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विचार

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आइए आज का सतसंग शुरू करने से पहले हम दो मिनिट के लिए भगवन नाम का कीर्तन करें ।

“ जय-जय, श्यामा-श्याम, जय बंशीवट वृदांवन धाम....”

श्री राधा रानी बाँके बिहारी जी के चरणों में केाटि केाटि वंदन है ।

आज का हमारा सतसंग का विषय है “विचार” विचार क्या है? हमारी जितनी भी बाहरी क्रियाएँ होती है वो हमारे विचारों से होती है । जो हर पल मन में घट रहा है जो हर पल मन में आ रहा है । उसी का नाम विचार है. किसी वस्तु को लेकर, किसी भी चीज को लेकर, जो हर पल हमारे मन में आ रहा है उसी का नाम विचार है । और हमारी जितनी बाहरी क्रियाएँ है वो हमारी भावना और विचारों का स्पष्ट सूचक है । जो भी हम बाहर से है. प्रेम से कहिए श्री राधे


विचार एक शक्ति है और इसे अगर सुव्यवस्थ्ति कर लिया जाए तो ये अजेय हो जाती है इसे हम ऐसे समझ सकते है कि जैसे पानी होता है पानी समुद्र में या उचाँई से गिर रहा हो, तो उसे बाँधना या रोकना बहुत मुष्किल है । क्योकि वह अव्यवस्थ्ति है वो उसमें शक्ति तो अपार है पर वो तबाही भी ला सकती है ।


हम देखते है कि समुद्र में पानी होता है तो किनारे पर लहरें उठती है  पर जब वो किनारे को तोड देती है्. तो उसकी शक्ति कितनी अपार होती है । जैसे सुनामी लहरें तो वहीं पानी जब उसे व्यवस्थित कर लिया जाता है तो वो किसी बाँध या नहर के रूप में बहता है । तो फिर वो कितना अच्छा परिणाम देता है । शक्तिी दोंनो जगह है पर एक जगह वो व्यवस्थित है दूसरी जगह वो अव्यवस्थित है और तबाही का कारण बनती है । और जब व्यवस्थित है तो सबकी भलाई करती है. वो बाँध सबको रोजगार देता है  बिजली देता है । कितनी शक्ति है । ऐसे ही विचार हमारे मन की शक्ति है पर वो बंधे नहीं होंगे सुव्यवस्थित नहीं होगे तो वो बर्बाद कर देंगे व्यक्ति को और जब वो सुव्यवस्थित होंगे तो वो व्यक्ति का कल्याण भी कर सकते है । खुद का भी कल्याण कर सकते है और दूसरों का भी.


ये विचार ही तो हमें सबसे अलग करता है । एक जानवर और इंसान में विचार और बुद्वि का ही तो फर्क है । हमारे पास बुद्वि है विचार आ सकते है और ये मनुष्य के अलावा और किसी में भी नहीं आ सकते है । तो हमें अपने विचारों को व्यवस्था में जमाना है ताकि वो खुद का भी कल्याण कर सकें और दूसरों का भी विचार अगर शुद् होंगे तो वाणी और आचार हमारी जो बाहरी क्रियाए है वो विचार ही तो बताता है कि हम कैसे है तो जब विचार शुद् हो जाएगें तो वाणी भी शुद् होगी और यहीं साधन है आनंद और मुक्तिी का. साधक जीवन भर जिन विचारों को सोचता है वहीं उसकी मृत्यु के बाद उसकी दिशा  को निर्धारित करते है । प्रेम से कहिए श्री राधे


जीवन हमें वहीं देता है जो वास्तव में हम विचारते है चाहते है । हर व्यक्ति को वहीं मिलता है जैसे हमारे विचार है वेसा ही हमारा जीवन होता है ।


प्रसंग १- जैसे एक व्यक्ति था तो वो जंगल से जा रहा था तो चलते चलते थक गया तो वो एक पेड के नीचे बैठ गया तो वो वृक्ष कल्प वृक्ष था. उसके नीचे बैठकर जो मागों वो पूरा हो जाता है । तो उस व्यक्ति को ये नहीं पता था कि ये वृक्ष कल्प वृक्ष था । अब वृक्ष के नीचे बैठकर उसकी इच्छा हुई कि पानी पीने को मिल जाए. तो वो तो कल्प वृक्ष था तो तुरंत पानी का स्त्रोत सामने आ गया. तो उसने पानी पिया.


