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इश्क

 
तेरे दर का भला कौन पता देता है
 
 

"तेरे दर का भला कौन पता देता है, जिसको पूँछो वही कुछ दूर बता देता है

              

जिसको तुम्हारा पता मिल गया है, हकीकत में तू उसको मिल गया है 

 

फरिश्ते तेरे नाम पे झूमते है, भगत जन भी तेरे चरण चूमते है,  

      

 जहाँ तूने इठलाके चिलमन उठा दी वही प्रेमियो ने जिंदगानी लुटा दी, 

 

जहाँ पर तुम्हारे कदम रुक गये है वही शंहनशाहो के सर झुक गये है"

 

 

 

 

"मन में है बसी, बस चाह यही, कि नाम तुम्हारा उच्चारा करूँ, 

            

 बिठलाके तुम्हे मन मंदिर में, मनमोहनी रूप निहारा करूँ 

 

भर के दृग पात्र में प्रेम का जल, पद पंकज नाथ पखारा करुँ 

                

बन प्रेम पुजारी तुम्हारा प्रभु, नित आरती भव्य उतारा करूँ 

 

तुम अयोग्य जान बिसराओ मुझे, पर में ना तुम्हे बिसराया करूँ, 

              

     गुणगान करूँ नित ध्यान धरु, तुम मान करो में मनाया करूँ, 

 

 तेरे पदपंकज की धूलि, नित शीश पे अपने धारा करूँ 

              

   तरे प्यारो से प्यार करुँ मै सदा, तेरे चाहने वालो को चाहा करूँ"

 

 

"जय जय श्री राधे"


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!! जय जय श्री राधे !!
 
 
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