणों को देने वाली हैं॥......................................................... बटु बिस्वास अचल निज धरमा। तीरथराज समाज सुकरमा॥ सबहि सुलभ सब दिन सब देसा। सेवत सादर समन कलेसा॥................... (उस संत समाज रूपी प्रयाग में) अपने धर्म में जो अटल विश्वास है, वह अक्षयवट है और शुभ कर्म ही उस तीर्थराज का समाज (परिकर) है। वह (संत समाज रूपी प्रयागराज) सब देशों में, सब समय सभी को सहज ही में प्राप्त हो सकता है और आदरपूर्वक सेवन करने से क्लेशों को नष्ट करने वाला है॥......................................................... अकथ अलौकिक तीरथराऊ। देह सद्य फल प्रगट प्रभाऊ॥................... वह तीर्थराज अलौकिक और अकथनीय है एवं तत्काल फल देने वाला है, उसका प्रभाव प्रत्यक्ष है॥......................................................... दोहा : सुनि समुझहिं जन मुदित मन मज्जहिं अति अनुराग। लहहिं चारि फल अछत तनु साधु समाज प्रयाग॥................... जो मनुष्य इस संत समाज रूपी तीर्थराज का प्रभाव प्रसन्न मन से सुनते और समझते हैं और फिर अत्यन्त प्रेमपूर्वक इसमें गोते लगाते हैं, वे इस शरीर के रहते ही धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष- चारों फल पा जाते हैं॥......................................................... चौपाई : मज्जन फल पेखिअ ततकाला। काक होहिं पिक बकउ मराला॥ सुनि आचरज करै जनि कोई। सतसंगति महिमा नहिं गोई॥................... इस तीर्थराज में स्नान का फल तत्काल ऐसा देखने में आता है कि कौए कोयल बन जाते हैं और बगुले हंस। यह सुनकर कोई आश्चर्य न करे, क्योंकि सत्संग की महिमा छिपी नहीं है॥......................................................... बालमीक नारद घटजोनी। निज निज मुखनि कही निज होनी॥ जलचर थलचर नभचर नाना। जे जड़ चेतन जीव जहाना॥................... वाल्मीकिजी, नारदजी और अगस्त्यजी ने अपने-अपने मुखों से अपनी होनी (जीवन का वृत्तांत) कही है। जल में रहने वाले, जमीन पर चलने वाले और आकाश में विचरने वाले नाना प्रकार के जड़- चेतन जितने जीव इस जगत में हैं॥......................................................... मति कीरति गति भूति भलाई। जब जेहिं जतन जहाँ जेहिं पाई॥ सो जानब सतसंग प्रभाऊ। लोकहुँ बेद न आन उपाऊ॥................... उनमें से जिसने जिस समय जहाँ कहीं भी जिस किसी यत्न से बुद्धि, कीर्ति, सद्गति, विभूति (ऐश्वर्य) और भलाई पाई है, सो सब सत्संग का ही प्रभाव समझना चाहिए। वेदों में और लोक में इनकी प्राप्ति का दूसरा कोई उपाय नहीं है॥......................................................... बिनु सतसंग बिबेक न होई। राम कृपा बिनु सुलभ न सोई॥ सतसंगत मुद मंगल मूला। सोई फल सिधि सब साधन फूला॥................... सत्संग के बिना विवेक नहीं होता और श्री रामजी की कृपा के बिना वह सत्संग सहज में मिलता नहीं। सत्संगति आनंद और कल्याण की जड़ है। सत्संग की सिद्धि (प्राप्ति) ही फल है और सब साधन तो फूल है॥......................................................... सठ सुधरहिं सतसंगति पाई। पारस परस कुधात सुहाई॥ बिधि बस सुजन कुसंगत परहीं। फनि मनि सम निज गुन अनुसरहीं॥................... दुष्ट भी सत्संगति पाकर सुधर जाते हैं, जैसे पारस के स्पर्श से लोहा सुहावना हो जाता है (सुंदर सोना बन जाता है), किन्तु दैवयोग से यदि कभी सज्जन कुसंगति में पड़ जाते हैं, तो वे वहाँ भी साँप की मणि के समान अपने गुणों का ही अनुसरण करते हैं। (अर्थात्‌ जिस प्रकार साँप का संसर्ग पाकर भी मणि उसके विष को ग्रहण नहीं करती तथा अपने सहज गुण प्रकाश को नहीं छोड़ती, उसी प्रकार साधु पुरुष दुष्टों के संग में रहकर भी दूसरों को प्रकाश ही देते हैं, दुष्टों का उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।)॥......................................................... बिधि हरि हर कबि कोबिद बानी। कहत साधु महिमा सकुचानी॥ सो मो सन कहि जात न कैसें। साक बनिक मनि गुन गन जैसें॥................... ब्रह्मा, विष्णु, शिव, कवि और पण्डितों की वाणी भी संत महिमा का वर्णन करने में सकुचाती है, वह मुझसे किस प्रकार नहीं कही जाती, जैसे साग-तरकारी बेचने वाले से मणियों के गुण समूह नहीं कहे जा सकते॥......................................................... दोहा : बंदउँ संत समान चित हित अनहित नहिं कोइ। अंजलि गत सुभ सुमन जिमि सम सुगंध कर दोइ॥................... मैं संतों को प्रणाम करता हूँ, जिनके चित्त में समता है, जिनका न कोई मित्र है और न शत्रु! जैसे अंजलि में रखे हुए सुंदर फूल (जिस हाथ ने फूलों को तोड़ा और जिसने उनको रखा उन) दोनों ही हाथों को समान रूप से सुगंधित करते हैं (वैसे ही संत शत्रु और मित्र दोनों का ही समान रूप से कल्याण करते हैं।)॥......................................................... संत सरल चित जगत हित जानि सुभाउ सनेहु। बालबिनय सुनि करि कृपा राम चरन रति देहु॥ ................... संत सरल हृदय और जगत के हितकारी होते हैं, उनके ऐसे स्वभाव और स्नेह को जानकर मैं विनय करता हूँ, मेरी इस बाल-विनय को सुनकर कृपा करके श्री रामजी के चरणों में मुझे प्रीति दें॥ ........................................................................................................................................................
   
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