फिर उसकी इच्छा हुई की कुछ अच्छा खाने को मिल जाए तो उसके सामने तुरंत अनेक प्रकार के भोजन उसके सामने आ गए विचार करते ही तो वो खाना खाने लगा. तो उसके बाद वो सोचता है कि भूख मिट गई, पानी भी पी लिया. औा फिर सोचने लगा कि अब बिस्ता और मिल जाए तो सो जाएँ तो तुरंत बिस्तर आ गए तो वो सोने लगा औ्रर विचार करता है कि ऐसा ना हो कि यहाँ शेर आ जाए और मै सोता ही रहूँ और वो आ जाए और मुझे खा जाए.

तो जैसे ही उसके मन में ये विचार आया तो शेर उसके सामने आ गया और उस व्यक्ति को खा लिया तो कहने का मतलब हमें वहीं मिलता है जो हम विचार करते है, चाहते है । वो व्यक्ति को कल्प वृक्ष के नीचे था पर उसके विचार ने ही उसने बर्बाद कर दिया. तो ये हमारे उपर है एक विचार पूरी जिदंगी बदल सकता है.

प्रसंग २ -  एक कुम्हार था तो वो घडे मिटटी के बर्तन बनाता था तो वो सिगार बनाने लगा जिसमें भरकर तम्बाकू पीते है. तो बनाते-बनाते उसका विचार बदला और उसके एक सुराही बना दी औेर जैसे ही वो बना के रखा तो वो घडा बोला कि कुम्हार तुमने ये बहुत अच्छा काम किया जो अपना विचार बदल दिया. तुम्हारे एक विचार ने मेरी जिंदगी बाद दी . कहाँ तुम मुझे सिगार बना रहे थे जिससे मै भी जलती और दूसरे के होंठो को हद्रय को भी जलाती लेकिन देखो तुम्हारे एक विचार ने मुझे घडा बना दिया अब मै भी ठंडी रहूगी और दूसरों की भी प्यास बुझाउॅगी.

तो एक अच्छा विचार हमं प्रगति की ओर ले जा सकता है ।और एक बुरा विचार हमें निराषा की ओर ढकेल सकता है. एक डाक्टर थे उनका कहना था कि मेरे यहाँ जो मरीज आते है । उनमें से जो पच्चतर परसेंट लोग होते है उन्हें दवा की नहीं ईष्वर की कृपा और आषीर्वाद की जरूरत हो ती है । ज्यादातर रोग अस्वस्थ विचारों के कारण रोगी होते है. जो दिमाग पर अपना कब्जा जमा लेते है । ये बात सही है कि बीमार व्यक्ति को औषिधी की जरूरत होती है पर अस्वस्थ विचार वाले को परमात्मा की जरूरत होती है । व्यक्ति केवल शरीर से ही नहीं विचारों से भी बीमार हो जाता है । जो शरीर से है उसको शायद दवा ठीक कर दें और जो विचारों से बीमार है, उसे तो फिर सतसंग से संत से और परमात्मा ही ठीक कर सकते है. क्योंकि शुद्व विचार ही हमारा जीवन बनाते है । प्रेम से कहिए श्री राधे


कलियुग में विचारों की बडी विशेषता है । यहाँ अगर व्यक्ति अचछा विचार मन में लाता है । तो विचार करने से ही वो काम पूरा हो जाता है । जैस किसी के मन में ये विचार है कि कहीं पर भागवत हो रही है मै वहां जाकर कुछ मदद कर देता, तन से या मन से द्रव्य से जो भी हो जाए. तो इतना विचार करते ही तो जो वास्तव में सहायता का फल मिल जाता है. ये सब करने का वो विचार करने से ही मिल जाता तो ये कलियुग की विषेषता है । एक अच्छे विचार करने से वो पुण्य मिल जाता है ।


और बुरा विचार करने जब तक हम उसे करेंगे नही तब तक फल नहीं मिलेगा तो बुरा विचार आते ही हम उसे त्याग दें. जो हम करने जा रहें है बुरा काम वो कल पर टाल दे तो हम बुरा काम नहीं करेंगे  कल तक हमारा विचार बदल जाएगा. लेकिन अच्छा विचार को कल पर मत छोडो क्योंकि मन का कोई भरोसा नहीं अगर दान का विचार है तो तुरंत दान कर दो वरना कल सोंचेंगें कि दान करके क्या करेंगे  इस मन का कोई भरोसा नहीं तो अच्छे विचारों को तुरंत करना है और बुरे विचारों को कल पर टालना है प्रेम से कहिए श्री राधे


सही मायने में जीवन विचारों से ही बनता है जीवन में ये मायने नहीं रखता कि हम कितना जिए जीवन में हम कैसे जिए ये ज्यादा मायने रखता है. वास्तव में जीवन में जो क्षण हमनें परमात्मा को जानने में लगाए. वास्तव में जो वर्ष थे जिनमें हमने परमात्मा को जाना वहीं जीवन था बाकि तो हमनें यूँ ही गवाँ दिया जीवन आध्यात्म भी यहीं कहता है कि हम कैसे जिए ये जरूरी है । कितना जिए ये नहीं. प्रेम से कहिए श्री राधे


प्रसंग ३-
गौतम बुद्व भगवान थे उनकी अस्सी वर्ष की आयु थी पर लोग समझते थे कि वो सिर्फ चालीस वर्ष ही जिए है क्योंकि उन वर्षों में उन्हेंने खुद को जाना, परमात्मा को जाना, व्यक्ति जितने  वर्षों में खुद को जानता है वो वास्तव में उतने ही वर्ष जिया है ।


कहने का मतलब विचार सबकुछ सकता है वो निराषा की तरफ भी ले जा सकता है । और सकारात्मक विचार व्यक्ति को उन्नति की ओर ले जा सकता है एक व्यक्ति बहुत परेषान था काम का बोझा उसके सिर पर बहुत था अपने आप को दुखी मानता था तनाव ग्रस्त हो सुका था तो वो डाक्टर के पास गया और बोला मुझे नींद नही आती है मेरे सिर पर बहुत काम का बोझा है तो डाक्टर ने कहा - कि तुम अपने काम के बोझा को कम कर दो. तो वो कहता - कि मै तो घर में भी आफिस का काम करता रहता हॅू क्योंकि काम बहुत है ।

तो डाक्टर कहता है - मै आपको सलाह देता हूँ कि आपको दवा की जरूरत नहीं है आप अपने हफ्ते में आधे दिन की छुटटी लेकर किसी श्मशान में जाकर बैठो, तो वो कहता - कि मै वैसे ही बहुत बिजी हूँ. और आप ऐसा कहते हो,

तो वो कहता है-  कि हां ! तुम वहां जाकर उन कब्रों केा देखो जो लोग वहा दफन है । तो वो लोग भी यहीं सोचते थे कि मै जो काम करता हूँ वो को्ई नहीं कर सकता वो भी बहुत व्यस्थ थे. अब तुम सोचों कि तुम अगर दुनिया से चले जाओ तो तुम्हारे ना रहने से कोई दूसरा वो काम कर लेगा. तुम्हारे जाने से दूनिया के काम बंद तो नहीं होंगे. सब चलते रहेंगे पर ये केवल तुम्हारें विचारों ने ही तुम्हें डिप्रेषन में रखा है.

जिस दिन तुमने  मन से ये विचार निकाल दिया और श्मषान में बैठकर तुमने उन लोगों को देखकर ये विचार लाए मन में कि ये वहीं लोग है. जो दुनिया में बिजी थे और इनके जाने के बाद भी काम चल रहे है दुनिया के और मेरे जाने के बाद भी ये काम चलते रहेंगे उसी दिन तुम्हारी टेंषन कम हो जाएगी । और वो व्यक्ति के समझ में बात आ गई फिर वो व्यक्ति  श्मषान नहीं गया उसकी जिंदगी उत्सपूर्वक हो गई वो टेंषन से बाहर आ गया. तो उसका हर काम आसानी से होनें लगा और वो जाना गया जो भी अभी तका हुआ वो मरे मन का भ्रम था मेरे विचार थे मै जैसा विचार करता थ वैसा मेरा जीवन था मैने वो विचार छोड दिया तो मेरा जीवन सुखमय हो गया प्रेम से कहिए श्री राधे


कहने का अभिप्राय हम जैसा विचार करेंगे वैसी ही हमें ये दुनिया नजर आएगी वैसा ही हमारा जीवन बन जाएगा विचार हमारे जीवन के तरीके को बताता है । और जब हम मरेंगे तो हमारी गति भी वो ही निर्धारित करेंगा हमारे विचार कैसे है हम कैसे जिए इसलिए विचार को शुद्व करना बहुत जरूरी है वो ही हमारे अंतहकरण का निर्माण करता है । उसी से फिर आदत औेर आदत से संस्कार का निर्माण होता है । एक विचार चरित्र को बनाता है । तो वो विचार को समझना बहुत जरूरी है ।


“राधे-राधे”
 

Comments
2011-09-07 14:47:54 By Pawan khurana

So sweet

2011-09-07 14:44:49 By Pawan khurana

So sweet

2011-08-08 15:35:25 By Vipin Sharma

Ati Uttam

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